राज्य ब्यूरो, श्रीनगर : राज्य प्रशासनिक परिषद (एसएसी) ने बुधवार को एक अहम फैसले में 850 मेगावाट की रतले जलविद्युत परियोजना के विकास और परियोजना के व्यावसायिक ऑपरेशन की शुरुआत से सात वर्षो के भीतर जम्मू कश्मीर को स्थानांतरित करने के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए एक अलग ज्वाइंट वेंचर कंपनी (जेवीसी) की स्थापना को मंजूरी दे दी।

इस कंपनी में भारत सरकार (केंद्रीय सार्वजनिक उपक्रम) और जम्मू कश्मीर (जेएंडकेएसपीडीसी) कंपनी में परिभाषित शेयर के आधार पर दो भागीदार होंगे। एसएसी ने यह फैसला आज राज्यपाल सत्यपाल मलिक की अध्यक्षता में हुई बैठक में लिया है। बैठक में राज्यपाल के तीनों सलाहकार के विजय कुमार, बीबी व्यास, खुर्शीद अहमद गनई के अलावा मुख्यसचिव बीवीआर सुब्रहमण्यम भी मौजूद थे।

एसएसी ने रतले परियोजना के लिए एक पृथक जेवीसी को मंजूरी देने के अलावा 15-25 फीसद के अनुपात में मालिकाना हक के साथ निशुल्क ऊर्जा (स्थानीय क्षेत्र विकास निधि समेत) ज्वाइंट वेंचर के पांच मॉडल भी केंद्रीय ऊर्जा मंत्रालय भारत सरकार में जमा कराने के प्रस्ताव अनुमोदित किया ताकि सर्वश्रेष्ठ ज्वाइंट वेंचर मॉडल को चुना जा सके। इन प्रस्तावों या मॉडलों के आकलन और विश्लेषण से पता चला है कि यह सभी जम्मू कश्मीर के हक में है। कारण, अधिकांश मालिकाना हक 51 से 90 फीसद तक राज्य के अधिकार में ही रहेगा।

निर्माण की लंबी अवधि और उसके साथ राहत एवं पुनर्वास मुद्दों के अलावा शुरुआत में भारी पूंजी निवेश के चलते जल विद्युत परियोजनाएं निजी निवेशकों के लिए निवेश की दृष्टि से ज्यादा आकर्षक नहीं रह गई है। इसके अलावा देश की नामी निर्माण कंपनियां इस समय आर्थिक दिक्कतों का सामना कर रही हैं और वह ऐसे बड़े निवेश से बच रही हैं। निवेश जोखिम को कम करने के लिए निर्माण कंपनिया अब जल विद्युत परियोजनाओं का मालिक बनने के बजाय उनके विकास और निर्माण में ठेकेदार की भूमिका निभाने में सुविधा महसूस करती हैं।

¨सधु जल नदी समझौते के तहत पश्चिमी क्षेत्र की नदियों पर जलविद्युत परियोजनाओं के निर्माण की अहमियत को देखते हुए राज्य सरकार ने जम्मू कश्मीर राज्य ऊर्जा विकास निगम और केंद्रीय सार्वजनिक उपक्रमों के साथ साझेदारी में परियोजनाओं के विकास का प्रस्ताव रखा था। इससे पूर्व पकलदुल, कीरु, कवार के लिए भी ज्वाइंट वेंचर कंपनी बनाई गई है।

850 मेगावाट की रतले जलविद्युत परियोजना किश्तवाड़ जिले में द्रबशाला के पास चिनाब दरिया पर दुलहस्ती परियोजना और बगलियार परियोजना के बीच बनेगी। यह परियोजना देश और राज्य की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के अलावा लोगों के लिए रोजगार और विकास को भी यकीनी बनाएगा। यह परियोजना पांच वर्षो में पूरी होने का अनुमान है।

Posted By: Jagran