राज्य ब्यूरो, श्रीनगर : उड़ी सेक्टर में नियंत्रण रेखा से सटे एक सौतेली मां और सौतेले भाई की हैवानियत का शिकार बनी मासूम बच्ची से दुष्कर्म और हत्या की गुत्थी सुलझाने वाले एसएसपी बारामुला इम्तियाज हुसैन मीर इस अपराध से आहत हैं। उनकी हालत का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इस मामले का जिक्र करते हुए उनका गला भर जाता है।

गौरतलब है कि 24 अगस्त को पुलिस स्टेशन बोनियार, उड़ी में मुश्ताक अहमद गनई निवासी लरी त्रिकांजन ने अपनी नौ वर्षीय बच्ची के लापता होने की शिकायत दर्ज कराई। उसने अपनी बेटी के अगवा होने की आशंका जताते हुए बताया कि वह 23 अगस्त से गायब है। इस शिकायत पर पुलिस ने एफआइआर दर्ज कर छानबीन शुरू कर दी। पुलिस ने लड़की का पता लगाने के लिए हर संभव प्रयास किया, लेकिन कोई सुराग नहीं मिला। दो सितंबर को लापता लड़की का क्षतिग्रस्त शव उसके मकान से करीब एक किलोमीटर दूर जंगल में मिला। लड़की का शव बरामद होने के बाद उड़ी में लोगों ने सोमवार को हड़ताल भी की। पिछले दिनों पुलिस ने इस मामले की गुत्थी सुलझाते हुए मृतका की सौतेली मां और भाई समेत पांच लोगों को गिरफ्तार किया है। नौ वर्षीय बच्ची से उसके सौतेले भाई ने अपने दोस्तों के साथ मिलकर दुष्कर्म किया। पीड़िता की सौतेली मां यह सब देखती रही। उसने उसका गला दबाकर उसकी आवाज हमेशा के लिए शांत कर दी। जबकि सौतेले भाई ने रिश्ते को तार तार करने के बाद उसकी आंखें निकाली और उसकी आंखों में ही नहीं गुप्तांग में भी कथित तौर पर तेजाब डाला था।

इस मामले को जल्द हल करने और सभी आरोपितों को गिरफतार करने पर लोगों ने एसएसपी बारामुला इम्तियाज हुसैन मीर के प्रति आभार जताते हुए जब उनके गले में हार डाल उन्हें सम्मानित किया तो वह रो पड़े। उन्होंने भर्राए गले से कहा कि पता नहीं हमारे समाज को क्या हो गया है। मेरी खुद की 10 साल की बच्ची है। मैं इस घटना से सिहर उठा हूं। मैं जब भी इस मामले को याद करता हूं तो अंदर से हिल जाता हूं। मेरे पास इस जुर्म को बयां करने के लिए अल्फाज नहीं हैं। एक मां और भाई ऐसा कर सकते हैं, यह सोचकर ही डर लगता है।

गौरतलब है कि गत दो दिसंबर को लड़की का शव मिलने के बाद पुलिस ने अपनी जांच का दायर बढ़ाया। पूछताछ में लड़की के पिता ने बताया कि उसने दो शादियां की हैं। उसकी पहली पत्नी फहमीदा त्रिकांजन गांव की रहने वाली है, जबकि दूसरी पत्नी खुश्बु एक गैर रियासती महिला है। खुश्बु झारखंड की रहने वाली है। लापता लड़की खुश्बु की बेटी है। फहमीदा अक्सर माल मवेशी लेकर घर के बाहर ही रहती है, जबकि खुश्बु अधिकांश समय घर में ही रहती है और खाना पकाना व अन्य घरेलू काम वही करती है।

प्रवक्ता ने बताया कि जिस समय लड़की का शव मिला था, उस समय एसडीपीओ उड़ी मेहराजुदीन रैना और थाना प्रभारी बोनियार इकबाल अहमद ने मौके पर फारेंसिक व मेडिकल टीम के साथ जाकर हालात का जायजा लिया था। उन्होंने शव की स्थिति का संज्ञान लेते हुए कई सुराग भी जुटाए और पता चला कि यह सिर्फ अगवा और हत्या का मामला नहीं है। उन्होंने उसी समय इस मामले को हल करने के लिए एक विशेष जांच टीम बनाई।

जांच टीम ने सभी संदिग्ध लोगों और मृतक के मां-बाप व अन्य रिश्तेदारों से भी पूछताछ की। इस दौरान मृतका की सौतेली मां फहमीदा के बयान संदेहास्पद लगे। जब उससे कुछ सख्ती बरती गई तो उसने सारी कहानी उगल दी। उसने बताया कि वह अपनी सौतन खुश्बु और उसके बच्चों से ईष्र्या करती थी। उसे लगता था कि उसका खा¨वद मुश्ताक सिर्फ खुश्बु और खुश्बु से पैदा बच्चों से ही प्यार करता है। इसलिए उसने एक दिन अपनी सौतेली बेटी को रास्ते से हटाने का फैसला किया।

फहमीदा ने बताया कि वह 23 अगस्त को अपनी सौतेली बेटी को लेकर जंगल में गई। अपने साथ वह एक तेजधार हथियार भी ले गई। रास्ते में उसने अपने 14 वर्षीय बेटे साहिल को भी बुलाया। साहिल अपने दो दोस्तों 19 वर्षीय कैसर अहमद पुत्र सिकंदर मीर और 14 वर्षीय आदिल अहमद पुत्र बशीर अहमद के साथ जंगल में पहुंच गए। यह दोनों भी ¨त्रकाजन के ही रहने वाले हैं। इनके अलावा 28 वर्षीय नसीर अहमद खान उर्फ गुड्डो पुत्र शेर जमान खान निवासी लरी त्रिकांजन भी इस अपराध में शामिल हो गया।

जंगल में पहुंचने पर फहमीदा के इशारे पर सबसे पहले कैसर ने लड़की के साथ दुष्कर्म किया और उसके बाद साहिल ने इस कृत्य को अंजाम दिया। आदिल और नसीर ने भी नाबालिग बच्ची को अपनी हवस का शिकार बनाया। फहमीदा यह सब अपनी आंखों से देखती रही। इसके बाद फहमीदा ने लड़की का गला दबाया और साहिल ने अपनी सौतेली बहन के सिर पर कुल्हाड़ी से वार किया। इससे लड़की की मौके पर ही मौत हो गई।

लड़की की हत्या करने के बाद आदिल अपने घर गया और वहां से एक प्लास्टिक की बोतल में तेजाब लाया। आदिल के घर में टाटा सूमो वाहन की बैटरी के लिए तेजाब रहता है। कैसर ने लड़की की दोनों आंखें एक धारदार हथियार के साथ नोची और उसके बाद उसके शव पर तेजाब फेंका दिया ताकि कोई पहचान न सके। इसके बाद उन्होंने उसका शव वहीं झाड़ियों में छिपा उसे घास और पत्तियों से ढक दिया।

Posted By: Jagran