श्रीनगर में रोज 110 टन कम होगा प्रदूषण, निजी गाड़ियों के दबाव कम होने से बदलेगी हवा; सालाना 12 लाख लीटर ईंधन की बचत
श्रीनगर में एक शोध के अनुसार, सार्वजनिक परिवहन को बेहतर बनाने और निजी वाहनों पर निर्भरता कम करने से प्रतिदिन 110 टन कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन कम किया जा सकता है।
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श्रीनगर में रोज 110 टन कम हो सकता है प्रदूषण। फोटो जागरण
HighLights
सार्वजनिक परिवहन सुधार से 110 टन CO2 कम होगा।
निजी वाहनों पर निर्भरता घटाने से प्रदूषण में कमी।
इलेक्ट्रिक बसें और ट्रैफिक प्रबंधन अहम उपाय हैं।
राज्य ब्यूरो, श्रीनगर। खूबसूरत वादियों के बीच बसे श्रीनगर शहर की सड़कों पर अगर निजी गाड़ियों का दबाव कम हो और सार्वजनिक परिवहन को स्वच्छ व आधुनिक बनाया जाए, तो शहर की हवा में बड़ा सुधार हो सकता है।
वर्ष 2026 में प्रकाशित एक शोध के मुताबिक, बेहतर सार्वजनिक परिवहन, इलेक्ट्रिक बसों और ट्रैफिक प्रबंधन के जरिए श्रीनगर में रोजाना करीब 110 टन कार्बन डाइऑक्साइड का उत्सर्जन कम किया जा सकता है।
इससे न केवल प्रदूषण घटेगा, बल्कि ईंधन की खपत और ट्रैफिक जाम से होने वाली परेशानियों में भी कमी आ सकती है। हालांकि, ये सभी फायदे शोध में किए गए अनुमान हैं, अभी हासिल की गई उपलब्धियां नहीं।
रोजाना 300 टन रह सकता है कार्बन उत्सर्जन
एल्सेवियर के जर्नल ट्रांसपोर्टेशन रिसर्च प्रोसीडिया के खंड 96 में प्रकाशित शोध में श्रीनगर की परिवहन व्यवस्था के तीन संभावित मॉडल का अध्ययन किया गया है। इनमें मौजूदा व्यवस्था जारी रहने की स्थिति, सीमित सुधार और व्यापक हरित परिवहन बदलाव शामिल हैं।
शोध के अनुसार, मौजूदा व्यवस्था जारी रहने पर शहर के परिवहन क्षेत्र से प्रतिदिन लगभग 410 टन कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जित होने का अनुमान है। सीमित सुधार किए जाने पर यह आंकड़ा 340 टन तक आ सकता है, जबकि व्यापक हरित परिवहन मॉडल में उत्सर्जन घटकर 300 टन प्रतिदिन रहने का अनुमान है। यानी मौजूदा मॉडल की तुलना में करीब 27 फीसदी की कमी संभव है।
पब्लिक ट्रांसपोर्ट मजबूत करने पर जोर
मज्जमिल यासीन पीर, आकिब अली, बसराह बिलाल और मेहविश बिलाल के इस शोध में शहर के परिवहन को पर्यावरण के अनुकूल बनाने के लिए कई उपाय सुझाए गए हैं। इनमें सार्वजनिक परिवहन को मजबूत करना, बसों और यात्रियों को ढोने वाले छोटे वाहनों का विद्युतीकरण, पैदल चलने वालों के लिए बेहतर रास्ते, साइकिल ट्रैक और तकनीक आधारित ट्रैफिक प्रबंधन शामिल हैं।
इन उपायों का उद्देश्य निजी वाहनों पर निर्भरता घटाना और लोगों को सार्वजनिक परिवहन की ओर आकर्षित करना है। शोध के मुताबिक, श्रीनगर में रोजाना होने वाली कुल यात्राओं में निजी वाहनों की हिस्सेदारी करीब 62 फीसदी है। यही निर्भरता सड़कों पर दबाव और प्रदूषण बढ़ाने वाले प्रमुख कारकों में शामिल है।
सालाना 12 लाख लीटर ईंधन की बचत
शोध में केवल कार्बन डाइऑक्साइड ही नहीं, बल्कि स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचाने वाले दूसरे प्रदूषकों में भी कमी का अनुमान लगाया गया है। हरित परिवहन मॉडल के तहत नाइट्रोजन ऑक्साइड का दैनिक उत्सर्जन 4.2 टन से घटकर 3.4 टन और बारीक कणों यानी पार्टिकुलेट मैटर का उत्सर्जन 0.45 टन से घटकर 0.32 टन रह सकता है। यह क्रमशः लगभग 19 और 29 फीसदी की कमी होगी।
शोधकर्ताओं का अनुमान है कि बारीक कणों के संपर्क में कमी से हर साल 15 से 20 समयपूर्व मौतों को रोकने की संभावना बन सकती है। यह अनुमान विश्व स्वास्थ्य संगठन से जुड़े प्रदूषण-संपर्क और स्वास्थ्य प्रभाव संबंधी गुणांकों के आधार पर तैयार मॉडल पर आधारित है। इसे वास्तविक रूप से रोकी गई मौतों का आंकड़ा नहीं माना जाना चाहिए।3
हरित परिवहन मॉडल लागू होने पर सालाना करीब 12 लाख लीटर ईंधन की बचत का अनुमान है। साथ ही, परिवहन क्षेत्र की ऊर्जा खपत की तीव्रता में 18 फीसदी की कमी और सड़क नेटवर्क पर वाहनों की औसत रफ्तार 18 से बढ़कर 22 किलोमीटर प्रति घंटा होने की संभावना जताई गई है।
अनुमान में 8 से 12 फीसदी तक की अनिश्चितता
शोध में श्रीनगर के प्रमुख व्यावसायिक मार्गों पर भीड़ को बड़ी समस्या बताया गया है। व्यस्त समय में कुछ सड़कों पर यातायात का दबाव उनकी क्षमता के 90 फीसदी तक पहुंच जाता है या उससे अधिक हो सकता है। जाम में फंसे वाहनों की धीमी और बार-बार रुकने वाली आवाजाही ईंधन की खपत तथा उत्सर्जन बढ़ाती है।
शोधकर्ताओं ने स्पष्ट किया है कि उत्सर्जन के अनुमानों में लगभग 8 से 12 फीसदी तक अनिश्चितता हो सकती है। यातायात की वास्तविक मात्रा, वाहनों की गति और मॉडल में इस्तेमाल किए गए अन्य आंकड़ों से परिणाम प्रभावित हो सकते हैं।
जम्मू-कश्मीर के मुख्य सचिव अटल डुल्लू ने श्रीनगर व जम्मू में बढ़ते ट्रैफिक जाम से निपटने के लिए बहु-विभागीय कार्ययोजना की करते हुए योजना में सार्वजनिक परिवहन, पार्किंग प्रबंधन, यातायात नियंत्रण और सड़क बुनियादी ढांचे में सुधार पर जोर दिया है।
इसके अलावा जम्मू-कश्मीर सरकार ने इलेक्ट्रिक व्हीकल पॉलिसी-2026 को मंजूरी देकर 2032 तक 1.40 लाख इलेक्ट्रिक वाहन सड़कों पर उतारने का लक्ष्य रखा है। नीति में चार्जिंग स्टेशन बढ़ाने और स्वच्छ परिवहन को प्रोत्साहन देने पर जोर है। श्रीनगर में परिवहन उत्सर्जन घटाने के शोध के बीच यह पहल अहम मानी जा रही है।
- बिसमा काजी, एसएसपी ट्रैफिक, श्रीनगर।
