श्रीनगर में 64 हजार से ज्यादा आवारा कुत्ते, रेबीज की रोकथाम के लिए क्या कर रही सरकार? जानें पूरा प्लान
श्रीनगर में 2023 के सर्वे के अनुसार 64,416 आवारा कुत्ते हैं, जिसे सरकार ने एक बड़ी सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती माना ...और पढ़ें

श्रीनगर में कुत्तों की बढ़ती संख्या के आगे इंतजाम पड़ रहे कम। (फाइल फोटो)
HighLights
श्रीनगर में 64,416 आवारा कुत्ते, सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती।
नसबंदी केंद्रों का विस्तार, टीकाकरण अभियान तेज करने की योजना।
ठोस कचरा प्रबंधन और अंतर-विभागीय समन्वय पर जोर।
राज्य ब्यूरो, श्रीनगर। शहर की सड़कों और गलियों में आवारा कुत्तों की मौजूदगी अब सिर्फ आम लोगों की परेशानी नहीं बल्कि सार्वजनिक स्वास्थ्य से जुड़ी बड़ी चुनौती बन चुकी है। वर्ष 2023 में कराए गए वैज्ञानिक सर्वे में श्रीनगर नगर निगम क्षेत्र में 64416 आवारा कुत्ते होने का अनुमान सामने आया। जबकि जम्मू नगर निगम (जीएमसी) वर्ष 2014 से अब तक 50 हजार से अधिक कुत्तों की नसबंदी कर चुका है।
सरकार ने विधानसभा में माना है कि इतनी बड़ी संख्या और शहरी क्षेत्रों में इनके व्यापक फैलाव को देखते हुए मौजूदा व्यवस्था और क्षमता को और मजबूत करने की जरूरत है।
यह जानकारी आवास एवं शहरी विकास विभाग ने जडीबल विधायक तनवीर सादिक के पूछे गए सवाल के जवाब में दी। विधायक ने आवारा कुत्तों की संख्या, कुत्तों के काटने की घटनाओं, नसबंदी और टीकाकरण के साथ समस्या से निपटने के लिए किए जा रहे उपायों की जानकारी मांगी थी।
श्रीनगर में 64,416 आवारा कुत्ते
सरकार के अनुसार, श्रीनगर नगर निगम ने 2023 में पशु कल्याण बोर्ड से मान्यता प्राप्त पशु कल्याण संस्था के माध्यम से आवारा कुत्तों की वैज्ञानिक गणना कराई। इसमें पकड़कर दोबारा पहचान करने की पद्धति और लिंकन-पीटरसन सूत्र का इस्तेमाल किया गया। इसी प्रक्रिया के आधार पर नगर निगम क्षेत्र में आवारा कुत्तों की संख्या करीब 64416 आंकी गई।
श्रीनगर में नए केंद्र की तैयारी, क्षमता बढ़ाने पर जोर
नियंत्रण अभियान जारी है। जून 2023 से सितंबर 2025 के बीच श्रीनगर नगर निगम ने 15266 आवारा कुत्तों की नसबंदी की जबकि 15725 कुत्तों को रेबीज से बचाव का टीका लगाया गया। यह अभियान तेंगपोरा और शुहामा स्थित पशु जन्म नियंत्रण केंद्रों के माध्यम से चलाया गया।
हालांकि, सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि अलग-अलग वार्डों में आवारा कुत्तों की संख्या, नसबंदी, टीकाकरण और कुत्तों के काटने की घटनाओं का एक समान और समेकित रिकॉर्ड फिलहाल उपलब्ध नहीं है।
श्रीनगर में अभी दो पशु जन्म नियंत्रण केंद्र
श्रीनगर में तेंगपोरा बाईपास और शुहामा स्थित दो निर्धारित पशु जन्म नियंत्रण केंद्रों में कुल 121 कुत्ते रखने की क्षमता है। इनमें फिलहाल तेंगपोरा केंद्र संचालित है। अहल चट्टरहामा में 60 केनल क्षमता वाला नया केंद्र निर्माणाधीन है।
इसके पूरा होने के बाद श्रीनगर में तीन केंद्रों की कुल क्षमता 181 केनल हो जाएगी। सरकार का कहना है कि मौजूदा क्षमता आवारा कुत्तों की संख्या और भौगोलिक फैलाव के मुकाबले अभी पर्याप्त नहीं है।
जम्मू में भी बड़े स्तर पर चल रहा अभियान
जम्मू नगर निगम रूपनगर स्थित केंद्र के साथ भगवती नगर और एसपीसीए चौआदी के माध्यम से नसबंदी और रेबीज रोधी टीकाकरण कार्यक्रम चला रहा है। निगम अपने क्षेत्र के साथ-साथ अन्य इलाकों में भी रेबीज रोधी टीकाकरण शिविर आयोजित कर रहा है।
वहीं कश्मीर के अन्य नगर निकायों में भी पशु जन्म नियंत्रण केंद्रों की संख्या बढ़ाने की प्रक्रिया जारी है। नगर परिषद सुम्बल में एक केंद्र निर्माणाधीन है, जिसके पूर्वनिर्मित भवन का करीब 70 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है।
पुलवामा जिला प्रशासन ने अवंतीपोरा में केंद्र स्थापित करने के लिए नगर परिषद को पांच कनाल जमीन भी हस्तांतरित की है। अन्य नगर निकायों में भी उपयुक्त जमीन की पहचान और विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार करने का काम चल रहा है।
कुत्तों की पहचान से लेकर कचरा प्रबंधन पर जोर
सरकार की प्रस्तावित योजना में नसबंदी केंद्रों का विस्तार, पशु चिकित्सकों और कुत्ते पकड़ने वाली टीमों को मजबूत करना तथा कुत्तों को रखने, अलग रखने और उपचार के बाद देखभाल की सुविधाएं बढ़ाना शामिल है।
इसके साथ ही नसबंदी और रेबीज रोधी टीकाकरण का दायरा बढ़ाने, नसबंदी व टीकाकरण किए गए कुत्तों की वैज्ञानिक पहचान और रिकॉर्ड रखने, निर्धारित स्थानों पर कुत्तों को खाना खिलाने की व्यवस्था तथा ठोस कचरा प्रबंधन को बेहतर बनाने पर भी जोर दिया जा रहा है।
पशुपालन एवं भेड़पालन विभाग के पशु चिकित्सकों को नगर निगमों और नगर निकायों में तैनात किया गया है। वहीं, 4 सितंबर 2026 से बीएसएफ फ्रंटियर मुख्यालय, हुमहामा स्थित पशु चिकित्सालय में भी पशु चिकित्सकों की निगरानी में नसबंदी की सर्जरी शुरू की गई है।
इलाज और रेबीज से बचाव की व्यवस्था
सरकार के अनुसार, पूरे जम्मू-कश्मीर में कुत्तों के काटने के मामलों की निगरानी स्वास्थ्य सेवा निदेशालय कश्मीर के एकीकृत रोग निगरानी कार्यक्रम के तहत की जा रही है। स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग को निर्देश है कि कुत्ते के काटने वाले लोगों को निर्धारित स्वास्थ्य संस्थानों में समय पर उपचार और रेबीज से बचाव की दवा उपलब्ध कराई जाए।
सरकार के अनुसार, आने वाले समय में प्राथमिकता नसबंदी और टीकाकरण का दायरा बढ़ाने, बुनियादी ढांचे और पशु चिकित्सा सेवाओं को मजबूत करने, कुत्तों की पहचान और रिकॉर्ड व्यवस्था बेहतर करने तथा विभिन्न विभागों के बीच समन्वय बढ़ाने पर होगी।
