6 साल बाद खरीदी जमीन को देखने कश्मीर पहुंचे रिटायर्ड अफसर, प्लॉट पर कोई और बना रहा था मकान; सात पर केस दर्ज
श्रीनगर के बलहामा में एक सेवानिवृत्त अधिकारी की जमीन पर अवैध निर्माण से बड़े जमीन फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ है।

कश्मीर में जमीन घोटाले का पर्दाफाश (फाइल फोटो)
HighLights
सेवानिवृत्त अधिकारी की जमीन पर अवैध निर्माण से खुलासा हुआ
तत्कालीन तहसीलदार नुसरत अजीज समेत सात लोग आरोपित बने
राजस्व रिकॉर्ड में हेरफेर और म्यूटेशन रद्द करने के आरोप
राज्य ब्यूरो, श्रीनगर। श्रीनगर के बाहरी क्षेत्र बलहामा में एक सेवानिवृत्त सरकारी अधिकारी की जमीन पर दूसरे व्यक्ति का मकान बनता देख की गई शिकायत ने कथित जमीन फर्जीवाड़े की कई परतें सामने ला दीं।
मामला राजस्व रिकॉर्ड में कथित हेरफेर, म्यूटेशन रद करने और एक ही जमीन को अलग-अलग लोगों को बेचने के आरोपों तक पहुंचा। जांच में तत्कालीन तहसीलदार नुसरत अजीज, ब्रोकर रियाज अहमद बट समेत कई राजस्व अधिकारियों को आरोपित बनाया गया है।
मामले की शुरुआत वर्ष 2017 में हुई, जब सेवानिवृत्त मत्स्य निदेशक मुफ्ती मंजूर वर्षों बाद बलहामा स्थित अपनी जमीन देखने पहुंचे। उन्होंने 2012 में तीन प्लॉट खरीदे थे। इनमें दो करीब 800-800 वर्ग गज और तीसरा करीब 425 वर्ग गज का था।
खरीदने के बावजूद कोई और बनवा रहा मकान
बिक्री विलेख पंजीकृत होने और स्टांप शुल्क जमा करने के बाद जमीन का म्यूटेशन उनके परिवार के सदस्यों के नाम दर्ज किया गया था। लेकिन जब मंजूर वहां पहुंचे तो जमीन पर बाड़ लगी थी और मकान का निर्माण चल रहा था। मंजूर के अनुसार, उन्होंने जमीन किसी को बेची ही नहीं थी। राजस्व अधिकारियों से जवाब नहीं मिलने के बाद शिकायत तत्कालीन श्रीनगर उपायुक्त तक पहुंची और जांच शुरू हुई।
जांच में सामने आया कि परिवार के नाम दर्ज म्यूटेशन करीब 58 दिन बाद रद कर दी गई। आरोप है कि तत्कालीन तहसीलदार नुसरत अजीज ने ब्रोकर रियाज अहमद बट और अन्य राजस्व अधिकारियों के साथ कथित मिलीभगत से यह कार्यवाही की।
जांच के अनुसार, म्यूटेशन रद होने के बाद बट ने जमीन से संबंधित नए राजस्व दस्तावेज हासिल किए और संपत्ति को दोबारा बेचने का रास्ता तैयार हुआ। आरोप है कि जमीन बाद में दो भाइयों के नाम कर दी गई। जांच में एक कनाल जमीन नुसरत अजीज के नाम स्थानांतरित होने की बात भी सामने आई। अजीज ने पूछताछ में दावा किया कि उन्होंने जमीन बट से खरीदी थी।
जांच का महत्वपूर्ण आधार राजस्व रिकॉर्ड की दो प्रतियां बनीं। एक प्रति पटवारी कार्यालय में और दूसरी मुहाफिजखाने में सुरक्षित रहती है। मंजूर के मामले में दोनों रिकॉर्ड की तुलना करने पर कथित अंतर सामने आया। पटवारी कार्यालय के रिकॉर्ड में बदलाव पाए जाने की बात कही गई, जबकि मुहाफिजखाने की प्रति में मंजूर के परिवार को मूल खरीदार दर्ज किया गया था।
अधिकारियों का बैंक रिकॉर्ड जांचा गया
दस्तावेजों की फोरेंसिक जांच में नुसरत अजीज के हस्ताक्षर होने की बात सामने आई। जांचकर्ताओं ने संबंधित अधिकारियों के बैंक रिकॉर्ड और फोन संपर्कों की भी पड़ताल की। जांच आगे बढ़ने पर मामले में कुल सात लोगों को आरोपित बनाया गया। इनमें तत्कालीन तहसीलदार नुसरत अजीज, पटवारी आशिक अली, जमीन ब्रोकर रियाज अहमद बट, मोहम्मद शफी लोन उर्फ शफी चीनी, शमीमा अख्तर, शाहनवाज अहमद राथर और शबीर अहमद वानी के नाम शामिल हैं।
उपलब्ध रिपोर्टिंग के अनुसार, मामले में चार आरोपितों की गिरफ्तारी हुई थी, जबकि अन्य के संबंध में कानूनी कार्रवाई जारी रही। मंजूर की शिकायत के बाद अन्य लोगों ने भी जमीन के सौदों में कथित धोखाधड़ी की शिकायतें कीं।
