श्रीनगर की हवा साफ नहीं! स्वच्छ वायु सर्वेक्षण में बुरा हाल, दिल्ली भी निकली आगे; 3 साल में 4वीं से 26वीं रैंक
श्रीनगर स्वच्छ वायु सर्वेक्षण 2026 में 10 लाख से अधिक आबादी वाले शहरों की श्रेणी में 26वें स्थान पर खिसक ...और पढ़ें

स्वच्छ वायु सर्वेक्षण 2026 में श्रीनगर 26वें स्थान पर। (फाइल फोटो)
HighLights
श्रीनगर स्वच्छ वायु सर्वेक्षण 2026 में 26वें स्थान पर खिसका।
तीन साल पहले श्रीनगर इसी सर्वेक्षण में चौथे स्थान पर था।
रैंकिंग गिरावट प्रदूषण नियंत्रण उपायों के कमजोर क्रियान्वयन को दर्शाती है।
राज्य ब्यूरो, श्रीनगर। जिस शहर की पहचान ही बर्फ से ढके पहाड़, डल झील और हिमालय की ताजा हवा है, उसी श्रीनगर के लिए एक असहज करने वाली खबर आई है। केंद्र सरकार के स्वच्छ वायु सर्वेक्षण 2026 में श्रीनगर 10 लाख से अधिक आबादी वाले शहरों की श्रेणी में फिसलकर 26वें स्थान पर पहुंच गया है।
ये गिरावट इसलिए चौंकाती है क्योंकि ठीक तीन साल पहले स्वच्छ वायु सर्वेक्षण 2023 में श्रीनगर ने इसी कैटेगरी में चौथी रैंक हासिल की थी और देश के सबसे बेहतरीन प्रदर्शन करने वाले शहरों में गिना गया था।
ताजा सर्वे में श्रीनगर को 162.6 अंक मिले हैं, जबकि जहरीले विंटर स्मॉग के लिए अक्सर सुर्खियों में रहने वाली राजधानी दिल्ली ने 172 अंकों के साथ 21वीं रैंक हासिल कर श्रीनगर को पीछे छोड़ दिया है। बेंगलुरु 32वें और मुंबई 28वें स्थान पर हैं। इस बार लखनऊ ने 198 अंकों के साथ टॉप किया है, उसके बाद इंदौर और जबलपुर जैसे शहर हैं।
सबसे नीचे चेन्नई, जमशेदपुर, कोटा, कोलकाता और मदुरै हैं। केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय के अनुसार इस पांचवें संस्करण में एनसीएपी के तहत 130 शहरों का आकलन किया गया, जिसमें 108 शहरों में पीएम10 के स्तर में सुधार देखा गया।
रैंकिंग हवा की क्वालिटी नहीं दिखाती
इस पर जम्मू-कश्मीर प्रदूषण नियंत्रण समिति (जेकेपीसीसी) के चेयरमैन वासु यादव ने स्थिति साफ करते हुए कहा कि यह रैंकिंग श्रीनगर की हवा की गुणवत्ता को नहीं दर्शाती। उन्होंने बताया कि स्वच्छ वायु सर्वेक्षण हवा की सीधी माप नहीं है। यह कोई साधारण जोड़-घटाव नहीं है। यह राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (एनसीएपी) के तहत शहरों द्वारा प्रदूषण रोकने के लिए उठाए गए कदमों और उनके क्रियान्वयन का आकलन है।
रैंकिंग में कई पैरामीटर देखे जाते हैं जिनमें सड़कों की धूल का प्रबंधन, ठोस कचरा प्रबंधन, वाहनों से उत्सर्जन, औद्योगिक प्रदूषण, निर्माण और विध्वंस कचरा और अन्य उत्सर्जन स्रोत। सबसे अहम कड़ी सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट से जुड़ी है। यादव ने कहा कि अगर कचरा वैज्ञानिक तरीके से नहीं संभाला गया, तो वह प्रदूषण का बड़ा कारण बनता है, क्योंकि अंत में उसे जलाया ही जाता है।
यह पूरी प्रक्रिया काफी हद तक नगर पालिकाओं के सेल्फ-असेसमेंट, राज्य स्तर की समीक्षा, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के मूल्यांकन और स्वतंत्र समितियों के फील्ड वेरिफिकेशन पर आधारित है। यानी नगर निकायों को बताना होता है कि उन्होंने साल भर में हवा साफ रखने के लिए क्या किया।
बढ़ते वाहन, जाम और धूल ने बिगाड़ी श्रीनगर की हवा
विशेषज्ञों के मुताबिक श्रीनगर के फिसलने के पीछे वही पुरानी वजह हैं, जो अब विकराल हो रही हैं। इनमें बेतहाशा बढ़ते वाहन, ट्रैफिक जाम, सड़कों की उड़ती धूल, अनियंत्रित निर्माण गतिविधियां और पतझड़ में पत्तियों और कचरे को जलाने की परंपरा।
तीन साल पहले जब सिर्फ हवा की गुणवत्ता को आधार बनाया जाता था, तब श्रीनगर टॉप पर था। लेकिन अब जब सरकार ‘हवा को साफ करने की कोशिश’ को नंबर दे रही है, तो श्रीनगर का सिस्टम कमजोर साबित हो रहा है।
