कश्मीर आने-जाने वालों के लिए बड़ी खबर! श्रीनगर एयरपोर्ट पर बनेगा नया टर्मिनल, ₹1,667 करोड़ से होगा विस्तार
श्रीनगर इंटरनेशनल एयरपोर्ट का विस्तार किया जाएगा, जिसमें ₹1,667 करोड़ खर्च होंगे। इससे इसकी वार्षिक यात्री क्षमता बढ़कर एक करोड़ ...और पढ़ें

श्रीनगर एयरपोर्ट पर ₹1,667 करोड़ से होगा विस्तार। (फाइल फोटो)
HighLights
श्रीनगर एयरपोर्ट का ₹1,667 करोड़ की लागत से होगा विस्तार।
वार्षिक यात्री क्षमता बढ़कर एक करोड़ हो जाएगी, लक्ष्य 2031।
नया टर्मिनल कश्मीर की कनेक्टिविटी और आर्थिक विकास बढ़ाएगा।
डिजिटल डेस्क, श्रीनगर। कश्मीर आने-जाने वाले लोगों के लिए बड़ी खबर है। श्रीनगर इंटरनेशनल एयरपोर्ट अब और बड़ा होने वाला है। एयरपोर्ट के विस्तार पर 1,667 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। इसके बाद यहां हर साल एक करोड़ यात्रियों को संभालने की क्षमता हो जाएगी। नए टर्मिनल का काम 2031 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
जम्मू-कश्मीर सरकार की ओर से गृह मंत्रालय को दी गई जानकारी के अनुसार, श्रीनगर इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर सिविल एन्क्लेव के 1,667 करोड़ रुपये के प्रस्तावित विस्तार से सालाना यात्रियों को संभालने की क्षमता बढ़कर एक करोड़ होने की उम्मीद है। इस प्रोजेक्ट को 2031 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
आर्थिक मामलों की कैबिनेट समिति (CCEA) ने 24 फरवरी, 2026 को इस प्रस्ताव को मंज़ूरी दी थी। इसके तहत 71,500 वर्ग मीटर के बिल्ट-अप एरिया वाली एक नई इंटीग्रेटेड टर्मिनल बिल्डिंग बनाने की योजना है।
पीक आवर्स में 2,900 यात्रियों को संभालने की तैयारी
जम्मू-कश्मीर प्रशासन की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक, प्रस्तावित टर्मिनल पीक आवर्स यानी सबसे ज़्यादा भीड़ वाले समय के दौरान 2,900 यात्रियों और सालाना एक करोड़ यात्रियों को संभालने में सक्षम होगा।
इस प्रोजेक्ट को पूरा करने में अनुमानित 48 महीने लगेंगे और अभी यह टेंडरिंग के चरण में है। इस विस्तार का मकसद श्रीनगर एयरपोर्ट पर यात्रियों की बढ़ती संख्या को संभालना है, खासकर पर्यटन के पीक सीज़न के दौरान। इससे अतिरिक्त क्षमता और यात्रियों के लिए आधुनिक सुविधाएं मिलने की उम्मीद है।
कश्मीर की कनेक्टिविटी होगी मजबूत
अधिकारियों का कहना है कि बड़े टर्मिनल से यात्रियों की आवाजाही बेहतर होगी, भीड़ कम होगी और कश्मीर के मुख्य एविएशन गेटवे के तौर पर श्रीनगर की भूमिका मज़बूत होगी।
इस प्रोजेक्ट से बेहतर हवाई कनेक्टिविटी पर निर्भर सेक्टरों - जैसे पर्यटन, हॉस्पिटैलिटी, ट्रांसपोर्ट, व्यापार और बागवानी - को भी मदद मिलने की उम्मीद है। साथ ही, इससे बड़े पैमाने पर क्षेत्रीय कनेक्टिविटी और आर्थिक विकास में भी योगदान मिलेगा।
