श्रीनगर की गलियां साफ, फिर भी रैंकिंग क्यों गिरी? अच्छन डंपिंग यार्ड बड़ी वजह, अब टॉप-3 में आने का प्लान
श्रीनगर को स्वच्छ शहरों में शामिल करने की प्रक्रिया में अच्छन डंपिंग यार्ड बड़ी चुनौती बना हुआ है, जिससे शहर ...और पढ़ें

श्रीनगर को स्वस्छ शहरों में शामिल होने में अच्छन डंपिंग साइट बड़ी चुनौती। (फाइल फोटो)
जागरण संवाददाता, श्रीनगर। श्रीनगर शहर को भले ही देश के स्वच्छ शहरों में गिनने की प्रक्रिया शुरू की गई है, लेकिन 17 लाख आबादी वाले इस शहर के कचरे को कथाकथि ठिकाने लगाने वाला एक मात्र डंपिंग यार्ड अछन लगातार इसके लिए एक बड़ी चुनौती बना हुआ है। हालांकि प्रशासन ने भी माना कि अच्छन डंपिंग यार्ड (Achan Dumping Yard) श्रीनगर के स्वच्छता अभियान के प्रदर्शन पर बुरा असर डाल रही है। इसे शहर के स्वच्छता रैंकिंग में टाप पर आने की कोशिश में एक बड़ी रुकावट माना गया है।
हाउसिंग एंड अर्बन डेवलपमेंट डिपार्टमेंट की कमिश्नर सेक्रेटरी मनदीप कौर ने कहा कि स्वच्छता का लक्ष्य तब तक हासिल नहीं किया जा सकता जब तक लोग अपने घरों और समाज को साफ रखना शुरू न करें। उन्होंने कहा, 'प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दस साल से स्वच्छता की बात कर रहे हैं, लेकिन हममें से कितने लोगों ने इस दिशा में कदम उठाए हैं? जब तक हम इसे घर से शुरू नहीं करते, तब तक ज़मीनी स्तर पर कुछ नहीं बदल सकता।'
उन्होंने लोगों से इस दिशा में सही फैसले लेने और कदम उठाने की अपील की। उन्होंने बताया कि स्वच्छता इंटर्नशिप प्रोग्राम'' सबसे पहले जम्मू में पायलट आधार पर शुरू किया गया था, जिसका मकसद छात्रों में इस बारे में जागरूकता पैदा करना था।
सिर्फ सफाईकर्मियों से नहीं बदलेगा श्रीनगर
एसएमसी श्रीनगर के बारे में बात करते हुए कौर ने कहा कि सिर्फ़ 3,000-4,000 सफाई कर्मचारी और वारियर्स 17 लाख से ज़्यादा आबादी वाले पूरे श्रीनगर को स्वच्छता के प्रति जागरूक नहीं कर सकते, क्योंकि यह उनके लिए एक मुश्किल काम होगा। उन्होंने कहा, 'इसलिए, स्कूलों से शुरू किए इस प्रोग्राम का मकसद छात्रों में जागरूकता पैदा करना था ताकि वे समाज को साफ-सुथरा बनाने में मदद कर सकें।
श्रीनगर की रैंकिंग गिरने की वजह बताई
कमिश्नर सेक्रेटरी ने आगे कहा कि पर्यटकों को यह नहीं कहना चाहिए कि जम्मू-कश्मीर बहुत खूबसूरत है लेकिन गंदा है। उन्होंने ज़ोर दिया कि इलाके की प्राकृतिक सुंदरता के साथ-साथ स्वच्छता भी बहुत ज़रूरी है। स्वच्छता अभियान में रैंकिंग के बारे में पूछे जाने पर, कौर ने कम रैंकिंग की मुख्य वजह अछन को बताया।
उन्होंने कहा कि श्रीनगर में यही जगह समस्या की जड़ थी, जहां अब काम शुरू हो गया है। उन्होंने कहा, इस प्रोजेक्ट की योजना पहले ही बन गई थी, लेकिन कचरा प्रोसेसिंग का काम शुरू नहीं किया गया, जिसकी वजह से श्रीनगर की रैंकिंग गिर गई।
हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि दूसरे शहरों की तुलना में श्रीनगर साफ़-सुथरा है, क्योंकि यहाँ की सड़कें और गलियां साफ़ रहती हैं। कौर ने कहा, लेकिन कचरा प्रोसेसिंग का काम नहीं हुआ, और इसलिए यह एक ऐसी समस्या बन गई जिसे संभालना मुश्किल था और जिसका कोई समाधान नहीं था। अब समाधान मिल गया है और अचन को साफ़ करने के लिए कचरा प्रोसेसिंग शुरू हो गई है। इसलिए, मुझे उम्मीद है कि अगले दो सालों में श्रीनगर टाप तीन शहरों में शामिल होगा।
34 स्कूलों में पायलट प्रोजेक्ट शुरू
इस बीच, एसएमसी कमिश्नर फ़ज़लुल हसीब ने इंटर्नशिप प्रोग्राम के बारे में बताया कि इस प्रोग्राम के तहत सरकार छात्रों को कचरे को अलग-अलग करने (लोकल और बिन सेग्रीगेशन), घर-घर जाकर कचरा इकट्ठा करने और दूसरी चीज़ों के बारे में ट्रेनिंग देना चाहती है, क्योंकि छात्रों की ट्रेनिंग का समाज पर बड़ा असर पड़ेगा।
हसीब ने कहा, 'हमने 34 स्कूलों में पायलट आधार पर यह प्रोग्राम शुरू किया है, और अगर यह सफल रहता है, तो हम ट्रेनिंग में शामिल स्कूलों की संख्या बढ़ा देंगे। उन्होंने बताया कि एसएमसी के अलावा, इस अभियान में स्कूल शिक्षा निदेशालय और स्वच्छ भारत मिशन के मिशन डायरेक्टर भी पार्टनर के तौर पर शामिल हैं।
अच्छन बना कचरे का पहाड़
शहर के सैदापोरा इलाके में सिथत अच्छन डंपिंग साइट में शहर से प्रतिदिन जमा होने वाले 500 से मीटरिक टन कचरे को जमा किया जाता है। कचरे को सही ढंग से कोई व्यापक व्यवस्था न होने के चलते वहां कचरे के अंबार जमा हो गए हैं जिनसे उठने वाली दुर्गध पूरे श्रीनगर शहर में फैल जाती है।
