राज्य ब्यूरो, श्रीनगर। राज्य एहतिसाब आयोग, जम्मू-कश्मीर मानवाधिकार आयोग और जम्मू-कश्मीर सूचना आयोग समेत छह आयोग 31 अक्टूबर को इतिहास बन जाएंगे। जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम 2019 के तहत 31 अक्टूबर को ही जम्मू-कश्मीर दो केंद्र शासित राज्यों जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में पुनर्गठित होगा।

पांच अगस्त, 2019 को केंद्र सरकार द्वारा जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम 2019 को पास किए जाने के बाद जम्मू-कश्मीर का अलग संविधान और निशान भी समाप्त हो गया है। जम्मू-कश्मीर राज्य संविधान के तहत गठित छह आयोग भी समाप्त हो जाएंगे। यह उन कानूनों के तहत बने हैं, जो अब समाप्त हो रहे हैं। जम्मू- कश्मीर स्टेट कंज्यूमन डिस्पयूट रिड्रेसल कमीशन भी समाप्त हो जाएगा। यह आयोग जम्मू-कश्मीर उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 1987 के तहत बना था। जम्मू-कश्मीर महिला एवं बाल अधिकार संरक्षण अधिनियम और इसी साल जम्मू-कश्मीर लॉ कमीशन भी समाप्त हो जाएगा। सिर्फ तीन आयोग ही बने रहेंगे और उनके अध्यक्षों व सदस्यों को भी नए सिरे से पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई जाएगी।

संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों ने बताया कि जम्मू-कश्मीर अकाउंटबिलिटी कमीशन जिसे एहतिसाब आयोग कहते हैं, 31 अक्तूबर को समाप्त हो जाएगा। वर्ष 2002 में सत्ता में आई पीडीपी-कांग्रेस गठबंधन सरकार ने राजनीतिक और वरिष्ठ प्रशासनिक स्तर पर भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने और संबंधित संस्थाओं को जिम्मेदार बनाने के लिए इसे गठित किया था। एहतिसाब आयोग मुख्यमंत्री, राज्य मंत्रिमंडल के विभिन्न सदस्यों, विधायकों और एमएलसी के खिलाफ शिकायतों की जांच करते हुए उनके खिलाफ कार्रवाई कर सकता था। अलबत्ता, शुरू के तीन चार साल तक आयोग काफी सक्रिय नजर आया और बाद में यह लगभग निष्क्रिय हो गया। फिलहाल, जम्मू-कश्मीर उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त जज बशीर अहमद खान को इसके अध्यक्ष हैं।

उन्हें वर्ष 2015 में तत्कालीन मुख्यमंत्री स्व. मुफ्ती मोहम्मद सईद ने नियमों में बदलाव करते हुए इस पद पर तैनात किया था। अधिकारियों ने बताया कि एहतिसाब आयोग के समाप्त होने के बाद केंद्र शासित जम्मू-कश्मीर में केंद्रीय कानून के तहत अन्य केंद्र शासित राज्यों की तरह लोकायुक्त की नियुक्ति की जाएगी।

एहतिसाब आयेाग की तरह जम्मू कश्मीर राज्य सूचना आयोग भी अब पूरी तरह अस्तित्वहीन हो जाएगा। यह आयोग भी जून 2018 से लगभग निष्क्रिय पड़ा हुआ है। फिलहाल, यह एक ही आयुक्त पूर्व नौकरशाह मोहम्मद अशरफ मीर के सहारे चल रहा है। आयोग में तत्कालीन मुख्य सूचनायुक्त खुर्शीद अहमद गनई को पिछले साल जून में राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने अपना सलाहकार नियुक्त किया था। एडीजीपी मुनीर अहमद खान को उनके स्थान पर नया मुख्य सूचना आयुक्त बनाने का फैसला हुआ था, उन्हें यह कार्यभार इसी साल गत जून में संभालना था, लेकिन उन्हें एक साल के लिए सेवा विस्तार दे दिया गया।

वर्ष 1997 में तत्कालीन मुख्यमंत्री डॉ. फारूक अब्दुल्ला के नेतृत्व वाली नेशनल कांफ्रेंस सरकार द्वारा गठित जम्मू-कश्मीर राज्य मानवाधिकार संरक्षण आयोग भी अब समाप्त हो जाएगा। यह आयोग जम्मू-कश्मीर में विभिन्न मानवाधिकारवादी संगठनों द्वारा राज्य पुलिस व सुरक्षाबलों पर आतंकवाद को कुचलने की आड़ में आम लोगों को प्रताडि़त किए जाने की शिकायतों का संज्ञान लेते हुए ही बनाया गया था।

बने रहेंगे ये तीन आयोग 

राज्य के पुनर्गठन से छह आयोग जहां खत्म हो जाएंगे, वहीं तीन अन्य आयोग जिनमें जम्मू कश्मीर लोक सेवा आयोग भी शामिल है, बना रहेगा। यह आयोग सिर्फ केंद्र शासित जम्मू-कश्मीर में ही प्रभावी रहेगा। लद्दाख इसके दायरे से बाहर रहेगा। जम्मू-कश्मीर राज्य सतर्कता आयोग और जम्मू कश्मीर राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग भी बना रहेगा।

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Posted By: Sachin Mishra

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