विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

किश्तवाड़ से अनंतनाग का सफर होगा आसान! सर्दियों में भी नहीं रुकेगा रास्ता, 10 KM लंबी ट्विन ट्यूब टनल बनेगी

Published: Fri, 11 Sep 2026 01:05 PM (GMT+05:30)

जम्मू-कश्मीर में चिनाब घाटी को दक्षिण कश्मीर से जोड़ने वाली बहुप्रतीक्षित सिंहपोरा-वैलू टनल के निर्माण के लिए टेंडर जारी कर ...और पढ़ें

₹3567 करोड़ की सिंहपोरा-वैलू टनल का टेंडर जारी। (फाइल फोटो)

₹3567 करोड़ की सिंहपोरा-वैलू टनल का टेंडर जारी। (फाइल फोटो)

HighLights

  1. सिंहपोरा-वैलू टनल निर्माण हेतु टेंडर जारी, 5 साल में पूरा।

  2. यह सुरंग चिनाब घाटी को दक्षिण कश्मीर से जोड़ेगी, यात्रा सुगम।

  3. सर्दियों में भी कश्मीर-चिनाब वैली को मिलेगी ऑल-वेदर कनेक्टिविटी।

राज्य ब्यूरो, श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर के लोगों के लिए लंबे इंतजार के बाद आखिरकार बड़ी खुशखबरी आई है। चिनाब घाटी को दक्षिण कश्मीर से जोड़ने वाली बहुप्रतीक्षित सिंहपोरा-वैलू टनल का काम अब जमीन पर उतरने जा रहा है। नेशनल हाईवे एंड इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन लिमिटेड (एनएचआइडीसीएल) ने इस मेगा प्रोजेक्ट के निर्माण के लिए टेंडर आमंत्रित किए हैं।

यह प्रोजेक्ट नेशनल हाईवे-244 के किश्तवाड़-वैलू-खानाबल सेक्शन पर बनेगा और इसकी अनुमानित लागत 3567.51 करोड़ रुपये है। इसका सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि सर्दियों में भारी बर्फबारी के कारण महीनों बंद रहने वाले खतरनाक सिन्थन टॉप मार्ग का एक भरोसेमंद और ऑल-वेदर विकल्प मिल जाएगा।

एनएचआइडीसीएल के अनुसार, यह 38.611 किलोमीटर लंबा हाईवे पैकेज इपीसी मोड में बनाया जाएगा। इसके तहत सबसे अहम है सिन्थन पास के नीचे बनने वाली ट्विन-ट्यूब टनल।

बाएं ट्यूब की लंबाई 10.331 किमी और दाएं ट्यूब की लंबाई 10.363 किमी होगी। यह सुरंग किश्तवाड़ जिले के छात्रू को अनंतनाग जिले के वैलू से जोड़ेगी। पूर्वी एप्रोच रोड छात्रू से टनल पोर्टल तक 17.088 किमी की होगी, जबकि पश्चिमी एप्रोच वैलू की तरफ 11.160 किमी लंबी होगी।

टनल का पूर्वी पोर्टल सिंहपोरा के पास करीब 2243 मीटर की ऊंचाई पर और पश्चिमी पोर्टल गडोले में करीब 2404 मीटर की ऊंचाई पर प्रस्तावित है। निर्माण की अवधि 60 महीने यानी 5 साल तय की गई है, जिसके बाद 120 महीने तक मेंटेनेंस कंपनी ही करेगी।

इंजीनियरिंग का एक नमूना होगी यह टनल

यह सिर्फ एक सुरंग नहीं बल्कि इंजीनियरिंग का एक नमूना होगी। टनल के अंदर 9 मीटर चौड़ा कैरिजवे, फुटपाथ और इमरजेंसी सुविधाएं होंगी। दोनों ट्यूबों को हर 500 मीटर पर क्रॉस-पैसेज से जोड़ा जाएगा ताकि इमरजेंसी में लोगों को निकाला जा सके। कुल 20 क्रॉस-पैसेज बनेंगे, जो 6.1 मीटर चौड़े और 18.5 मीटर लंबे होंगे।

टनल को सेमी-ट्रांसवर्स वेंटिलेशन, फायर डिटेक्शन और फायर फाइटिंग सिस्टम, सीसीटीवी, इमरजेंसी कम्युनिकेशन, ट्रैफिक कंट्रोल सिस्टम और आधुनिक लाइटिंग से लैस किया जाएगा। हर 250 मीटर पर फायर हाइड्रेंट और कम दूरी पर होज कनेक्शन व अग्निशामक यंत्र लगाए जाएंगे।

इसके साथ ही एप्रोच रोड पर 21 बड़े-छोटे पुल, वायाडक्ट और कल्वर्ट बनेंगे, जिनमें सबसे लंबा 1,345 मीटर का वायाडक्ट होगा। दोनों तरफ की सड़कें पेव्ड शोल्डर के साथ टू-लेन बनाई जाएंगी और 26 किमी तक रोडसाइड ड्रेन व 28 किमी तक कैच ड्रेन का निर्माण होगा। पूरा प्रोजेक्ट आइआरसी, सीआइई और एनएफपीए जैसे भारतीय और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा मानकों के अनुरूप होगा।

2017 में मिली थी प्रोजेक्ट को मंजूरी 

इस प्रोजेक्ट को 2017 में मंजूरी मिली थी और 2021 में इसे फिर से दोहराया गया था, लेकिन तकनीकी कारणों से यह बार-बार अटकता रहा। विशेषज्ञों का मानना है कि इस टनल के बनने से न सिर्फ कश्मीर और चिनाब घाटी के बीच यात्रा का समय आधा हो जाएगा, बल्कि पर्यटन, व्यापार और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी नई रफ्तार मिलेगी। साथ ही यह सामरिक दृष्टि से भी बेहद महत्वपूर्ण साबित होगी।