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विजय थलापति के फैंस के लिए कश्मीर का ये कैफे है खास, 'लियो' का जैकेट सीन करते हैं रीक्रिएट; बिना प्रमोशन छाया

Published: Sat, 03 Oct 2026 05:54 PM (IST)

अनंतनाग के मट्टन स्थित सिफर कैफे को तमिल सुपरस्टार विजय थलापति की फिल्म 'लियो' में दिखाए जाने के बाद जबरदस्त ...और पढ़ें

तमिल सुपरस्टार विजय थलापति ने बदली अनंतनाग के कैफे की किस्मत।  (फाइल फोटो)

तमिल सुपरस्टार विजय थलापति ने बदली अनंतनाग के कैफे की किस्मत। (फाइल फोटो)

HighLights

  1. सिफर कैफे को विजय थलापति की 'लियो' फिल्म से मिली प्रसिद्धि।

  2. फिल्म के दृश्यों को दोहराने दक्षिण भारतीय पर्यटक यहां आते हैं।

  3. फिल्म और विजय के सीएम बनने से कैफे का व्यवसाय बढ़ा।

रजिया नूर, श्रीनगर। दक्षिणी कश्मीर के मट्टन इलाके में स्थित 'सिफर यानी जीरो' नाम का एक कैफे है, जहां तमिल सुपरस्टार के एक कदम ने इस कैफे को जीरो से 100 तक पहुंचाने में बड़ी भूमिका निभाई।

दरअसल, तमिल सुपरस्टार विजय की लोकप्रियता का फ़ायदा उठाते हुए, अनंतनाग जिले के मट्टन इलाके में सड़क किनारे सिथत एक साधारण सा कैफ़े अब दक्षिण भारत से रोज़ाना घाटी आने वाले सैकड़ों पर्यटकों को अपनी ओर खींच रहा है। यह कैफ़े 2023 की एक्शन-थ्रिलर फ़िल्म 'लियो' में दिखाए जाने के बाद काफ़ी मशहूर हो गया है।

'लियो' की शूटिंग के बाद फैंस का नया ठिकाना बना कैफे

विजय थलापति जिन्होंने बाक्स आफ़िस पर अपनी ज़बरदस्त सफलता को चुनावी जीत में बदला और तमिलनाडु के मुख्यमंत्री बने, ने इस कैफ़े में 'लियो' के कुछ अहम सीन शूट किए थे, जिससे यह जगह पर्यटकों के लिए एक चहल-पहल वाला केंद्र बन गई। फ़िल्म में, विजय एक कैफ़े मालिक की भूमिका में हैं जो दोहरी ज़िंदगी जी रहा है।

फ़ैंस उनके यादगार सीन्स को फिर से जीने के लिए कैफ़े में उमड़ पड़ते हैं, जैसे सुपरस्टार की एंट्री वाले सीन को दोहराना या ठीक उसी जगह पोज़ देना जहाँ उनका किरदार स्टाइल से अपनी जैकेट उतारता है।

दक्षिण भारत के पर्यटकों का नया पड़ाव बना कैफे

मट्टन के पास खानबल-पहलगाम रोड पर स्थित, पहलगाम से लगभग 40 किमी और श्रीनगर से 60 किमी दूर, सिफ़र नाम का यह कैफ़े दक्षिण भारत से आने वाले पर्यटकों के लिए कश्मीर यात्रा का एक ज़रूरी पड़ाव बन गया है।

कैफ़े के मैनेजर सबज़ार अहमद लोन ने बताया, 'फ़िल्म रिलीज़ होने के बाद से, तमिलनाडु और दूसरे दक्षिणी राज्यों से कश्मीर आने वाले पर्यटक सबसे पहले 'सिफ़र' के बारे में पूछते हैं। वे वही हाट चाकलेट और ट्राउट मछली आर्डर करते हैं जो विजय ने फ़िल्म में खाई थी, उनके सीन्स को दोहराते हैं और हमारे बैनर और मेनू के साथ फ़ोटो खिंचवाते हैं।

'लियो' की शूटिंग ने बदल दी 'सिफर' की किस्मत

उर्दू शब्द 'सिफ़र' यानी ज़ीरो के नाम पर रखे गए इस कैफ़े की किस्मत 2023 में लोकेश कनगराज की फ़िल्म की एक महीने तक चली शूटिंग के बाद बदल गई। इस फ़िल्म में विजय के साथ उनकी करीबी दोस्त तृषा कृष्णन और बालीवुड के दिग्गज संजय दत्त भी थे।

लोन ने माना कि शुरू में उन्हें और कैफ़े के स्टाफ़ को एक्टर की लोकप्रियता के बारे में ठीक से अंदाज़ा नहीं था। उन्होंने कहा, 'वह बहुत विनम्र थे और जब भी हमारे पास से गुज़रते थे, तो हमसे अभिवादन करते थे। फ़िल्म रिलीज़ होने के बाद ही हमें उनकी फ़ैन फ़ालोइंग के स्तर का पता चला।

उनका यहां आना हमारे लिए बहुत बड़ा वरदान साबित हुआ है।लोन ने कहा,उस फिल्म की शूटिंग से पहले हमारे कैफे में उतने पर्यटक नही आते थे। लेकिन शूटिंग के बाद यहां पर्यटकों विशेषकर साउस इंडिया से आन वाले टूरिस्टों की संख्या बढ़ गई और विजय के तमिलनाडु के सीएम के तौर पर चुने जाने के बाद से तो हमारा बिजनेस बहुत बढ़ गया है।

उधर, पर्यटकों का भी कहना है कि अभिनेता विजय थलापति द्वारा इस कैफे में की गई शूटिंग ने इस आम से कैफे को यूनीक बना दिया और यह कैफे सब के लिए एक आकर्षण का केंद्र बन गया।

विजय के फैंस के लिए खास पड़ाव बना कैफे

चेन्नई से आए पर्यटक सौम्य दिक्षित के लिए, इस कैफ़े में जाना उनकी कश्मीर यात्रा का सबसे यादगार हिस्सा था। दिक्षित ने कहा, 'मैं बचपन से ही विजय सर का फ़ैन रहा हूँ। जिन जगहों पर उन्होंने शूटिंग की थी, वहां खड़े होना और वहीं लंच करना बहुत रोमांचक था। यह कैफ़े कश्मीर और दक्षिण भारत के बीच एक पुल बन गया है। अब इसे मार्केटिंग की भी ज़रूरत नहीं है, क्योंकि दक्षिण में हर कोई इसके बारे में जानता है और इसे ढूंढ़ते हुए यहाँ आता है।

इस जगह का फ़िल्मों में दिखना ही इसके प्रमोशन का सबसे मज़बूत ज़रिया साबित हुआ है। यह लोकल ड्राइवरों और टूर आपरेटरों के बनाए ट्रैवल प्लान में भी आसानी से फिट हो जाता है।

फिल्मी पहचान के साथ बढ़ा हॉट चॉकलेट का क्रेज

बेंगलुरु की रहने वाली नेहा ने बताया कि इस जगह को पहचानने के बाद ही उन्होंने यहां रुकने का प्लान बनाया। नेहा ने कहा, 'हमने असल में यह कैफ़े सबसे पहले 'लियो' फ़िल्म में देखा था। और चूंकि हम पहलगाम जा रहे थे, इसलिए हम देखना चाहते थे कि यह कैफ़े कैसा है।' फ़िल्म में विजय के कैफ़े में घुसने, जैकेट उतारने वगैरह का एक शाट था। इसीलिए हम यहाँ आए।

नेहा ने कहा, 'मैंने फ़िल्म देखी थी और वह बहुत अच्छी थी। विजय की एक्टिंग, सीन और फ़िल्म की कहानी सब कुछ। जैसे ही हम अंदर आए, हमने सोचा कि क्यों न उस पूरे सीन को फिर से किया जाए। यहां आकर बहुत अच्छा लगा और हमें यहां की हाट चाकलेट ज़रूर आज़मानी थी, जो अब काफ़ी मशहूर हो गई है।

कैफ़े के एंट्री गेट पर लगे बड़े-बड़े बैनर और अंदर थीम वाले मेन्यू के साथ, यह कैफ़े अपनी फ़िल्मी पहचान का फ़ायदा उठा रहा है।