राज्य ब्यूरो, श्रीनगर। कश्मीर में सक्रिय धर्माध जिहादी और राष्ट्रविरोधी तत्वों ने अल्पसंख्यकों को डराकर उन्हें भगाने की साजिश रची है। इसके तहत शुक्रवार की रात को श्रीनगर के छत्ताबल में स्थित शिया समुदाय के एक प्रमुख धर्मस्थल में आग लगाने का प्रयास किया। हालांकि, वह अपने मकसद में नाकाम रहे। पिछले एक माह में कश्मीर में शिया समुदाय के किसी धर्मस्थल पर यह तीसरा और अल्पसंख्यकों के किसी धर्मस्थल पर चौथा हमला है। 

इमाम हजरत-ए-मूसा काजिम के हाथ से लिखी पाक कुरान रखी है धर्मस्थल में

छत्ताबल में स्थित इस धर्मस्थल की अहमियत का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि यहां सातवें इमाम हजरत-ए-मूसा काजिम के हाथ से लिखी गई पाक कुरान की एक दुर्लभ पांडुलिपि है। अगर शरारती तत्व रात को अपने मकसद में कामयाब रहते तो शनिवार को पूरी वादी में पैदा होने वाले हालात को समझा जा सकता है। स्थानीय सूत्रों ने बताया कि बीती रात एक नकाबपोश ने पहले सड़क पर खड़े होकर जियारत पर पेट्रोल बम फेंका जो परिसर में खड़ी एक मोटरसाइकिल पर गिरा। इससे वहां आग लग गई। इसके बाद वह गेट पर चढ़कर परिसर में घुसा और दूसरा पेट्रोल बम फेंकने लगा। इससे पहले कि वह ऐसा कर पाता तब तक पास में स्थित एक मकान में रहने वाले व्यक्ति ने उसे देख लिया और शोर मचा दिया। इस पर वह व्यक्ति भाग निकला। 

धर्मस्थल की सुरक्षा को बढ़ाने का निर्देश

बताया जाता है कि पूरी घटना सीसीटीवी कैमरे में भी कैद है। पुलिस ने इस संबंध में केस दर्ज कर लिया है। जिला उपायुक्त श्रीनगर डॉ. शाहिद इकबाल चौधरी ने एसपी श्रीनगर व अन्य अधिकारियों संग छत्ताबल स्थित शिया समुदाय के धर्मस्थल का दौरा कर वहां के हालात का जायजा लिया। उन्होंने हमलावर को जल्द गिरफ्तार करने और साजिश के खुलासे का भरोसा दिया है। उन्होंने धर्मस्थल की सुरक्षा को बढ़ाने का निर्देश भी दिया है। इस बीच, इत्तेहादुल मुसलमीन संगठन के वरिष्ठ नेता और शिया समुदाय के प्रमुख मजहबी नेताओं में शुमार मसरूर अंसारी ने कहा कि खुदा का शुक्र है कि हमारी यह जियारत आग में तबाह होने से बच गई। 

एक माह में तीन हमले

एक माह में श्रीनगर में किसी शिया धर्मस्थल पर यह तीसरा हमला है। 20 मई को लाल बाजार बाग-ए-अली मर्दान में मौलाअली मस्जिद पर रात के अंधेरे में पेट्रोल बम से हमला हुआ था। इसमें मस्जिद की खिड़की का एक हिस्सा और अंदर बिछा कालीन क्षतिग्रस्त हो गया। हब्बाकदल में अल-जहरा इस्लामिक ट्रस्ट के कार्यालय पर भी समान परिस्थितियों में ही हमला हुआ। बीते माह ही रैनावारी इलाके में एक मंदिर पर रात को ही पेट्रोल बम से हमला किया गया। 

हिंसक प्रदर्शनों का दौर शुरू करने की साजिश

कश्मीर मामलों के विशेषज्ञ मानते हैं कि पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आइएसआइ व आतंकी संगठनों के सरगना वादी में हालात बिगाड़ने के लिए सिलसिलेवार बंद और हिंसक प्रदर्शनों का दौर फिर से शुरू करना चाहते हैं। उन्हें लगता है कि कोविड-19 से पैदा हालात में अगर वादी में कानून व्यवस्था की स्थिति बिगड़ती है तो उन्हें कश्मीर में अपने नापाक मंसूबे पूरे करने में मदद मिलेगी। 

 

Posted By: Arun Kumar Singh

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