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कश्मीर में शोपियां का 'जामिया सिराज-उल-उलूम' UAPA के तहत गैर-कानूनी घोषित, टेरर फंडिंग का आरोप

Published: Mon, 27 Apr 2026 11:25 AM (IST)

दक्षिण कश्मीर के इमाम साहिब शोपियां स्थित दारुल उलूम जामिया सिराज-उल-उलूम को यूएपीए के तहत गैर-कानूनी घोषित किया गया है।

कश्मीर में शोपियां का 'जामिया सिराज-उल-उलूम' UAPA के तहत गैर-कानूनी घोषित (AI Generated फोटो)

कश्मीर में शोपियां का 'जामिया सिराज-उल-उलूम' UAPA के तहत गैर-कानूनी घोषित (AI Generated फोटो)

राज्य ब्यूरो, श्रीनगर। दक्षिण कश्मीर के इमाम साहिब शोपियां स्थित दारुल उलूम जामिया सिराज-उल-उलूम को जम्मू कश्मीर प्रदेश प्रशासन ने गैर कानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियत (यूएपीए), 1967 के तहत एक गैर-कानूनी संस्था घोषित कर दिया है।

यह दक्षिण कश्मीर का सबसे बड़ा मदरसा है और इसे प्रतिबंधित जमाते इस्लामी द्वारा स्थापित किया गया है। इस मदरसे का कथित तौर पर टेरर फंडिंग और राष्ट्रविरोधी गतिविधियों के लिए इस्तेमाल हुआ है।

उल्लेखनीय हैकि दारुल उलूम जामिया सिराज-उल-उलूम लगभग 25 वर्ष पहले ही जमाते इस्लामी द्वारास्थापित किया गया है। यह मदरसा 15 एकड़ जमी पर फैला हुआहैऔर इसके साथ पांच एकंड़ का एक बाग भी है। मदरसे में लगभग 500 छात्र हैं।

टेरर फंडिंग के लगे आरोप

टेरर फंडिंग और आतंकीभर्ती व आतंकी गतिविधियों में इसके इस्तेमाल से संबधित मामलों में राष्ट्रीय जांच एजेंसीऔर जम्मूकश्मीर पुलिस की विभिन्न् एजेंसियां भी समय समय पर जांच कर चुकी हें। संस्थान से संबधित कुछ अध्यापकों को गिरफ्तार भी किया जा चुकाहै।

वर्ष 2014 और उसके बाद कश्मीर में सक्रिय रहे विभिन्न आंतंकियों में से लगभग एक दर्जन आतंकियों का संबंध कथित तौर पर इसी मदरसे से रहा है। पुलवामा कांड में शामिल एक आतंकी सज्जाद बट भी वर्ष 2017 के अंत तक इसी संस्थान में पढ़ रहा था।

कश्मीर के मंडलयुक्त अंशुल गर्ग ने यूएपीए अधिनियम की धारा 8(1) के तहत मिली शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए दारुल उलूम जामिया सिराज-उल-उलूम को प्रतिबंधित संस्थान घोषित किया है। उन्होंने यह कार्रवाई जिला एसएसपी शोपियां द्वारा जारी डोजियर व संबधित संस्थान की राष्ट्रविरोधी गतिविधियों के संदर्भ में उपलब्ध कराए गए साक्ष्यों के आधार पर की है।

मदरसे के वित्तीय मांमलों में कई गंभीर खामियां

जिला एसएसपी द्वाराजारी डोजियर में कहा गया है कि यह मदरसा जो दिखने में एक धार्मिक शिक्षा केंद्र के रूप में नजर आता है, के प्रशासनिक व्यवस्था और वित्तीय मांमलों में कई गंभीर खामियां हैं और यह कानूनी रूप से भी कई गंभीर मुद्दे पर में लिप्त है। इसके अलावा यह गैर पंजीकृत है और यह जमीन पर अतिक्रमण में लिप्त होने के अलावा कानूनी निगरानी से बचने के लिए भी विभिन्न हथकंडे अपनाता है।

इसके अलावा यह प्रतिबंधित जमाते इस्लामी का एक संगठन है। जमाते इस्लामी को भारत सरकार ने 28 फरवरी, 2019 को गैर कानूनी घोषित किया है। दारुल उलूम जामिया सिराज-उल-उलूम के सभी प्रमुख और महत्वपूर्ण पदों पर प्रतिबंधित जमाते इस्लामी के सदस्य और नेता आसीन हैं और जमाते इस्लामीही इसकाे नियंत्रितकरतीहै।

इसमें कई प्रकार की वित्तीय गड़बड़ियां हैं और वित्तीय नियंत्रण के लिए जिस तरह से यहां व्यवस्था है, वह भी कई गंभीर सवाल पैदाकरती है। इसके अलावा यह संस्थान कट्टरपंथी जिहादी मानसिकता पैदा करने का एक बड़ा केंद्र है और इससे निकले कई छात्र कथित तौर पर आतंकी संगठनों का हिस्सा बनेहैं और कई अलगाववादी व आतंकी संगठनों के लिए बतौर ओवरग्राउंड वर्कर और माटिवेटर भीकाम करते पाए गए हैं।

संस्थान में चल रही थी  गैर कानूनी गतिविधियां

खुफिया सूचनाओं और क्षेत्रीय जांच के आधार पर भी पता चला है कि यह संस्थान गैर कानूनी गतिविधियों के लिए इस्तेमाल हो रहा था। संस्थान के चेयरमैन को भी कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था,लेकिन उन्होंने जो जवाब दिया, वह अपर्याप्त था।इसके अलावा जांच में पता चला कि संस्थान के संचालकों को पता था कि उसका इस्तेमाल अवैध गतिविधियों में हो रहा है।

संबधित अधकारियों ने बताया कि दारुल उलूम जामिया सिराज-उल-उलूम को गैर कानूनी घेाषित कर दिया गया और अब निकट भविष्य में इसे पूरी तरह सील करते हुए इससे संबधित अन्य परिसंपत्तियों को जब्त किया जा सकता है। उन्होंने संस्थान में पढ़ रहे छात्रों केबारे में पूछे जाने पर कहा कि उन्हें निकटवर्ती सरकारी स्कूलों में या फिर किसी अन्य पंजीकृत मदरसे में भेजा जा सकता है।