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कश्मीर: शोपियां सड़क प्रोजेक्ट में कथित गड़बड़ी की परतें खुलीं, 23 अफसर जांच के घेरे में; 5 पर विभागीय कार्रवाई

Published: Mon, 05 Oct 2026 02:25 PM (IST)

शोपियां में सड़क निर्माण परियोजना में कथित वित्तीय गड़बड़ी की गहराई से जांच की जाएगी, जिसमें 23 अधिकारी और कर्मचारी ...और पढ़ें

शोपियां प्रोजेक्ट में 23 की भूमिका पर सवाल, 30 दिन में मांगी रिपोर्ट। (फाइल फोटो)

शोपियां प्रोजेक्ट में 23 की भूमिका पर सवाल, 30 दिन में मांगी रिपोर्ट। (फाइल फोटो)

HighLights

  1. शोपियां सड़क परियोजना में वित्तीय गड़बड़ी की जांच शुरू।

  2. कुल 23 अधिकारी और कर्मचारी जांच के दायरे में।

  3. नए जांच अधिकारी को 30 दिन में रिपोर्ट देनी होगी।

राज्य ब्यूरो, श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर के शोपियां में सड़क निर्माण के एक सरकारी प्रोजेक्ट में पैसों की कथित गड़बड़ी का मामला सामने आया है। सरकार ने मामले की अब गहराई से जांच कराने का फैसला किया है। जांच पूरी होने के बाद यह साफ होगा कि सरकारी पैसे का इस्तेमाल तय नियमों के अनुसार हुआ या नहीं और सरकारी खजाने को कितना नुकसान हुआ।

मामला चेक्की कछदूरा से चेक्की नोगाम और चित्रीपोरा-कापरिन सड़क के सुधार और अपग्रेडेशन से जुड़ा है। यह काम नाबार्ड-XXIII योजना के तहत लोक निर्माण विभाग (आरएंडबी) के शोपियां डिवीजन में कराया गया था।

सरकार को इस प्रोजेक्ट में इंजीनियरों और दूसरे अधिकारियों द्वारा सरकारी धन के गलत इस्तेमाल की शिकायतें मिली थीं। इसके बाद मामले की जांच के लिए पहली कमेटी बनाई गई।

सरकारी नियमों के पालन की भी जांच का जिम्मा

कमेटी को सड़क की मंजूर लागत, ठेके की राशि, मौके पर हुए काम, जारी किए गए पैसे, काम की गुणवत्ता और सरकारी नियमों के पालन की जांच करनी थी।

पहली कमेटी ने अप्रैल 2025 में अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंप दी, लेकिन रिपोर्ट में मामले के कुछ अहम पहलुओं का जवाब नहीं मिल पाया। इसके बाद सरकार ने जुलाई 2025 में एक नई कमेटी बनाई। इस कमेटी ने सितंबर और दिसंबर 2025 में अपनी रिपोर्ट दी।

नई कमेटी की रिपोर्ट में सड़क प्रोजेक्ट में गंभीर लापरवाही, नियमों की अनदेखी और अन्य गड़बड़ियों की बात सामने आई। कमेटी ने यह भी कहा कि सरकारी खजाने को हुए संभावित नुकसान का सही पता लगाने के लिए वित्तीय ऑडिट कराया जाना चाहिए।

23 अधिकारियों और कर्मचारियों की संलिप्ता सामने आई

जांच में कुल 23 अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका सामने आई। इनमें 18 लोग दो साल से ज्यादा समय पहले रिटायर हो चुके हैं, जबकि एक कर्मचारी की मौत हो चुकी है। इसलिए इन लोगों के खिलाफ मौजूदा नियमों के तहत विभागीय कार्रवाई संभव नहीं है। हालांकि, अगर जांच में सरकारी नुकसान के लिए उनकी जिम्मेदारी सामने आती है तो उनके खिलाफ नियमों के अनुसार आगे कार्रवाई की जा सकती है।

दूसरी ओर, पांच सेवारत अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू की गई है। इनमें फारूक अहमद नायकू, विक्रम नैन सिंह, तारिक अहमद मलिक, जावेद अहमद मलिक और रोड वर्कर/डिविजनल स्टोर कीपर गुलाम हसन शामिल हैं। इन सभी ने अपने ऊपर लगे आरोपों से इनकार किया, लेकिन जांच कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर उनके जवाब को पर्याप्त नहीं माना गया।

अब सरकार ने मामले की आगे की जांच के लिए सैयद इशफाक अहमद, प्रभारी सुपरिंटेंडिंग इंजीनियर आरएंडबी सर्कल अनंतनाग को जांच अधिकारी नियुक्त किया है। वहीं, मकसूद शफी बासु को प्रेजेंटिंग ऑफिसर बनाया गया है।

30 दिन के भीतर रिपोर्ट

जांच अधिकारी को 30 दिन के भीतर रिपोर्ट देने को कहा गया है। रिपोर्ट में यह साफ करना होगा कि अधिकारियों पर लगाए गए आरोप सही हैं या नहीं। अब निगाहें इस जांच पर हैं कि सड़क प्रोजेक्ट में आखिर कितना काम हुआ, कितना पैसा खर्च हुआ और सरकारी खजाने को कितना नुकसान पहुंचा।