इजरायल-ईरान संघर्ष से कश्मीर में हलचल, शिया बाहुल्य इलाकों में तनाव; अलर्ट हुईं सुरक्षा एजेंसियां
इजरायल और ईरान में बढ़ते तनाव के कारण कश्मीर घाटी और करगिल में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। सुरक्षा एजेंसियों को अलर्ट कर दिया गया है और शिया धर्मगुरुओं से शांति बनाए रखने की अपील की गई है। संवेदनशील क्षेत्रों में गश्त बढ़ाई गई है और भड़काऊ बयानों से बचने की सलाह दी गई है ताकि कानून व्यवस्था बनी रहे।

राज्य ब्यूरो, श्रीनगर। इजरायल और ईरान में बढ़ते सैन्य तनाव के मद्देनजर कश्मीर घाटी में ही नहीं लद्दाख के करगिल में भी कानून व्यवस्था बनाए रखने और किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई है। सभी सुरक्षा एजेंसियों से को किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए तैयार रहने को कहा गया है। इसके अलावा सभी शिया धर्मगुरूओं और शिया समुदाय के राजनीतिक नेताओं को भी कथित तौर पर किसी भी तरह की भड़काऊ बयानबाजी से बचने की सलाह दी गई है।
उल्लेखनीय है कि कश्मीर घाटी में ही नहीं करगिल में भी बड़ी संख्या में शिया मुस्लिम रहते हैं। घाटी में शिया समुदाय सुन्नी मुस्लिमों की तुलना में अल्पसंख्यक है लेकिन लद्दाख में करगिल शिया बहुल है। ईरान में होने वाले किसी भी घटनाक्रम को लेकर कश्मीर और लद्दाख में शिया समुदाय पूरी तरह से संवेदनशील रहता है और वह ईरान के समर्थन में खड़े नजर आते हैं।
इजरायल द्वारा ईरान पर किए गए हमले के बाद से कश्मीर के शिया बहुल इलाकों में तनाव बना हुआ है। हालाकि शनिवार को कहीं कोई उल्लेखनीय प्रदर्शन नहीं हुआ है,लेकिन गत शुक्रवार को वादी के विभिन्न इलाकों में ही इजरायल और अमेरिका के खिलाफ नारेबाजी करते हुए शिया समुदाय के लोगों ने जुलूस निकाले थे। करगिल स्थित एक पुलिस अधिकारी नेभी इसकी पुष्टि करते हुए बताया कि कानून व्यवस्था की स्थिति बनाए रखने के लिए एहतियात के तौर पर सभी आवश्यक उपाय किए गए हैं।
जम्मू कश्मीर के एक वरिष्ठ सुरक्षा अधिकारी ने बताया कि किस सभी संवेदनशील इलाकों में विशेषकर जो शिया बहुल इलाके सुन्नी आबादी के साथ सटे हैं, वहां पुलिस की गश्त बढ़ाई है। सभी शिया मजहबी नेताओं से प्रशासन ने कथित तौर परआग्रह किया है कि वह किसी भी तरह की भड़काऊ बयानबाजी न करें जिससे काननू व्यवस्था का संकट पैदा हो।
उन्होंने बताया कि कश्मीर के कई इलाकों में हमस और हिजबुला के समर्थक तत्वों की उपस्थिति से इंकार नहीं किया जा सकता,क्येांकि कश्मीर में कई बार राष्ट्रविरोधी प्रदर्शनों के दौरान हमस और हिजबुला के पोस्टर व झंडे लहराए जाते रहे हैं। उन्होंने कहा कि इसके अलावा कश्मीर में भी शिया समुदाय का एक आतंकी संगठन सक्रिय रहा है जो काफी समय पहले समाप्त हो गया था,लेकिन उसके समर्थक मौजूद हैं।
इस बीच, सुरक्षा एजेंसियों से जुढ़े सूत्रों ने बताया कि कश्मीर और करगिल में ईरान के प्रति किसी भी समय हथियार उठाने वाले कुछेक तत्वों की मौजूदगी से इंकार नहीं किया जा सकता। उन्होंने बताया कि कि दिल्ली में जनवरी 2021 में इजरायली एंबेसी बाहर हुए बम धमाके मे करगिल के चार युवकों को गिरफ्तार किया गया था।
इसके अलावा कश्मीर के कई युवक ईरान से पढ़ाई कर लौटे हैं और कईयों का कारोबार भी ईरान में है। इनमें से कईयों का ईरान की कुद्स फोर्स के साथ प्रत्यक्ष-परोक्ष रूप से संबंध होने की आशंका से इंकार नहीं किया जा सकता।
इसके अलावा कश्मीर में मरनासन्न आतंकवाद को जिंदा करने के लिए राष्ट्रविरोधी तत्व कश्मीर में इजरायल विरोधी प्रदर्शनों की आड़ में हिंसा भड़का सकते हैं और इजरायल व अमेरिका के खिलाफ जिहाद के नाम पर कश्मीर में आतंकी भर्ती की कोशिश कर सकते हैं।इसलिए पूरा एहतियात बरता जा रहा है। सभी संवेदनशील इलाकों में चौकसी के साथ साथ उन सभी तत्वों की लगातार निगरानी की जा रही है।

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