श्रीनगर, [ राज्य ब्यूरो] । आतंकियों के खिलाफ अभियानों से लेकर गली मुहल्लों में होने वाले हिंसक प्रदर्शनों से निपटना चुनौती साबित हो रहा है। इनमें व्यस्त पुलिस के लिए वादी में हो रहे राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर के सम्मेलनों की सुरक्षा को यकीनी बनाना भी चुनौती है।

राज्य प्रशासन का मानना है कि पटरी से पूरी तरह उतर चुके पर्यटन उद्योग को फिर से गति देने में यह सम्मेलन और बैठकें बहुत जरूरी हैं। पिछले एक सप्ताह के दौरान ग्रीष्मकालीन राजधानी में तीन से चार सम्मेलन हुए हैं। इनमें एक मेडिकल कांग्रेस भी थी। इसमें देश-विदेश के 100 से ज्यादा डेलीगेट्स शामिल हुए। अगले चार-पांच दिनों में एक और सम्मेलन होने जा रहा है। यह जीएसटी के मुद्दे पर होगा, और केंद्रीय वित्तमंत्री अरुण जेटली देश के विभिन्न राज्यों के वित्त मंत्रियों व वित्त अधिकारियों को संबोधित करेंगे।

स्थानीय व्यापारी, होटल मालिक और राज्य प्रशासन को उम्मीद है कि जीएसटी पर होने वाला सम्मेलन हिंसक प्रदर्शनों की भेंट चढ़ चुके स्थानीय पर्यटन जगत को कुछ मदद जरुर देगा। पर्यटकों की आमद में बढ़ोत्तरी होगी।सम्मेलनों के दौरान देश-विदेश से आने वाले लोगों की सुरक्षा को यकीनी बनाना, सम्मेलन स्थल को आतंकी खतरे से महफूज बनाना मौजूदा परिस्थितियों में राज्य पुलिस के लिए बहुत चुनौतीपूर्ण है।

क्योंकि पुलिस व अर्ध सैनिक बल कानून व्यवस्था के मोर्चे पर व्यस्त हैं। इसके बावजूद पुलिस यह ड्यूटी भी निभाने को पूरी तरह तैयार बैठी है।

राज्य पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि बेशक कश्मीर के मौजूदा हालात में राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर की बैठकों की सुरक्षा को यकीनी बनाना चुनौतीपूर्ण है, लेकिन जब तक यह आयोजन कश्मीर की अर्थव्यवस्था और स्थानीय लोगों की बेहतरी में सहायक है, हम लाख मुश्किलों व चुनौतियों के बावजूद इन्हें सुरक्षित और विश्वासपूर्ण माहौल में संपन्न कराने के लिए प्रतिबद्घ हैं।

वीरवार 18 मई को श्रीनगर में होने वाले जीएसटी सम्मेलन स्थल की सुरक्षा को यकीनी बनाने के लिए ही लगभग एक हजार सुरक्षाकर्मी तैनात किए जाएंगे। इनके अलावा 400 अन्य सुरक्षाकर्मी सम्मेलन में भाग लेने वालों की सुरक्षा का जिम्मा संभालेंगे।

डल झील के किनारे ही एक हैंडी क्राफ्ट्स शोरूम के मालिक जान मुहम्मद ने कहा कि जब यहां कोई बड़ा सम्मेलन होता है तो पुलिस का खूब बंदोबस्त रहता है। कई बार झील को आम लोगों के लिए बंद भी किया जाता है। आम पर्यटकों की आवाजाही भी प्रभावित होती है, लेकिन यह सम्मेलन बहुत जरूरी होते हैं, क्योंकि इनमें भाग लेने वाले लोग जब यहां से जाते हैं तो कश्मीर का ही प्रचार करते हैं, और उनकी बात सुनकर लोग यहां घूमने आते हैं। होटल वालों और शिकारा वालों के साथ-साथ हम जैसे दुकानदारों को भी फायदा पहुंचता है।

पर्यटन सचिव फारूक अहमद शाह ने कहा कि हम विभिन्न राज्य सरकारों, केंद्रीय मंत्रालयों और देश के प्रमुख कारपोरेट घरानों से लगातार संपर्क कर उन्हें कश्मीर में अपने सम्मेलन, बैठकें आयोजित करने को प्रेरित कर रहे हैं। जब तक वह लोग खुद यहां नहीं आएंगे, यहां के हालात को नहीं समझ पाएंगे। कश्मीर के हालात उतने बुरे नहीं हैं, जितने मीडिया में नजर आ रहे हैं। अगर यह लोग आएंगे तो इनसे जुड़े अन्य लोग भी कश्मीर में पर्यटन को प्रोत्साहित होंगे। यहां माहौल पूरी तरह सुरक्षित है।

Posted By: Preeti jha

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