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सत्यपाल मलिक बोले, हुर्रियत नेता बिना पाक से पूछे शौचालय तक नहीं जाते

जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने कहा कि हुर्रियत नेता तो बिना पाकिस्तान से पूछे शौचालय तक नहीं जाते हैं।

By Sachin MishraEdited By: Published: Thu, 25 Oct 2018 03:08 PM (IST)Updated: Thu, 25 Oct 2018 03:08 PM (IST)
सत्यपाल मलिक बोले, हुर्रियत नेता बिना पाक से पूछे शौचालय तक नहीं जाते
सत्यपाल मलिक बोले, हुर्रियत नेता बिना पाक से पूछे शौचालय तक नहीं जाते

नई दिल्ली, एएनआइ। जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने वीरवार को हुर्रियत नेताओं पर जमकर निशाना साधा। सत्यपाल मलिक ने कहा कि हुर्रियत नेता तो बिना पाकिस्तान से पूछे शौचालय तक नहीं जाते हैं। राज्यपाल ने कहा कि जब तक वे पाकिस्तान को अलग नहीं रखेंगे, उनके साथ कोई बातचीत नहीं होगी। 

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उनके मुताबिक, मैंने किसी पक्षकार से बातचीत नहीं की है। मैंने हाल में विभिन्न पार्टियों के प्रतिनिधियों से मुलाकात की थी। 

पाकिस्तान पर निशाना साधते हुए राज्यपाल मलिक ने कहा कि कश्मीर के मौजूदा हालत के लिए वह जिम्मेदार है। सोशल मीडिया के जरिए कश्मीर में जहर फैलाया जा रहा है। पाकिस्तान की फौज नहीं चाहती कि कश्मीर का मसला हल हो और यहां के लोग शांति के साथ रहें। वह भारत सरकार से कश्मीर के जरिए बांग्लादेश की हार का बदला ले रहा है।

यह बात सभी जानते हैं कि भारत में आतंकवाद उन्हीं की देन है। अफसोस इस बात है कि अपने निहित स्वार्थ के लिए वे युवाओं को इस्लाम के नाम पर गलत रास्ते पर ले जा रहा हैं। आतंकवादी कश्मीर के बच्चों को जन्नत का झूठा सपना दिखा रहे हैं। बंदूक के दम पर श्रीलंका में लीटे को भी कुछ नहीं मिला। कश्मीर में आतंकवादियों का भी यही अंजाम होगा। युवाओं को यह समझना होगा कि बंदूक से कुछ नहीं मिलेगा। भारत उनका देश है, जम्मू-कश्मीर उनका अपना राज्य है, जिसका अपना झंडा, अपना संविधान है। उन्हें काबिल और बेहतरीन प्रधानमंत्री मिला है। वह अपनी समस्याएं बताएं उन्हें दूर किया जाएगा। राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने हाल ही में संपन्न हुए निकाय चुनावों का हवाला देते हुए कहा कि इस दौरान किसी की मौत नहीं हुई है।

लोगों में राज्यपाल प्रशासन के प्रति विश्वास बढ़ रहा है। आतंकी इसी बात से भड़के हुए हैं। पिछले 3 महीनों में आतंकी संगठनों में कोई भर्ती नहीं हुई है।कश्मीर में पत्थरबाजी की घटनाएं भी बहुत कम हो गई हैं। उन्होंने कहा कि राजभवन के दरवाजे लोगों के लिए खुले हैं, वे कभी भी अपनी समस्याएं लेकर उनके पास आ सकते हैं।  


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