रहबर-ए-तालीम शिक्षकों के तबादले पर बड़ा अपडेट, मंत्री सकीना इट्टू ने बताया कहां तक पहुंचा नीति का ड्राफ्ट
शिक्षा मंत्री सकीना इट्टू ने घोषणा की कि रहबर-ए-तालीम शिक्षकों के लिए व्यापक स्थानांतरण नीति का मसौदा लगभग तैयार है ...और पढ़ें

सकीना इट्टू बोलीं- ड्राफ्ट लगभग तैयार। (फाइल फोटो)
HighLights
रहबर-ए-तालीम स्थानांतरण नीति का मसौदा लगभग तैयार है।
शिक्षकों को शिक्षा व्यवस्था की रीढ़ बताया, समस्याओं पर कार्रवाई जारी।
दूरदराज क्षेत्रों में ReT शिक्षकों के योगदान की सराहना की गई।
राज्य ब्यूरो, जम्मू। रहबर-ए-तालीम शिक्षकों के तबादले को लेकर जल्द नई नीति आ सकती है। शिक्षा मंत्री सकीना इट्टू ने कहा कि व्यापक स्थानांतरण नीति का मसौदा लगभग तैयार है। उन्होंने बताया कि सुझाव लेने के लिए ड्राफ्ट को सार्वजनिक किया गया था और विभिन्न हितधारकों से प्राप्त सुझावों की जांच की जा रही है।
उन्होंने कहा कि व्यवहारिक और संभव सुझावों को नीति में शामिल करने का प्रयास किया जा रहा है। शिक्षकों की कई समस्याओं के समाधान के लिए विभागाध्यक्षों और प्रशासनिक स्तर पर कार्रवाई की जरूरत है तथा ऐसे मामलों की जांच और निस्तारण की प्रक्रिया पहले से जारी है।
शिक्षकों को बताया शिक्षा व्यवस्था की रीढ़
मंत्री ने शिक्षकों और उनके प्रतिनिधियों से अपील की कि पदोन्नति, सेवा मामलों और अन्य मांगों से संबंधित सभी आवश्यक दस्तावेज व्यवस्थित रूप से विभाग के समक्ष प्रस्तुत करें। उन्होंने कहा कि कई बार दस्तावेज उपलब्ध नहीं होने के कारण वास्तविक मामलों में भी देरी हो जाती है। शिक्षक शिक्षा व्यवस्था की रीढ़ हैं और समाज व राष्ट्र के भविष्य को आकार देने में उनकी भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है।
उन्होंने कहा कि मजबूत और प्रगतिशील जम्मू-कश्मीर के निर्माण के लिए शिक्षकों का सम्मान, सशक्तीकरण और उनकी जायज समस्याओं का समाधान जरूरी है।
रहबर-ए-तालीम शिक्षकों के योगदान को सराहा
इट्टू रविवार को एससीइआरटी बेमिना, श्रीनगर में जम्मू-कश्मीर रहबर-ए-तालीम टीचर्स फोरम की ओर से आयोजित एक दिवसीय शिक्षक सम्मेलन को संबोधित कर रही थीं। सम्मेलन का विषय शिक्षकों की भूमिका, अधिकार और जिम्मेदारियां था। इसमें बड़ी संख्या में शिक्षकों के अलावा स्कूल शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने हिस्सा लिया।
मंत्री ने राष्ट्र निर्माण में शिक्षकों के योगदान की सराहना करते हुए विशेष रूप से रहबर-ए-तालीम शिक्षकों के समर्पण को नमन किया।
उन्होंने कहा कि इन शिक्षकों ने जम्मू-कश्मीर के दूरदराज, दुर्गम और सीमांत क्षेत्रों में सेवाएं देकर उन इलाकों तक शिक्षा पहुंचाई, जहां कभी शैक्षणिक सुविधाएं बेहद सीमित या पूरी तरह अनुपलब्ध थीं।
रहबर-ए-तालीम स्कूलों ने बदली दूरदराज इलाकों की तस्वीर
मंत्री ने कहा कि रहबर-ए-तालीम योजना शुरू होने के समय शायद किसी ने कल्पना नहीं की होगी कि दूरदराज के क्षेत्रों के बंद या अपर्याप्त शिक्षण सुविधाओं वाले स्कूल आगे चलकर जीवंत शिक्षा केंद्र बनेंगे। इन स्कूलों से पढ़कर बच्चों ने अपने जीवन में लक्ष्य हासिल किए हैं और इस बदलाव का श्रेय शिक्षकों को जाता है।
मंत्री ने मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला द्वारा शिक्षकों के हितों के समर्थन का उल्लेख करते हुए कहा कि जम्मू-कश्मीर विधानसभा में हाल ही में शिक्षकों से जुड़े मुद्दों पर पारित प्रस्ताव सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव शिक्षकों पर कोई एहसान नहीं, बल्कि उनके प्रति सरकार की जिम्मेदारी की अभिव्यक्ति है।
