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'वोट देने वालों से मजाक हुआ', मुफ्त बिजली के वादे पर सज्जाद लोन ने उमर सरकार को घेरा; स्मार्ट मीटर नीति पर भी सवाल

Published: Tue, 20 Oct 2026 01:39 PM (IST)

जम्मू-कश्मीर में सज्जाद लोन ने स्मार्ट मीटर नीति पर सरकार को घेरा है। उन्होंने 200 यूनिट मुफ्त बिजली के चुनावी ...और पढ़ें

स्मार्ट मीटर के खर्च और मुफ्त बिजली पर सज्जाद लोन का सरकार पर हमला। (फाइल फोटो)

स्मार्ट मीटर के खर्च और मुफ्त बिजली पर सज्जाद लोन का सरकार पर हमला। (फाइल फोटो)

HighLights

  1. स्मार्ट मीटर से गरीब परिवारों पर 5000 रुपये तक का बोझ।

  2. बिजली के खंभे से दूरी पर केबल का अतिरिक्त खर्च।

  3. 200 यूनिट मुफ्त बिजली का चुनावी वादा अधूरा रहा।

राज्य ब्यूरो, श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर में स्मार्ट मीटर लगवाना अब गरीब परिवारों की जेब पर भारी पड़ने का मुद्दा बन गया है। बिजली कनेक्शन के लिए चार मीटर से अधिक केबल की जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त खर्च उपभोक्ता को उठाना पड़ता है। जम्मू-कश्मीर पीपुल्स कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष और हंदवाड़ा के विधायक सज्जाद लोन ने इसी व्यवस्था को लेकर नेशनल कॉन्फ्रेंस सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने आरोप लगाया कि स्मार्ट मीटर के नाम पर गरीब परिवारों को 4,000 से 5,000 रुपये तक खर्च करने पड़ रहे हैं।

सज्जाद लोन के मुताबिक, स्मार्ट मीटर लगाने वाली कंपनी प्रत्येक घर के लिए अधिकतम चार मीटर केबल उपलब्ध कराती है। इसमें दो मीटर इनपुट और दो मीटर आउटपुट के लिए होते हैं। लेकिन अगर बिजली के खंभे से घर तक कनेक्शन पहुंचाने के लिए इससे ज्यादा केबल चाहिए, तो उसका खर्च परिवार को अपनी जेब से देना पड़ता है।

इस व्यवस्था का सीधा असर उन घरों पर पड़ सकता है, जो बिजली के खंभे से दूर स्थित हैं। घर की दूरी जितनी अधिक होगी, केबल की जरूरत भी उतनी ही बढ़ेगी और इसके साथ उपभोक्ता का खर्च भी बढ़ सकता है।

कनेक्शन चाहिए तो हजारों रुपये खर्च करने का आरोप

लोन ने दावा किया कि गरीब परिवारों को स्मार्ट मीटर लगवाने के लिए 4,000 से 5,000 रुपये तक चुकाने पड़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि अतिरिक्त केबल का भुगतान नहीं करने पर बिजली कनेक्शन नहीं मिलने और उपभोक्ता को बिजली ग्रिड से काटे जाने की स्थिति पैदा हो सकती है।

ऐसे में सवाल उठता है कि सीमित आमदनी वाले परिवार बिजली कनेक्शन के लिए अचानक हजारों रुपये कहां से जुटाएंगे? खासकर उन लोगों के लिए यह खर्च बड़ी परेशानी बन सकता है, जिनके घर बिजली के खंभे से काफी दूरी पर हैं।

स्मार्ट मीटर के मुद्दे पर सरकार को घेरने के साथ सज्जाद लोन ने चुनाव के दौरान किए गए 200 यूनिट मुफ्त बिजली के वादे पर भी सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि दो साल बीत जाने के बावजूद लोगों को एक भी यूनिट मुफ्त बिजली नहीं मिली है।

लोन के अनुसार, मुफ्त बिजली के वादे ने चुनाव के दौरान सरकार को वोट हासिल करने में बड़ा फायदा पहुंचाया था। लेकिन अब लोगों को स्मार्ट मीटर लगवाने और कनेक्शन लेने के लिए अतिरिक्त रकम खर्च करनी पड़ रही है।

जिन्होंने वोट दिया, मजाक उन्हीं के साथ हुआ

सज्जाद लोन ने मुख्यमंत्री पर निशाना साधते हुए कहा कि चुनाव प्रचार के दौरान स्मार्ट मीटर के मुद्दे पर आलोचना और व्यंग्य करने वालों की सरकार में अब लोगों को उसी व्यवस्था के लिए पैसे देने पड़ रहे हैं। उन्होंने इसे उन लोगों के साथ मजाक बताया, जिन्होंने मुख्यमंत्री के पक्ष में मतदान किया था।

लोन के आरोपों ने स्मार्ट मीटर नीति, अतिरिक्त केबल के खर्च और मुफ्त बिजली के वादे को लेकर नई राजनीतिक बहस छेड़ दी है। अब निगाहें सरकार के जवाब पर हैं कि वह अतिरिक्त केबल के खर्च को लेकर उपभोक्ताओं को राहत देती है या नहीं और 200 यूनिट मुफ्त बिजली के वादे पर क्या कदम उठाती है।