श्रीनगर, राज्य ब्यूरो।कश्मीर घाटी में सोमवार को सामान्य जनजीवन पर एक बार फिर प्रशासनिक पाबंदियों अौर शरारती तत्वों द्वारा जबरन लागू कराए जा रहे बंद का असर नजर आया। ग्रीष्मकालीन राजधानी मे लालचौक,जडीबल और डाऊन-टाऊन के अलावा वादी में अन्यत्र सभी संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा का कड़ा बंदोबस्त करते हुए निषेधाज्ञा को सख्ती से लागू किया गया है। । सूत्रों की मानें तो श्रीनगर, बडगाम,पुलवामा,अनंतनाग,गांदरबल, बांडीपोर और बारामुला के जिला उपायुक्तों से कहा गया है कि वह सांप्रदायिक दंगों की दृष्टि से संवेदनशील इलाकों और मुख्य सड़कों व हाईवे पर मुहर्रम के जुलूस की अनुमति न दें।

पांच अगस्त को जम्मू कश्मीर का पुनर्गठन किए जाने से उपजे तनाव और अनिश्चितता का माहौल में कानून व्यवस्था की स्थिति बनाए रखने के लिए पूरी वादी में निषेधाज्ञा लगाई गई थी,जिसमं प्रशासन ने राहत देने का क्रम जारी रखा हुआ था। वादी में शांति से हताश आतंकी और अलगाववादी अपने मंसूबों को नाकाम होते देख मुहर्रम के जुलूस की आड़ में किसी बड़ी वारदात को अंजाम देने की फिराक में हैं। उनकी इस साजिश का खुफिया सूत्रों द्वारा पता लगाए जाने के बाद प्रशासन ने पाबंदियों में राहत का क्रम अस्थायीतौर पर रोकते हुए एक बार फिर निषेधाज्ञा को सख्ती से लागू कर दिया है।

संबधित अधिकारियों ने बताया कि 10 सितंबर की शाम तक वादी में प्रशासनिक पाबंदियों को जारी रखा जाएगा। इस दौरान लालचौक, डलगेट, जडीबडल,मीरगुंड,पटटन, बडगाम, बेमिना, पांपोर और अन्य इलाकों में सभी प्रमुखसड़कों पर मुहर्रम के जुलूस पर भी पाबंदी रहेगी। अलबत्ता, शिया बहुल इलाकों के भीतरी हिस्सों में स्थित इमामबाड़ों में स्थानीय स्तर पर मुहर्रम की मजलिसों पर किसीतरह की रोक नहीं है। उन्होंने बताया कि यह कदम आम लोगों के जान माल की सुरक्षा और वादी में शांति व्यवस्था को यकीनी बनाए रखने के लिए उठाया गया है। 

इस बीच आज सुबह से ही श्रीनगर समेत वादी के सभी इलाकों में प्रशसनिक पाबंदियों का असर नजर आया। सिर्फ गली मोहल्लों मे सवेरे वही दुकानें खुली,जहां रोजमर्रा का सामान मिलता है। यह दुकानें भी नौ बजे के करीब बंद हो गई। वादी में सभी प्रमुख बाजार और निजी प्रतिष्ठान पूरी तरह बंद रहे। सड़कों पर आम वाहनों की आवाजाही भी बीते दिनों की तुलना में बहुत कम थी। शिक्षण संस्थान जो गत सप्ताह थोड़े बहुत खुले नजर आ रहे थे,आज बंद रह। सरकारी कार्यालयों में भी कर्मचारियों की उपस्थिति प्रशासनिक पाबंदियों से प्रभावित रही।नागरिक सचिवालय में कर्मचारियों की उपस्थिति लगभग 85 प्रतिशत रही है और सभी प्रशासनिक कामकाज बिना किसी रुकावट चले।

 

Posted By: Rahul Sharma

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