जम्मू-कश्मीर में एक लाख से अधिक कैजुअल वर्कर्स का रिकॉर्ड तैयार, रेगुलर करने पर सरकार ने दिया जवाब
जम्मू-कश्मीर में आधार आधारित बायोमेट्रिक पहचान अभियान के तहत 100,501 कैजुअल और अन्य श्रमिकों का पंजीकरण किया गया है।
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जम्मू-कश्मीर में एक लाख से ज्यादा कैजुअल वर्कर्स का रिकॉर्ड तैयार, अब नियमितीकरण पर टिकी नजरें।
HighLights
जम्मू-कश्मीर में 100,501 कैजुअल श्रमिकों का पंजीकरण हुआ।
सरकार ने नियमितीकरण के लिए समिति गठित की।
समिति मानवीय, कानूनी, वित्तीय पहलुओं की जांच करेगी।
राज्य ब्यूरो, श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर में वर्षों से अस्थायी और कैजुअल आधार पर सेवाएं दे रहे हजारों कर्मचारियों के लिए सरकार की ओर से चलाए गए आधार आधारित बायोमेट्रिक पहचान और स्किल-प्रोफाइलिंग अभियान के तहत केंद्र शासित प्रदेश में 100501 कैजुअल और अन्य श्रमिकों का पंजीकरण किया गया है। यह आंकड़ा विधानसभा में विधायक वहीद उर रहमान पारा के एक अतारांकित प्रश्न के जवाब में सरकार ने साझा किया।
सरकार द्वारा दिए गए विभागवार आंकड़ों के मुताबिक पंजीकृत कर्मचारियों में 69696 कैजुअल लेबर, 8534 सीजनल लेबर और 8836 डेली रेटेड वर्कर्स-वर्क-चार्ज्ड कर्मचारी शामिल हैं। इसके अलावा 3092 पार्ट टाइम वर्कर्स, 156 सीआइसी ऑपरेटर, 5757 एनवाइसी, हमाल और ड्राइवर, 1929 हॉस्पिटल डेवलपमेंट फंड के तहत कार्यरत लोग तथा अन्य श्रेणियों के कर्मचारी भी इस सूची में शामिल हैं।
विभागवार आंकड़ों में जल शक्ति विभाग, सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण विभाग सबसे आगे है। यहां 38585 कर्मचारियों का पंजीकरण हुआ है। इसके बाद पावर डेवलपमेंट डिपार्टमेंट की विभिन्न विंग में 13616 जबकि शिक्षा विभाग में 12646 कर्मचारी दर्ज किए गए हैं।
इसके अलावा वन विभाग में 8317, लोक निर्माण विभाग (आरएंडबी) में 6801, स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग में 4868 और कृषि विभाग में 4776 कर्मचारी पंजीकृत हैं।
जम्मू जिले में सबसे ज्यादा कर्मचारी
जिलावार स्थिति देखें तो जम्मू जिला 13425 पंजीकृत कर्मचारियों के साथ सबसे ऊपर है। इसके बाद श्रीनगर में 11825 और अनंतनाग में 8823 कर्मचारी दर्ज किए गए हैं। बारामूला में 7724, बडगाम में 5772, पुलवामा में 5651, कुपवाड़ा में 5547 और राजौरी में 5191 कर्मचारी पंजीकृत हैं।
गांदरबल में 4056, डोडा में 3856, कुलगाम में 3321, रियासी में 3210, बांडीपोरा में 2771, किश्तवाड़ में 2754, ऊधमपुर में 2518 और पुंछ में 2455 कर्मचारियों का आंकड़ा दर्ज किया गया है। वहीं कारगिल में 1791, लेह में 1021 और सिविल सचिवालय/नई दिल्ली में 222 कर्मचारी भी इस सूची में शामिल हैं।
नियमितीकरण पर सरकार ने दिया जवाब
सबसे बड़ा सवाल अब इन कर्मचारियों के नियमितीकरण को लेकर है। सरकार ने बताया कि एसआरओ-520, दिनांक 21 अक्टूबर 2017, के तहत कैजुअल और अन्य श्रमिकों को निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार नियमित नियुक्ति देने का प्रावधान था। हालांकि, बाद में कानूनी फैसलों के मद्देनजर इस नीति की समीक्षा की गई।
सरकार के अनुसार वित्तीय वर्ष 2024-25 और 2025-26 में एसआरओ-520 के तहत किसी भी कैजुअल या अन्य कर्मचारी का नियमितीकरण नहीं किया गया।
इसी मुद्दे पर आगे का रास्ता तलाशने के लिए सरकार ने 19 मार्च 2025 को एक समिति का गठन किया है। समिति को अलग-अलग श्रेणियों के कर्मचारियों के नियमितीकरण से जुड़े मामलों की मानवीय, कानूनी और वित्तीय पहलुओं से जांच करने और व्यापक समाधान सुझाने की जिम्मेदारी दी गई है।
सरकार का कहना है कि मामले में सेवा नियमों, कानूनी प्रभाव और वित्तीय बोझ जैसे कई पहलुओं पर विचार जरूरी है। समिति की सिफारिशों के आधार पर आगे उचित कदम उठाया जाएगा। सरकार ने स्पष्ट किया कि अंतिम फैसला ऐसा होना चाहिए जो कानूनी रूप से उचित और वित्तीय रूप से टिकाऊ हो।
