राज्य ब्यूरो, श्रीनगर : कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पंजाब के वित्त मंत्री मनप्रीत ¨सह बादल ने बुधवार को कहा कि केंद्र में भाजपानीत सरकार को फ्रांस से 36 युद्धक विमानों की खरीदारी को लेकर आशंका दूर करनी चाहिए। देश की जनता केंद्र सरकार और भाजपा से राफेल डील पर जवाब मांगती है। यूपीए सरकार ने इन विमानों के लिए जो समझौता किया था, उसे भंग कर मौजूदा केंद्र सरकार ने जो समझौता किया है उससे 41 हजार करोड़ का घाटा हुआ है।

मनप्रीत बादल ने कहा कि जिस तरह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने फ्रांस दौरे में इस डील को तय किया है, उससे कई तरह के संदेह पैदा होते हैं। प्रधानमंत्री के फ्रांस दौरे से महज दो दिन पहले तत्कालीन विदेश सचिव कहते हैं कि विमान सौदे पर कोई बातचीत या समझौता नहीं होगा, लेकिन जब मोदी फ्रांस पहुंचे तो किसी से सलाह किए बिना 36 विमानों की आपूíत का ठेका दे दिया। इस सौदे को प्रधानमंत्री द्वारा तय किए जाने से पूर्व तत्कालीन रक्षा मंत्री मनोहर पाíरकर ने डसाल्ट एविशन और हिंदुस्तान एयरोनॉटिकल लिमिटेड (एचएएल) के बीच बातचीत को संतोषप्रद बताया था।

मनप्रीत ने राफेल डील के तहत जहाजों की देखभाल का ठेका एक सार्वजनिक उपक्रम के बजाय रिलांयस डिफेंस लिमिटेड को देने पर भी एतराज जताया है। उन्होंने कहा कि इस खरीद में आवश्यक नियमों का अनुपालन क्यों नहीं हुआ। एक तरफ सरकार कहती है कि हमें यह जहाज तत्काल चाहिए, लेकिन पहले जहाज की आपूíत 2019 में होगी। सभी जहाज 2022 तक ही मिलेंगे तो फिर जल्दी क्या है। केंद्र में जब यूपीए सरकार थी तो समझौते के तहत 18 जहाज तत्काल भारत को मिलने थे।

उन्होंने कहा कि एक तरफ रक्षामंत्री संसद में सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए जहाजों की कीमत बताने से इन्कार करती हैं। दूसरी तरह डसाल्ट एविएशन और रिलांयस डिफेंस अपनी वाíषक बैलेंस शीट में इनकी कीमत का जिक्र कर रही हैं।

Posted By: Jagran