कश्मीर: सेब-बादाम के बागों तक नहीं पहुंच रहा पानी, लिफ्ट इरिगेशन योजना पर अटका मामला; अब क्या है विकल्प?
पुलवामा के सेब और बादाम उत्पादक किसान सिंचाई की कमी से जूझ रहे हैं, जिससे उनकी फसलें प्रभावित हो रही ...और पढ़ें

पुलवामा के बागों में सिंचाई का संकट। (फाइल फोटो)
HighLights
पुलवामा के किसान सिंचाई की कमी से परेशान हैं।
लिफ्ट इरिगेशन योजना फिलहाल संभव नहीं मानी गई।
विभाग अब बोरवेल जैसे वैकल्पिक समाधान खोज रहा है।
राज्य ब्यूरो, श्रीनगर। कश्मीर में सेब और बादाम की खेती किसानों की आमदनी का बड़ा सहारा है, लेकिन अगर बागों तक सिंचाई के लिए पानी ही न पहुंचे तो मेहनत और कमाई दोनों पर संकट खड़ा हो सकता है। पुलवामा जिले के क्रमजीपोरा से रोहमू और रोहमू से नवपोरा-नवगाम तक फैली कंडी जमीन में खेती करने वाले किसानों के सामने भी ऐसी ही परेशानी है।
यहां सेब और बादाम की खेती बड़े पैमाने पर होती है, लेकिन सिंचाई की पर्याप्त सुविधा नहीं होने से किसानों को मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।
इस समस्या को दूर करने के लिए स्थानीय किसानों ने लिफ्ट इरिगेशन योजना की उठाई परंतु जल शक्ति विभाग ने अभी तक इस समस्या के स्थायी हल के लिए कोई प्रभावी कदम नहीं उठाए हैं। यही वजह है कि किसानों में सरकार के प्रति रोष बढ़ता नजर आ रहा है।
सेब-बादाम की खेती के लिए मशहूर इलाके में सिंचाई का संकट
विधायक गुलाम मोही-उद-दीन मीर ने बताया कि वह भी किसानों की इस समस्या को सरकार के समक्ष कई बार रख चुके हैं। उन्होंने बताया कि यह इलाका मुख्य रूप से सेब और बादाम की खेती के लिए इस्तेमाल किया जाता है। सरकार ने भी यह माना कि क्षेत्र में बागवानी का महत्व है, लेकिन खेती के लिए जरूरी सिंचाई व्यवस्था की कमी एक गंभीर समस्या है।
सिंचाई संकट दूर करने में रोशनी नाला बना चुनौती
जल शक्ति विभाग के मंत्री जावेद अहमद राणा ने कहा कि उन्हें क्षेत्र की समस्या के बारे में जानकारी है। हालांकि, इस समस्या के समाधान के लिए तत्काल लिफ्ट इरिगेशन योजना शुरू करने की संभावना से उन्होंने इनकार करते हुए बताया कि अधिकारियों ने उन्हें बताया कि क्षेत्र में पड़ने वाला रोशनी नाला काफी दूर स्थित है।
ऐसे में वहां से पानी उठाकर खेतों और बागों तक पहुंचाने वाली योजना फिलहाल व्यवहारिक नहीं है, क्योंकि इसके लिए उपयुक्त जल स्रोत उपलब्ध नहीं है।
सिंचाई के विकल्प तलाशे जा रहे
लिफ्ट इरिगेशन योजना पर अड़चन के बावजूद सिंचाई की दूसरी संभावनाएं पूरी तरह बंद नहीं हुई हैं। मंत्री ने कहा है कि बोरवेल और ट्यूबवेल के जरिए सिंचाई के विकल्प तलाशे जा सकते हैं। हालांकि, इस दिशा में आगे बढ़ने से पहले विस्तृत भूजल जांच जरूरी होगी।
इस जांच के जरिए यह पता लगाया जाएगा कि इलाके में भूजल कितना उपलब्ध है और उससे लंबे समय तक पानी निकालना टिकाऊ होगा या नहीं। इसके साथ ही संबंधित सक्षम प्राधिकरण से जरूरी अनुमति और मंजूरी लेनी होगी। योजना को तकनीकी और वित्तीय रूप से व्यवहारिक पाए जाने के बाद ही आगे बढ़ाया जा सकेगा।
मंत्री ने हालांकि बोरवेल या ट्यूबवेल योजना शुरू करने की कोई निश्चित समयसीमा नहीं बताई। उन्होंने कहा कि भूजल की उपलब्धता, टिकाऊ जल निकासी, जरूरी मंजूरियों और परियोजना की लागत जैसे पहलुओं की जांच के बाद ही फैसला लिया जा सकता है।
