राज्य ब्यूरो, श्रीनगर : देश के विभिन्न हिस्सों में बुधवार को शिक्षक दिवस पर अध्यापकों को सम्मानित किया जा रहा था। वहीं, ग्रीष्मकालीन राजधानी में अपनी मांगों के समर्थन में जुलूस निकाल रहे सर्व शिक्षा अभियान और रहबर-ए-तालीम अध्यापकों पर पुलिस रंगीन पानी की बौछार करने के साथ लाठियां भांज रही थी। पुलिस कार्रवाई में सात अध्यापक जख्मी हो गए, जबकि 30 अन्य को पुलिस ने हिरासत में लिया है।

सुबह बड़ी संख्या में रहबर ए तालीम और एसएसए अध्यापक शेरे कश्मीर पार्क में जमा हुए। इन अध्यापकों ने शिक्षक दिवस को काला दिवस मनाने का एलान किया था। कई अध्यापको ने काले चोगे पहन रखे थे तो कइयों ने अपने हाथों में काली पट्टियां बांध रखी थी। यह लोग सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों का लाभ देने की मांग कर रहे थे। एसएसए अध्यापक अपनी सेवाओं को नियमित करने पर भी जोर दे रहे हैं।

अपनी मांगों के समर्थन में नारेबाजी करते हुए अध्यापकों ने शेरे कश्मीर पार्क से शेरे कश्मीर इंटरनेशनल कन्वेंशन सेंटर (एसकेआइसीसी) की तरफ एक जुलूस की शक्ल में कूच किया। एसकेआइसीसी में शिक्षक दिवस के उपलक्ष्य में समारोह चल रहा था, लेकिन पोलो व्यू के पास पुलिस ने नारेबाजी कर रहे अध्यापकों को रोकते हुए वापस मुड़ने को कहा, लेकिन आंदोलनरत अध्यापक नहीं मानें और उन्होंने धक्का-मुक्की करते हुए जबरन आगे जाने का प्रयास किया। इस पर पुलिस ने उन पर रंगीन पानी की बौछारें फेंकी, लेकिन इसका असर नहीं हुआ। इसके बाद पुलिस ने अध्यापकों को खदेड़ने के लिए लाठियों का सहारा लिया।

पुलिस कार्रवाई में सात अध्यापक जख्मी बताए जाते हैं, जबकि 30 अन्य को पुलिस ने एहतियातन हिरासत में ले लिया। जम्मू कश्मीर रहबरे तालीम अध्यापक फोरम के अध्यक्ष फारूक अहमद तांत्रे ने बताया कि हम लोग सरकार की वादाखिलाफी पर रोष जताते हुए ही काला दिवस मना रहे हैं। हम सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों का लाभ चाहते हैं। इसके अलावा एसएसए अध्यापकों का भी मुद्दा है। हमारा जुलूस शांतिपूर्ण था, लेकिन पुलिस ने अकारण ही हम लोगों पर लाठियां बरसाई।

Posted By: Jagran