राज्य ब्यूरो, श्रीनगर: पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) की युवा इकाई के अध्यक्ष वहीद उर रहमान परा की जमानत याचिका एक बार फिर अदालत ने खारिज कर दी है। पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती के भरोसेमंद लोगों में एक वहीद परा की बीते पाच माह में दूसरी बार जमानत याचिका रद हुई है।

विशेष अदालत ने जमानत याचिका को खारिज करते हुए कहा कि वहीद परा के खिलाफ आतंकी गतिविधियों के लगाए गए आरोप प्रथम दृष्ट्य: सही नजर आते हैं। न्यायाधीश ने अपने 24 पेज के आदेश में कहा कि अभियोजन पक्ष का यह कहना सही नहीं है कि बीते पाच माह में इस मामले मे कोई नई प्रगति नहीं होने के कारण फिर से नई जमानत याचिका स्वीकार नहीं की जा सकती और यह भी सही है कि इस समय ऐसा कोई आधार भी नजर नहीं आता कि जिसके मुताबिक आरोपित को जमानत पर रिहा किया जाए। उसके खिलाफ लगाए गए आरोप अत्यंत गंभीर हैं और जो सुबूत हैं, वह आरोपों को सही ठहराते हैं।

सूत्रों ने बताया कि परा की जमानत याचिका पर सुनवाई लगभग एक माह पहले हुई थी और अदालत ने उस पर अपना फैसला सुरक्षित रखा था। अदालत ने बीते सोमवार को ही अपना फैसला सार्वजनिक किया है। परा के वकील शारिक रियाज ने पीडीपी नेता के खिलाफ पुलिस की एफआइआर को खारिज किए जाने पर जोर देते हुए कहा था कि इसी मामले में की जाच एनआइए कर रही है। इसलिए पुलिस की जाच वैध नहीं हैं। इसके अलावा पुलिस ने जो आरोप लगाए हैं, वह एनआइए के आरोपपत्र जैसे ही हैं और एनआइए द्वारा दायर मामले में वह पहले ही जमानत पर हैं। अभियोजन पक्ष के वकील ने जवाब देते हुए कहा कि वहीद परा ने जानबूझकर और स्वेच्छा से आतंकियों का साथ दिया है। सरहद पार भी उसके संपर्क हैं। वह अमेरिका, इंग्लैंड व अन्य कई मुल्कों में बैठे अलगाववादी और आतंकी तत्वों के साथ भी संपर्क में था।

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