पाकिस्तान की नई नौटंकी! आतंकी मसूद अजहर पर इनाम बढ़ाया, रेड बुक में डाला; क्या FATF की ग्रे लिस्ट से बचने का दांव?
पाकिस्तान ने FATF के दबाव में अजहर मसूद पर इनाम 50 लाख से बढ़ाकर 70 लाख पाकिस्तानी रुपये कर दिया ...और पढ़ें

पाकिस्तान ने आतंकी अजहर मसूद पर इनामी राशि 50 से बढ़ाकर 70 लाख कर दी है। (फाइल फोटो)
HighLights
अजहर मसूद पर इनाम 50 लाख से बढ़ाकर 70 लाख किया गया।
यह कदम FATF की ग्रे सूची से बचने का प्रयास है।
पाकिस्तान पर जैश-ए-मोहम्मद को संरक्षण देने का आरोप।
नवीन नवाज, श्रीनगर। एफएटीएफ की आगामी बैठक से पूर्व पाकिस्तान ने अपनी मोस्ट वांटेड आतंकियों की सूची, जिसे रेड बुक कहा जाता है, में पुलवामा के मुख्य गुनहगार अजहर मसूद को भगोड़ा बताते हुए उस पर पाकिस्तानी करंसी में इनामी राशि 50 लाख से बढ़ाकर 70 लाख कर दी है। लेकिन यह बात अलग है कि अजहर मसूद पाकिस्तान में ही है और आरोप है कि पाकिस्तान की सरकार तथा पाकिस्तान की सेना लगातार उसे और उसके संगठन जैश-ए-मोहम्मद को संरक्षण प्रदान कर रही है। ऐसे में इनाम की राशि बढ़ाने का कदम आतंकवाद के खिलाफ वास्तविक कार्रवाई से अधिक एफएटीएफ को प्रभावित करने की कोशिश नजर आता है।
फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (एफएटीएफ) की अगली बैठक 26 अक्टूबर से 30 अक्टूबर 2026 तक फ्रांस की राजधानी पेरिस में होने जा रही है। पाकिस्तान का भरसक प्रयास है कि एफएटीएफ उसे ग्रे सूची में शामिल न करे। अगर ऐसा होता है तो दिवालिया होने के कगार पर जा पहुंचे पाकिस्तान का आर्थिक तंत्र पूरी तरह से गड़बड़ा सकता है।
गत मार्च में अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आइएमएफ) ने पाकिस्तान को गत मई में भारतीय मुद्रा में 11,322 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता का पैकेज दिया था। मौजूदा समय में पाकिस्तान का विदेशी कर्ज भारतीय मुद्रा में लगभग 4.92 लाख करोड़ रुपये है।
एफएटीएफ की कार्रवाई से बचने के लिए पाकिस्तान को आतंकवाद के वित्तपोषण और आतंकी संगठनों के खिलाफ ठोस कार्रवाई दिखानी होगी। ऐसे में अजहर मसूद पर इनाम बढ़ाने को इसी दबाव के संदर्भ में देखा जा रहा है।
अजहर मसूद को अमेरिका ने भी आतंकी घोषित कर रखा
जैश-ए-मोहम्मद और उसके सरगना अजहर मसूद को अमेरिका ने भी आतंकी घोषित कर रखा है। पाकिस्तान सरकार पर उसे पकड़ने और कानून के मुताबिक दंड देने का दबाव है, लेकिन पाकिस्तान सरकार अजहर मसूद की पाकिस्तान में मौजूदगी से इन्कार करती रही है।
पाकिस्तानी सरकार ने गत दिनों दावा किया था कि वह अफगानिस्तान में छिपा हुआ है, लेकिन अफगानिस्तान की सरकार ने पाकिस्तान के दावे को नकारते हुए कहा था कि वह पाकिस्तान में ही है।
पाकिस्तान वर्ष 2021 से लगातार दावा करता आया है कि अजहर मसूद पाकिस्तान में नहीं है और उस पर 50 लाख का इनाम रखा है। अब इसे बढ़ाकर 70 लाख कर दिया गया है। सवाल यह है कि अगर पाकिस्तान वास्तव में अजहर मसूद को पकड़ना चाहता है तो उसके संगठन का नेटवर्क पाकिस्तान में लगातार कैसे सक्रिय है?
ऑपरेशन सिंदूर में तबाही के बाद जैश का ढांचा फिर खड़ा!
भारतीय खुफिया एजेंसियों और जैश-ए-मोहम्मद के नेटवर्क से जुड़े रहे कुछ पुराने आतंकी, जो अब मुख्यधारा में लौट चुके हैं, कहते हैं कि अजहर मसूद बेशक सार्वजनिक तौर पर पाकिस्तान में नजर न आए, लेकिन उसे और उसके संगठन को पाकिस्तान सरकार व सेना का पूरा संरक्षण है। उनके मुताबिक, आप्रेशन सिंदूर में जैश-ए-मोहम्मद का पाकिस्तान में जो ढांचा नष्ट हुआ है, उसे फिर से खड़ा करने में पाकिस्तान सरकार और सेना जैश-ए-मोहम्मद का सहयोग कर रही है।
पाकिस्तान के पंजाब के बहावलपुर स्थित जैश के प्रमुख ठिकाने मरकज सुभानल्लाह का बड़े पैमाने पर पुनर्निर्माण किया गया है। इसके पुनर्निर्माण के लिए पाकिस्तान सरकार की तरफ से 25 करोड़ पाकिस्तानी रुपये किस्तों में उपलब्ध कराए गए।
जैश के आतंकी शिविर पाकिस्तान के भीतरी इलाकों में स्थानांतरित
जैश-ए-मोहम्मद ने अपने आतंकी शिविर भी पाकिस्तान के भीतरी इलाकों में स्थानांतरित किए हैं। बहावलपुर, मुल्तान, सियालकोट, कराची, मुजफ्फराबाद, कोटली, हरिपुर और मनशेरा में उसके भर्ती अभियान और रैलियों की बात सामने आती रही है। इनमें कई बार अजहर मसूद ने भी फोन के जरिए संबोधित किया है।
अंतरराष्ट्रीय वित्तीय प्रतिबंधों से बचने के लिए जैश ने पाकिस्तान में अपने संचालन को अल-मुराबितुन नाम से दोबारा ब्रांड करने की रणनीति अपनाई है।
इनामी राशि बढ़ाया जाना सिर्फ एक दिखावा
जम्मू कश्मीर मामलों के जानकार प्रो हरिओम ने कहा कि अजहर मसूद पर पाकिस्तान द्वारा इनामी राशि बढ़ाया जाना सिर्फ एक दिखावा है। अगर वह पाकिस्तान में नहीं है, पाकिस्तान सरकार उसके खिलाफ है तो फिर जैश ए मोहम्मद के ट्रेनिंग शिविर और मदरसे कैसे चल रहे हैं, पाकिस्तान सरकार ने जैश सरगना को अपना मुख्यालय मरकज सुभानल्लाह के पुनर्निर्माण में सरकारी मदद क्यों की।
पाकिस्तान अगर सही मायनों में जैश ए मोहम्मद के खिलाफ है तो उसे जैश के पूरे ढांचे को नष्ट करते हुए अजहर मसूद को कान से पकड़कर भारत के हवाले करना चाहिए। रेड बुक में नाम दर्ज करने और इनाम घोषित करने से आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई पूरी नहीं होती। अजहर मसूद पर इनाम बढ़ाकर पाकिस्तान ने अंतरराष्ट्रीय दबाव से बचने का प्रयास है।
