'अब जनता के मुद्दों पर बात करे विपक्ष', जम्मू-कश्मीर में कैबिनेट विस्तार के बाद डिप्टी सीएम ने साधा निशाना
उपमुख्यमंत्री सुरिंदर चौधरी ने जम्मू-कश्मीर मंत्रिमंडल विस्तार का बचाव करते हुए कहा कि यह शासन व्यवस्था को मजबूत करने और जनता तक सेवाओं की पहुंच बढ़ाने के लिए है।

जम्मू-कश्मीर के डिप्टी सीएम। फाइल फोटो
राज्य ब्यूरो, श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर में उमर अब्दुल्ला सरकार के मंत्रिमंडल विस्तार के बाद अब सरकार और विपक्ष के बीच सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। उपमुख्यमंत्री सुरिंदर चौधरी ने मंगलवार को कहा कि मंत्रिमंडल का विस्तार शासन व्यवस्था को मजबूत करने, जवाबदेही बढ़ाने और जनता तक सरकारी सेवाओं की बेहतर पहुंच सुनिश्चित करने के लिए किया गया है।
उन्होंने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि अब मंत्रिमंडल विस्तार पर सवाल उठाने के बजाय विपक्ष को सरकार के कामकाज और जनता से जुड़े मुद्दों पर बात करनी चाहिए। चौधरी ने कहा कि सरकार ने मंत्रिमंडल के विस्तार और फेरबदल का जो वादा जनता से किया था, उसे पूरा कर दिया है। अब ध्यान विकास, जनकल्याण और प्रशासनिक व्यवस्था को बेहतर बनाने पर होना चाहिए।
प्रशासन जनता की जरूरतों के प्रति अधिक जवाबदेह बने
उपमुख्यमंत्री ने कहा कि मंत्रिमंडल में नए चेहरों को शामिल करने का मकसद केवल संख्या बढ़ाना नहीं, बल्कि सरकार के कामकाज को अधिक प्रभावी बनाना है। सरकार चाहती है कि उसके फैसलों का सीधा लाभ जम्मू-कश्मीर के लोगों तक पहुंचे और प्रशासन जनता की जरूरतों के प्रति अधिक जवाबदेह बने।
भाजपा नेताओं की आलोचना पर पलटवार करते हुए चौधरी ने कहा कि विपक्ष लंबे समय से मंत्रिमंडल विस्तार में देरी को लेकर सवाल उठा रहा था। अब जब सरकार ने यह कदम उठा लिया है, तो विपक्ष को दूसरे मुद्दों पर ध्यान देना चाहिए।
उन्होंने कहा कि हमने लोगों से कहा था कि मंत्रिमंडल का विस्तार और फेरबदल करेंगे और अब यह हो चुका है। अब भाजपा नेताओं या नेता प्रतिपक्ष से सवाल पूछिए।
युवाओं को बदनाम करने के बजाय वादों का जवाब दे भाजपा
चौधरी ने भाजपा नेताओं से जम्मू-कश्मीर के युवाओं को बदनाम करना बंद करने की अपील की। उन्होंने कहा कि भाजपा को यह बताना चाहिए कि उसने जनता से किए गए वादों को पूरा करने के लिए क्या कदम उठाए हैं।
उपमुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि सरकार की प्राथमिकता राजनीतिक टकराव नहीं, बल्कि जनकल्याण, विकास और जवाबदेह प्रशासन है। उनके मुताबिक, मंत्रिमंडल विस्तार का वास्तविक आकलन इस आधार पर होना चाहिए कि इससे जनता को कितना फायदा मिलता है और सरकारी कामकाज में कितना सुधार आता है।
