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जम्मू-कश्मीर के तंगधार में अंडरग्राउंड ऑपरेशन थिएटर, 1.5 लाख जांच, 446 सर्जरी; LG ने बताई 'ऑपरेशन दृष्टि' की कहानी

By Naveen NawazEdited By: Dallu Slathia
Published: Wed, 30 Sep 2026 01:25 PM (GMT+05:30)

जम्मू-कश्मीर में 'ऑपरेशन दृष्टि' के तहत 1.5 लाख से अधिक लोगों की नेत्र जांच की गई और 446 मोतियाबिंद सर्जरी ...और पढ़ें

तंगधार में अंडरग्राउंड  ऑपरेशन थिएटर बनाकर डॉक्टरों ने किए ऑपरेशन। (फाइल फोटो)

तंगधार में अंडरग्राउंड ऑपरेशन थिएटर बनाकर डॉक्टरों ने किए ऑपरेशन। (फाइल फोटो)

HighLights

  1. 1.5 लाख से अधिक लोगों की नेत्र जांच की गई।

  2. 446 मोतियाबिंद सर्जरी सफलतापूर्वक संपन्न हुईं, दृष्टि बहाल हुई।

  3. तंगधार में भूमिगत ऑपरेशन थिएटर से विशेषज्ञ चिकित्सा सुविधा मिली।

राज्य ब्यूरो, श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर के दूरदराज, पहाड़ी और सीमावर्ती क्षेत्रों में रहने वाले लोगों तक गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने के प्रयासों को रेखांकित करते हुए उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने कहा कि 'ऑपरेशन दृष्टि' केवल चिकित्सा शिविर नहीं, बल्कि सेवा, साहस, मानवीय संवेदना और संकल्प की ऐसी पहल है, जिसका केंद्र हर वह नागरिक है जिसे बेहतर उपचार की जरूरत है।

बादामी बाग छावनी स्थित चिनार ऑडिटोरियम में मेगा मोतियाबिंद सर्जरी शिविर के दूसरे चरण के समापन समारोह को संबोधित करते हुए उपराज्यपाल ने अभियान से जुड़े चिकित्सकों, मेडिकल टीमों, सेना के अधिकारियों, सहयोगी स्टाफ और अन्य सभी कर्मियों के योगदान की सराहना की।

उन्होंने कहा कि कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के बावजूद विशेषज्ञ चिकित्सा सुविधाओं को जरूरतमंद लोगों तक पहुंचाना इस पहल की सबसे महत्वपूर्ण उपलब्धियों में से एक है।

446 सर्जरी, 1.5 लाख से अधिक नेत्र जांच

सिन्हा ने बताया कि अभियान के तहत अब तक 1.5 लाख से अधिक लोगों की आंखों की जांच की जा चुकी है, जबकि 446 सर्जरी संपन्न हुई हैं। इन प्रयासों का उद्देश्य ऐसे लोगों तक आधुनिक नेत्र चिकित्सा पहुंचाना रहा है, जिनके लिए दूरदराज क्षेत्रों से विशेषज्ञ उपचार केंद्रों तक पहुंचना चुनौतीपूर्ण होता है।

उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य सेवा की पहुंच केवल शहरों और बड़े चिकित्सा संस्थानों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। दुर्गम क्षेत्रों में रहने वाले प्रत्येक नागरिक को गुणवत्तापूर्ण उपचार उपलब्ध कराना सामूहिक जिम्मेदारी है।

तंगधार में चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों के बीच सर्जरी

उपराज्यपाल ने कुपवाड़ा के तंगधार में आयोजित चिकित्सा शिविर का विशेष उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि पहाड़ी भूभाग, सीमावर्ती स्थिति, कठिन सड़क संपर्क और सुरक्षा संबंधी चुनौतियों के बीच वहां चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराना आसान नहीं था।

उन्होंने बताया कि ब्रिगेडियर संजय कुमार मिश्रा और अन्य अधिकारियों के सहयोग से मेडिकल टीमों ने तंगधार में भूमिगत ऑपरेशन थिएटर तैयार कर सर्जरी की। आवश्यक चिकित्सा उपकरणों को भी हवाई मार्ग से वहां पहुंचाया गया।

सिन्हा ने कहा कि यह प्रयास इस बात का उदाहरण है कि दृढ़ इच्छाशक्ति और सामूहिक प्रयास के माध्यम से कठिन भौगोलिक परिस्थितियों को भी स्वास्थ्य सेवा की राह में स्थायी बाधा नहीं बनने दिया जा सकता।

सीमावर्ती आबादी तक पहुंची विशेषज्ञ चिकित्सा सुविधा

उपराज्यपाल ने कहा कि तंगधार और आसपास के क्षेत्रों के लोगों को अपने क्षेत्र के निकट ही उन्नत चिकित्सा सुविधा उपलब्ध हुई। उनके अनुसार, सीमावर्ती क्षेत्रों में रहने वाले कई लोगों के लिए इस स्तर की विशेषज्ञ नेत्र चिकित्सा तक पहुंच का यह महत्वपूर्ण अवसर था।

उन्होंने कहा कि अभियान का प्रभाव केवल उपचार तक सीमित नहीं है। किसी व्यक्ति की दृष्टि लौटना उसके दैनिक जीवन, आत्मनिर्भरता और सामाजिक गरिमा से भी जुड़ा होता है।

'हर उपचार के पीछे है गरिमा बहाल होने की कहानी'

सिन्हा ने कहा कि इस पहल की वास्तविक सफलता उन लोगों के जीवन में दिखाई देती है जिन्हें उपचार के बाद बेहतर जीवन जीने का अवसर मिला।

उन्होंने कहा, “मैं इस पहल में बदलते हुए जीवन देखता हूं। प्रत्येक उपचार और गरिमा की बहाली की हर कहानी ‘ऑपरेशन दृष्टि’ की कहानी है। मैं इसे दृष्टि बहाली के संकल्प के रूप में देखता हूं।”

सेवा के साथ विश्वास और सहयोग का संदेश

उपराज्यपाल ने कहा कि इस अभियान ने स्वास्थ्य सेवाओं के साथ-साथ सेना और स्थानीय समुदायों के बीच सहयोग की भावना को भी मजबूत किया है। उन्होंने भारतीय सेना, चिकित्सकों और अभियान से जुड़े सभी कर्मियों के प्रति आभार व्यक्त किया।

उन्होंने कहा कि कठिन क्षेत्रों में चिकित्सा सेवाएं पहुंचाना केवल उपचार उपलब्ध कराने का कार्य नहीं है, बल्कि जरूरतमंद लोगों को यह भरोसा दिलाना भी है कि वे अकेले नहीं हैं और कठिन परिस्थितियों में भी उनकी स्वास्थ्य संबंधी जरूरतों को प्राथमिकता दी जा सकती है।

अभियान का दायरा आगे बढ़ाने पर जोर

सिन्हा ने कहा कि शिविर का समापन इस पहल का अंत नहीं है। उन्होंने उम्मीद जताई कि भविष्य में भी ऐसे प्रयास गांवों, सीमावर्ती क्षेत्रों और अन्य दूरदराज समुदायों तक पहुंचेंगे।

उन्होंने कहा कि आधुनिक और विशेषज्ञ स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता को भौगोलिक दूरी और कठिन भूभाग से निर्धारित नहीं किया जाना चाहिए। सामूहिक प्रयास, तकनीकी क्षमता और सेवा भावना के माध्यम से देश के सबसे दूरस्थ क्षेत्रों तक भी गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाई जा सकती हैं।

समापन समारोह में उपराज्यपाल ने चिकित्सकों, मेडिकल टीमों, सहयोगी स्टाफ, पायलटों, वायुसेना कर्मियों और अभियान को सफल बनाने में योगदान देने वाले सभी लोगों के प्रति आभार व्यक्त किया।