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'हम कश्मीरी हैं, खबरदार...', शेख अब्दुल्ला पर BJP के बयान पर उमर का पलटवार, बोले- हमें इतिहास का पाठ न पढ़ाएं

By Naveen NawazEdited By: Dallu Slathia
Published: Wed, 23 Sep 2026 05:39 PM (IST)

महाराजा हरि सिंह की जयंती पर सरकारी अवकाश को लेकर भाजपा और NC के बीच सियासी विवाद गहरा गया है। ...और पढ़ें

उमर ने  कहा, 'जिन लोगों ने आजादी की लड़ाई में हिस्सा नहीं लिया, वे क्या सबक सिखाएंगे?  (फाइल फोटो)

उमर ने  कहा, 'जिन लोगों ने आजादी की लड़ाई में हिस्सा नहीं लिया, वे क्या सबक सिखाएंगे?  (फाइल फोटो)

HighLights

  1. भाजपा ने शेख अब्दुल्ला को अंग्रेजों का 'एजेंट' बताया।

  2. उमर अब्दुल्ला ने भाजपा-आरएसएस की स्वतंत्रता संग्राम भूमिका पर सवाल उठाए।

  3. अवकाश विवाद महाराजा हरि सिंह बनाम शेख अब्दुल्ला तक पहुंचा।

नवीन नवाज, श्रीनगर। महाराजा हरि सिंह की जयंती पर सरकारी अवकाश को लेकर शुरू हुआ विवाद अब जम्मू-कश्मीर के सियासी इतिहास की सबसे पुरानी और संवेदनशील राजनीतिक रेखाओं तक पहुंच गया है। नेशनल कान्फ्रेंस (नेकां)की ओर से अवकाश को लेकर उठी मांग पर भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष एवं सदन में नेता प्रतिपक्ष सुनील शर्मा ने शेख मोहम्मद अब्दुल्ला को अंग्रेजों का ‘एजेंट’ और ‘टूल’ बताते हुए नेशनल कॉन्फ्रेंस की पूरी राजनीतिक विरासत पर हमला बोल दिया।

जवाब में मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने भाजपा-आरएसएस के स्वतंत्रता संग्राम में योगदान पर सवाल दागते हुए कहा कि जिन्होंने आजादी की लड़ाई में हिस्सा नहीं लिया, वे दूसरों को इतिहास का पाठ पढ़ाने का दावा न करें। देखते ही देखते छुट्टी का सवाल महाराजा बनाम शेख अब्दुल्ला, 1931 के कश्मीर दंगों, नेकां के संघर्ष और स्वतंत्रता आंदोलन की भूमिका तक पहुंच गया।

सुनील शर्मा ने नेकां पर सीधा हमला बोलते हुए कहा कि जिस राजनीतिक धारा की जड़ें शेख मोहम्मद अब्दुल्ला से जुड़ी हैं, उससे महाराजा हरि सिंह के सम्मान की उम्मीद करना मुश्किल है। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्ष 1924 में अंग्रेजों ने एक षड्यंत्र के तहत नेकां की बुनियाद तैयार की और अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय से निकले शेख मोहम्मद अब्दुल्ला को महाराजा के खिलाफ इस्तेमाल करने के लिए राजनीतिक ‘टूल’ बनाया।

शर्मा ने गंभीर आरोप लगाए

शर्मा ने वर्ष 1931 की घटनाओं को लेकर भी नेकां और शेख अब्दुल्ला की भूमिका पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि उस समय कश्मीर में तथाकथित विद्रोह के नाम पर हालात बिगाड़े गए, मंदिरों को तोड़ा गया और कश्मीरी पंडितों पर अत्याचार हुए। भाजपा नेता ने इन घटनाओं को महाराजा हरि सिंह के खिलाफ खड़ी की गई उस राजनीतिक परिस्थिति से जोड़ते हुए नेकांकी ऐतिहासिक विरासत पर सवाल उठाया।

उन्होंने कहा कि महाराजा हरि सिंह उनके लिए केवल इतिहास का हिस्सा नहीं, बल्कि पूजनीय और आदर्श हैं। महाराजा की किसी दूसरे राजनीतिक व्यक्तित्व से तुलना नहीं की जा सकती। शर्मा ने आरोप लगाया कि महाराजा को नेकां द्वारा पैदा की गई परिस्थितियों के कारण प्रदेश छोड़ना पड़ा।

सुनील शर्मा ने कहा कि महाराजा हरि सिंह की जयंती पर सरकारी अवकाश को रद्द करने की मांग केवल छुट्टी का प्रशासनिक मुद्दा नहीं है, बल्कि यह महाराजा के सम्मान और उनकी ऐतिहासिक भूमिका से जुड़ा प्रश्न है। उन्होंने नेकां पर निशाना साधते हुए कहा कि महाराजा के प्रति ऐसी सोच रखने वाली राजनीतिक विरासत से और क्या उम्मीद की जा सकती है।

भाजपा नेता ने कहा कि महाराजा हरि सिंह जम्मू-कश्मीर के लोगों के लिए सम्मान और गौरव का विषय हैं और उनकी जयंती के अवकाश को लेकर किसी भी तरह की मांग को इसी ऐतिहासिक संदर्भ में देखा जाना चाहिए।

उमर ने खोला दूसरा मोर्चा, भाजपा के इतिहास पर सवाल

सुनील शर्मा के हमले के बाद मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने भी जवाब देने में देर नहीं की। उमर ने शेरे कश्मीर इंटरनेशनल कन्वेंशन सेंटर श्रीनगर में पत्रकारों से बातचीत में कहा कि जिन लोगों ने स्वतंत्रता संग्राम में हिस्सा नहीं लिया, वे दूसरों को उस दौर का इतिहास पढ़ाने की कोशिश न करें।

मुख्यमंत्री ने भाजपा और आरएसएस की पूर्ववर्ती राजनीतिक धारा की स्वतंत्रता आंदोलन में भूमिका पर सवाल उठाते हुए कहा कि कौन आजादी की लड़ाई में शामिल था, किसने माफी मांगी और किसने क्या किया, यह इतिहास में दर्ज है।

उमर ने कहा कि जम्मू-कश्मीर में शेख-ए-कश्मीर की भूमिका को भुलाया नहीं जा सकता। ननेकां अपने राजनीतिक संघर्ष में जो बलिदान दिए, उन्हें भी इतिहास से मिटाया नहीं जा सकता। उन्होंने कहा कि बलिदान का सिलसिला नेशनल कॉन्फ्रेंस से शुरू हुआ था।

'हमलावर खबरदार, हम कश्मीरी हैं...'

मुख्यमंत्री ने नेकां के ऐतिहासिक नारे का उल्लेख करते हुए भाजपा पर सवाल दागा—“हमलावर खबरदार, हम कश्मीरी हैं खबरदार—यह नारा कहां से आया था?”

उमर का इशारा उस दौर के राजनीतिक संघर्ष की ओर था, जिसे नेकां अपनी ऐतिहासिक पहचान और योगदान का अहम हिस्सा मानती है। मुख्यमंत्री ने कहा कि शेख अब्दुल्ला और नेकां की भूमिका को एकतरफा नजरिये से खारिज नहीं किया जा सकता।उमर अब्दुल्ला ने भाजपा पर इतिहास को राजनीतिक नजरिये से पेश करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि जब भाजपा को इतिहास का कोई पहलू पसंद नहीं आता तो वह उसे अपने तरीके से पेश करने की कोशिश करती है।

मुख्यमंत्री के मुताबिक, मौजूदा विवाद भी इसी राजनीतिक दृष्टिकोण का उदाहरण है। उन्होंने संकेत दिया कि इतिहास को लेकर भाजपा और नेकांकी व्याख्या मूल रूप से अलग-अलग है और दोनों अपने-अपने राजनीतिक नायकों तथा संघर्षों को जम्मू-कश्मीर की विरासत के केंद्र में रखते हैं।