30 दिन की छुट्टी लेकर गईं सर्जन, ढाई साल तक नहीं लौटीं; उमर सरकार ने नौकरी से किया निकाला
जम्मू-कश्मीर सरकार ने जिला अस्पताल बडगाम की विशेषज्ञ सर्जन डॉ. साइमा नंदा को ढाई साल से अधिक समय तक ड्यूटी ...और पढ़ें
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जम्मू-कश्मीर सरकार ने ढाई साल की गैरहाजिरी के बाद सर्जन को नौकरी से निकाला।
राज्य ब्यूरो, श्रीनगर। जिला अस्पताल बडगाम में तैनात एक विशेषज्ञ सर्जन की करीब ढाई साल तक चली गैरहाजिरी के बाद जम्मू-कश्मीर सरकार ने बड़ी कार्रवाई की है। सरकार ने डॉ. साइमा नंदा की प्रोबेशन अवधि खत्म करते हुए उन्हें स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग की सरकारी सेवा से बाहर कर दिया है। यह फैसला 1 मार्च 2024 से लागू माना गया है।
स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग ने इस संबंध में आदेश भी जारी कर दिया है। सरकार ने यह कार्रवाई जम्मू-कश्मीर के सरकारी सेवा नियमों के तहत की है। डॉ. साइमा नंदा की नियुक्ति विशेषज्ञ सर्जन के पद पर मई 2022 में हुई थी।
इसके बाद उनकी तैनाती जिला अस्पताल बडगाम में की गई। सरकारी रिकॉर्ड के मुताबिक, उन्हें 30 जनवरी 2024 से 30 दिन की छुट्टी मंजूर की गई थी। छुट्टी खत्म होने के बाद उन्हें 1 मार्च 2024 को अस्पताल में ड्यूटी पर लौटना था। लेकिन वह ड्यूटी पर नहीं आईं।
अस्पताल के मेडिकल सुपरिंटेंडेंट ने उनकी गैरहाजिरी की जानकारी उच्च अधिकारियों को दी। इसके बाद 13 मार्च 2024 को उन्हें नोटिस भेजकर तीन दिन के भीतर ड्यूटी पर लौटने और गैरहाजिरी का कारण बताने को कहा गया। सरकारी आदेश के अनुसार, उन्होंने न तो ड्यूटी ज्वाइन की और न ही इस नोटिस का जवाब दिया।
अस्पताल में सिर्फ एक सर्जन रह गया, मरीजों पर पड़ा असर
डॉ. नंदा की लगातार गैरहाजिरी की जानकारी मेडिकल सुपरिंटेंडेंट ने मार्च और अप्रैल 2024 में दोबारा दी। रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि सर्जरी विभाग में उस समय केवल एक विशेषज्ञ सर्जन उपलब्ध था। ऐसे में अस्पताल में आने वाले मरीजों के इलाज और सर्जरी से जुड़ी सेवाओं पर इसका असर पड़ने की बात सामने आई।
लगातार गैरहाजिरी के बाद स्वास्थ्य सेवाएं निदेशालय, कश्मीर ने 6 जून 2024 को डॉ. नंदा को एक और नोटिस भेजा। इसमें उन्हें पांच दिन के भीतर ड्यूटी पर लौटने को कहा गया और चेतावनी दी गई कि ऐसा नहीं करने पर उनके खिलाफ सरकारी नियमों के तहत कार्रवाई हो सकती है।
डॉ. नंदा ने 25 जून 2024 को अपना जवाब दिया। उन्होंने बताया कि उनकी सास को थायरॉयड कैंसर था और उनका इलाज जम्मू-कश्मीर से बाहर चल रहा था। कई सर्जरी के कारण लंबे समय तक इलाज की जरूरत थी। डॉ. नंदा ने कहा कि उनकी सास की देखभाल करने के लिए वह ही उपलब्ध थीं।उन्होंने अपनी पारिवारिक स्थिति को देखते हुए सरकार से मानवीय आधार पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करने की अपील की।
जून 2026 में फिर भेजा गया नोटिस
सरकारी आदेश के मुताबिक, डॉ. नंदा इसके बाद भी ड्यूटी पर वापस नहीं आईं। 3 फरवरी 2026 की रिपोर्ट में भी उनकी गैरहाजिरी जारी बताई गई। इसके बाद प्रशासनिक विभाग ने 3 जून 2026 को एक और नोटिस जारी किया। इसमें उनसे पूछा गया कि लंबे समय से ड्यूटी से अनुपस्थित रहने के कारण उनके खिलाफ सरकारी नियमों के तहत कार्रवाई क्यों न की जाए।
जुलाई 2026 में डॉ. नंदा ने ईमेल के जरिए और मेडिकल सुपरिंटेंडेंट के माध्यम से अपना जवाब भेजा। उन्होंने सरकार से उनका इस्तीफा जल्द स्वीकार करने की अपील की। सरकार ने उनके पूरे मामले की जांच की। इसमें उनकी नियुक्ति, छुट्टी, लंबे समय तक गैरहाजिरी, उन्हें भेजे गए नोटिस और उनके जवाबों को देखा गया। सरकार ने निष्कर्ष निकाला कि डॉ. नंदा ने अपनी प्रोबेशन अवधि संतोषजनक तरीके से पूरी नहीं की।
इसके बाद स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग ने उनकी प्रोबेशन खत्म कर उन्हें स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग की सरकारी सेवा से से बाहर कर दिया। सरकार ने इस फैसले को 1 मार्च 2024 से प्रभावी माना है, यानी उसी दिन से जब उनकी छुट्टी खत्म हुई थी और वह ड्यूटी पर नहीं लौटी थीं।
