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'दबाव में उमर अब्दुल्ला ने लड़ा था चुनाव', सकीना इट्टू ने किया CM का बचाव; आगा रुहल्ला बोले- कुर्सी प्यारी थी 

Published: Sat, 12 Sep 2026 11:14 PM (GMT+05:30)Updated: Sat, 12 Sep 2026 11:28 PM (GMT+05:30)

जम्मू-कश्मीर में उमर अब्दुल्ला सरकार को लेकर नेशनल कॉन्फ्रेंस के भीतर से ही राजनीतिक असहजता बढ़ गई है। मंत्री सकीना इट्टू ने मुख्यमंत्री का बचाव किया।

CM उमर अब्दुल्ला और बागी सांसद आगा रुहल्ला। फाइल फोटो

CM उमर अब्दुल्ला और बागी सांसद आगा रुहल्ला। फाइल फोटो

HighLights

  1. उमर अब्दुल्ला सरकार पर नेशनल कॉन्फ्रेंस के भीतर से उठ रहे सवाल।

  2. मंत्री सकीना इट्टू ने मुख्यमंत्री के सीमित अधिकारों का बचाव किया।

  3. सांसद आगा सैयद रुहुल्ला ने सरकार की जवाबदेही पर प्रश्न उठाए।

राज्य ब्यूरो, जम्मू। जम्मू-कश्मीर की सत्ता में अब राजनीतिक असहजता महज विपक्ष के हमलों तक सीमित नहीं रह गई है। मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के नेतृत्व वाली सरकार को लेकर सत्तारूढ़ नेशनल कॉन्फ्रेंस के भीतर से उठ रही आवाजें उस संकट की ओर इशारा कर रही हैं, जिसे सरकार अब तक केंद्र शासित प्रदेश के सीमित अधिकारों की आड़ में ढकने की कोशिश करती रही है।

मुख्यमंत्री के बचाव में समाज कल्याण एवं स्वास्थ्य शिक्षा मंत्री सकीना इट्टू का यह कहना कि उमर अब्दुल्ला चुनाव लड़ना ही नहीं चाहते थे और पार्टी ने उन्हें मजबूर किया, राजनीतिक विवाद को और भड़का गया है।लेकिन नेशनल कन्फ्रेंस के बागी सांसद आगा सैयद रुहुल्ला ने इस बचाव की बखिया उधेड़ दी

सकीना इट्टू ने कहा कि मुख्यमंत्री पूरी गंभीरता और निष्ठा से जनता की उम्मीदें पूरी करने में जुटे हैं, लेकिन केंद्र शासित प्रदेश के मुख्यमंत्री के पास सीमित अधिकार हैं। उनके मुताबिक इन्हीं सीमाओं के कारण सरकार कई मामलों में प्रभावी निर्णय लेने में असहाय है।

रुहुल्ला बोले- कोई दबाव नहीं था

लेकिन नेशनल कन्फ्रेंस के बागी सांसद आगा सैयद रुहुल्ला ने इस बचाव की बखिया उधेड़ दी। उन्होंने दावा किया कि उमर अब्दुल्ला पर चुनाव लड़ने का कोई दबाव नहीं था और वह स्वयं उस प्रक्रिया में शामिल रहे हैं, जिसमें पार्टी उम्मीदवारों और चुनावी रणनीति को अंतिम रूप दिया गया।

रुहुल्ला का सीधा सवाल है कि जब मुख्यमंत्री को पहले से पता था कि उनके पास सीमित अधिकार होंगे, तो उन्होंने मुख्यमंत्री की कुर्सी स्वीकार क्यों की? उनके अनुसार अधिकारों का रोना रोकर अब जिम्मेदारी से बचना जनता को स्वीकार नहीं होगा।

सरकार की मुश्किलें केवल राजनीतिक बयानबाजी तक सीमित नहीं हैं। सरकारी कर्मचारियों, दैनिक वेतनभोगियों, एमबीबीएस इंटर्न और पशु चिकित्सकों के आंदोलनों ने शासन व्यवस्था की पोल खोल दी है।

आरक्षण को युक्तिसंगत बनाने, 200 यूनिट मुफ्त बिजली के चुनावी वादे और कर्मचारियों की मांगों जैसे मुद्दों पर सरकार लगातार घिर रही है। विरोधियों का आरोप है कि सरकार जनता के सवालों का समाधान करने के बजाय अपनी सीमित शक्तियों का हवाला देकर जिम्मेदारी टाल रही है।

जनता की अपेक्षाओं को पूरा करने में विफल

सबसे गंभीर राजनीतिक संकेत यह है कि सरकार की आलोचना अब पार्टी के भीतर और उसके निकट माने जाने वाले नेताओं से भी सामने आ रही है। अनंतनाग-राजौरी से लोकसभा सदस्य और नेशनल कान्फ्रेंस के वरिष्ठ नेता मियां अल्ताफ ने भी प्रदेश के राजनीतिक हालात को चिंताजनक बताते हुए सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने माना कि सरकार कई मुद्दों पर जनता की अपेक्षाओं को पूरा करने में विफल रही है।

रुहुल्ला ने सरकार पर जनता से दूरी बनाने का आरोप लगाते हुए कहा कि हर समस्या का समाधान संभव न हो तो भी सरकार उन मुद्दों पर कार्रवाई कर सकती है, जिन पर उसके अधिकार हैं। नेशनल कान्फ्रेंस के सांसद आगा सैयद रुहुल्लामेहदी ने कैबिनेट सहयोगी सकीना इटू द्वारा मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के चुनावी भविष्य को लेकर की गई टिप्पणियों को खारिज करते हुए कहा कि इस तरह के बयान “सही परिप्रेक्ष्य में नहीं दिए गए होंगे।

और क्या बोले बागी सांसद?

इटू की टिप्पणियों पर प्रतिक्रिया देते हुए रुहुल्ला ने कहा कि जम्मू-कश्मीर के लोगों से जुड़े मुद्दों पर उनका रुख सिद्धांतों पर आधारित है और चुनावी गणनाओं से प्रेरित नहीं है। श्रीनगर के सांसद ने कहा कि वह हमेशा लोगों की वास्तविक आकांक्षाओं और अधिकारों के लिए खड़े रहे हैं और चुनावी प्रयासों या राजनीतिक परिणामों की परवाह किए बिना आगे भी ऐसा करते रहेंगे।

गौरतलब है कि स्वास्थ्य एवं शिक्षा मंत्री सकीना इटू ने इससे पहले मुख्यमंत्री के आवास के बाहर रुहुल्ला के विरोध प्रदर्शन को “सस्ती लोकप्रियता हासिल करने की कोशिश” करार दिया था और उमर अब्दुल्ला के नेतृत्व वाली सरकार का बचाव किया था। इन टिप्पणियों से नेशनल कॉन्फ्रेंस के भीतर आरक्षण नीति और जनता की शिकायतों के प्रति पार्टी के रुख सहित विभिन्न मुद्दों को लेकर बढ़ते मतभेद सामने आए थे।