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'केंद्र के मौखिक वादों पर भरोसा न करें ...', CM उमर की लद्दाख को 'बड़े भाई' वाली सलाह, जम्मू-कश्मीर का दिया उदाहरण

By Naveen NawazEdited By: Dallu Slathia
Published: Wed, 16 Sep 2026 05:10 PM (IST)

जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने लद्दाख और कारगिल के नेताओं को केंद्र सरकार के मौखिक आश्वासनों पर भरोसा न ...और पढ़ें

CM उमर अब्दुल्ला ने कहा- किसी भी वादे को लिखित में स्वीकार किया जाना चाहिए।  (फाइल फोटो)

CM उमर अब्दुल्ला ने कहा- किसी भी वादे को लिखित में स्वीकार किया जाना चाहिए।  (फाइल फोटो)

HighLights

  1. उमर अब्दुल्ला ने लद्दाख नेताओं को मौखिक वादों से बचने की सलाह दी।

  2. केंद्र सरकार के वादों को लिखित और हस्ताक्षरित रूप में लेने पर जोर।

  3. जम्मू-कश्मीर को राज्य का दर्जा बहाली के मौखिक आश्वासन का अनुभव बताया।

राज्य ब्यूरो, श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने लद्दाख और कारगिल के नेताओं को केंद्र सरकार के मौखिक आश्वासनों पर भरोसा नहीं करने की सलाह दी है। उन्होंने कहा कि किसी भी वादे पर विश्वास करने से पहले उसे लिखित रूप में लिया जाना चाहिए और उस पर हस्ताक्षर होने चाहिए।

पुलवामा में समीक्षा बैठक के बाद पत्रकारों से बातचीत करते हुए उमर अब्दुल्ला ने कहा, 'एक मित्र और बड़े भाई के तौर पर मैं लद्दाख के नेताओं को सलाह दूंगा कि केंद्र सरकार की ओर से किए गए किसी भी वादे पर तब तक भरोसा न करें, जब तक वह लिखित रूप में और हस्ताक्षरित न हो।'

राज्य का दर्जा बहाल करने के आश्वासन का किया जिक्र

केंद्र सरकार की ओर से जम्मू-कश्मीर का राज्य का दर्जा बहाल करने के आश्वासन का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि जम्मू-कश्मीर के लोगों को भी चुनाव के बाद राज्य का दर्जा बहाल करने का मौखिक आश्वासन दिया गया था।

विधानसभा सत्र छोटा होने पर उठे सवाल, अध्यक्ष ने दिया 2017 का उदाहरण

उधर, जम्मू-कश्मीर विधानसभा के अध्यक्ष अब्दुल रहीम राथर ने आगामी विधानसभा सत्र की अवधि पर उठ रहे सवालों के बीच 2017 के विधानसभा सत्र का हवाला देते हुए कहा कि उस समय भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार के कार्यकाल में शरदकालीन सत्र केवल चार दिनों का हुआ था। उन्होंने कहा कि मौजूदा सत्र की सात बैठकें निर्धारित हैं और विधायी कामकाज की जरूरत के अनुसार इन्हें बढ़ाया भी जा सकता है।

नेता प्रतिपक्ष सुनील शर्मा की ओर से सत्र की कम अवधि पर जताई गई आपत्ति के जवाब में रहर ने विभिन्न भाजपा शासित राज्यों के हालिया मानसून सत्रों का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश में चार, दिल्ली में तीन, राजस्थान में दो, हरियाणा में तीन और मध्य प्रदेश में पांच बैठकें हुईं। गुजरात में तीन तथा छत्तीसगढ़, बिहार और झारखंड में पांच-पांच बैठकें आयोजित हुईं।