प्राइवेट अस्पतालों में अब नहीं होगा मुफ्त इलाज? आयुष्मान भारत योजना पर तकरार, CM उमर अब्दुल्ला को लिखा पत्र
जम्मू-कश्मीर में आयुष्मान भारत योजना के तहत निजी अस्पतालों ने मरीजों का मुफ्त इलाज बंद करने की धमकी दी है। निजी अस्पतालों का कहना है कि उन्हें पिछले 10 महीनों से भुगतान नहीं मिला है। उन्होंने मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला को पत्र लिखकर योजना के बजट को बढ़ाने और भुगतान करने की मांग की है। भुगतान नहीं होने पर इलाज नहीं करेंगे।

रोहित जंडियाल, जम्मू। आयुष्मान भारत, प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना पर जम्मू-कश्मीर में फिर से तकरार शुरू हो गई है। अभी तक निजी अस्पतालों को करोड़ों रुपयों का भुगतान न होने के कारण वह खफा है। उन्होंने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर अपनी नाराजगी जताई है और मांग की है कि इस योजना को बजट 589 कराेड़ से बढ़ाकर 900 करोड़ किया जाए। उनका भुगतान किया जाए। ऐसा न करने पर वे अपना कांट्रेक्ट आगे नहीं बढ़ाएंगे।
कुछ महीने पहले भी कुछ दिनों तक निजी अस्पतालों ने सेहत योजना के तहत मरीजों का इलाज बंद कर दिया था। मुख्य सचिव सहित संबंधित अधिकारियों ने हस्तक्षेप कर सभी भुगतान करने के निर्देश दिए थे। लेकिन अब एक बार फिर से पहली जैसी स्थिति आ गई है।
जम्मू-कश्मीर प्राइवेट हॉस्पिटल्स और डायलिसिस सेंटर एसोसिएशन ने आयुष्मान भारत योजना की स्थिरता को लेकर गंभीर चिंता जताई है और तत्काल सुधार नहीं किए जाने पर मरीजों का मुफ्त इलाज बंद करने की धमकी दी है। इस बारे में उन्होंने पहले स्टेट हेल्थ एजेंसी के सीईओ को पत्र लिखा, अब मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के नाम लिखे पत्र में एसोसिएशन ने समय पर भुगतान न होने पर चिंता जताई।
'पिछले 10 महीने से हम पीड़ित हैं'
एसोसिएशन ने कहा कि वे व्यापक विचार-विमर्श के बाद इस निष्कर्ष पर पहुंचे हैं कि राज्य स्वास्थ्य एजेंसी के साथ अनुबंध 15 मार्च 2025 को समाप्त होने वाला है। यह अब व्यवहार्य नहीं है।
उन्होंने कहा कि राज्य स्वास्थ्य एजेंसी की 9वीं गवर्निंग काउंसिल की बैठक 19 जनवरी 2025 को आयोजित की गई थी जिसमें कुछ महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए थे लेकिन ये सभी निर्णय हमारे हित में नहीं हैं। निजी क्षेत्र विरोधी हैं और निश्चित रूप से हमें दिवालियापन के कगार पर ले जाएंगे। उन्होंने कहा कि पिछले 10 महीनों से हम पीड़ित हैं।
योजना को जारी रखना संभव नहीं
एसोसिएशन ने कहा कि गवर्निंग काउंसिल की बैठक में हमारे लंबे समय से लंबित भुगतानों को जारी करने पर कुछ फैसला नहीं हुआ। प्रावधान है कि विलंबित भुगतानों के लिए एक प्रतिशत ब्याज अतिरिक्त दिया जाए लेकिन ऐसा अभी तक नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि घटती दरों पर खर्चों को पूरा करना और विलंबित भुगतान के साथ योजना को जारी रखना संभव नहीं है।
पत्र में कहा गया है हम इन घटती दरों पर बढ़ती लागत को वहन करने में असमर्थ हैं। उन्होंने यह भी कहा कि केंद्र सरकार द्वारा हाल ही में आयुष्मान भारत योजना के लिए बजट को 24 प्रतिशत बढ़ाकर 9406 करोड़ करने के बावजूद उपचार पैकेजों में संशोधन नहीं हुए हैं।
उन्होंने पैकेजों की समीक्षा कर संशोधन करने और प्रदेश में बजट को बढ़ाने की भी मांग की। उन्होंने डायलिसेस के पैकेज विशेषरूप से बढ़ाने की मांग की।
मुख्यमंत्री से करेंगे मुलाकात
जम्मू-कश्मीर प्राइवेट हास्पिटल्स और डायलिसिस सेंटर एसोसिएशन के पदाधिकारी इस मुद्दे पर मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला भी इस सप्ताह मिल सकते हैं। एसोसिएशन का कहना है कि जम्मू-कश्मीर में योजना को सफल बनाने में निजी अस्पतालों की मुख्य भूमिका है।
ऐसे में अगर उनके साथ ही न्याय नहीं होगा तो योजना का क्या लाभ। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के साथ इस मुद्दे पर संपर्क किया गया है। उम्मीद है कि जल्दी ही इस मुद्दे पर मुलाकात होगी।
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