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जम्मू-कश्मीर: कोकरनाग में फिर दिखा सिंकहोल, ब्रिंगी नाले में दूसरी बार धंसी जमीन, 2022 की घटना से क्या है कनेक्शन?

Published: Mon, 28 Sep 2026 06:15 PM (IST)

दक्षिण कश्मीर के कोकरनाग में ब्रिंगी नाले में एक और सिंकहोल सामने आया है, जिसके बाद प्रशासन ने लोगों को ...और पढ़ें

HighLights

  1. कोकरनाग के ब्रिंगी नाले में नया सिंकहोल सामने आया।

  2. प्रशासन ने लोगों को सिंकहोल स्थल से दूर रहने की चेतावनी दी।

  3. विशेषज्ञ टीम नए सिंकहोल की वैज्ञानिक वजह की जांच करेगी।

राज्य ब्यूरो, श्रीनगर। दक्षिण कश्मीर के कोकरनाग में एक बार फिर सिंकहोल सामने आने से इलाके में चर्चा तेज हो गई है। गोहिहार्ड गांव में गत रविवार 27 सितंबर को सिंकहोल दिखाई देने के बाद प्रशासन ने लोगों से मौके से दूर रहने की अपील की है।

तहसीलदार कोकरनाग कार्यालय की ओर से जारी एडवाइजरी में कहा गया है कि जब तक जरूरी सुधारात्मक उपाय कर मौके को सुरक्षित घोषित नहीं किया जाता, तब तक लोग सिंकहोल के आसपास न जाएं और न ही वहां भीड़ लगाएं।

प्रशासन ने यह कदम लोगों की सुरक्षा के साथ-साथ संबंधित सरकारी एजेंसियों को बिना बाधा काम करने देने के लिए उठाया है।

ब्रिंगी नाले में दूसरा गड्ढा होने का दावा

इस पूरे घटनाक्रम ने इसलिए भी ध्यान खींचा है क्योंकि स्थानीय लोगों के मुताबिक ब्रिंगी नाले में यह दूसरा सिंकहोल सामने आया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह नया गड्ढा उस जगह से थोड़ा नीचे की ओर बना है, जहां पहले सिंकहोल की घटना हुई थी। फिलहाल प्रशासन की ओर से नए सिंकहोल की विस्तृत वैज्ञानिक वजह या पुराने सिंकहोल से इसके संबंध की पुष्टि नहीं की गई है।

कोकरनाग का ब्रिंगी क्षेत्र सिंकहोल की ऐसी घटना पहले भी देख चुका है। फरवरी 2022 में वांगम इलाके में ब्रिंगी नाले की मुख्य धारा में बड़ा सिंकहोल बना था और नाले का पानी उसमें समाने लगा था। उस समय प्रशासन ने विशेषज्ञों की टीम गठित की थी, जबकि लोगों को सिंकहोल के नजदीक जाने से रोका गया था।


बाद में एनआइटी श्रीनगर और अन्य विशेषज्ञों के अध्ययन में उस 2022 की घटना को चूना-पत्थर वाली भूगर्भीय संरचना से जुड़ी प्राकृतिक प्रक्रिया बताया गया। 2024 में प्रकाशित वैज्ञानिक अध्ययन के अनुसार उस समय बना सिंकहोल एक ‘जमीन धंसने से बना सिंकहोल’ था और भूमिगत गुफा-करास्ट संरचना के अध्ययन में इसकी भूमिका सामने आई। 

अध्ययन में यह भी पाया गया कि सिंकहोल में जाने वाले पानी का भूमिगत निकास करीब 16 किलोमीटर दूर अचबल की दिशा में था।

सिंकहोल बनने की विशेषज्ञ करेंगे जांच

प्रशासनिक अधिकारियों ने बताया कि 2022 में जिस भूगर्भीय प्रक्रिया की पहचान हुई थी, उसे सीधे 2026 की घटना का कारण मानना वैज्ञानिक रूप से सही नहीं होगा। नए सिंकहोल की वास्तविक वजह, उसकी गहराई और आसपास की जमीन पर संभावित प्रभाव का पता विशेषज्ञ जांच के बाद ही चलेगा। यही कारण है कि फिलहाल सबसे पहले लोगों की आवाजाही रोकने और संबंधित एजेंसियों को मौके पर काम करने का अवसर देने पर जोर दिया है।

आपको बता दें कि 2022 के अध्ययन ने इस क्षेत्र को करास्ट भू-आकृति वाला इलाका बताया था और सिंकहोल के जोखिम को समझने के लिए विस्तृत अध्ययन की जरूरत पर जोर दिया था।