कश्मीर: गुलमर्ग से उड़ी तक बनेगी नई सड़क, चमकेंगे बोनियार के अनदेखे नजारे; हपथ खाई किनारे बनेंगे टूरिस्ट हट्स
गुलमर्ग को उड़ी से जोड़ने के लिए एक नई सड़क बनाने की योजना है, जिससे सीमावर्ती इलाकों में पर्यटन को ...और पढ़ें

गुलमर्ग-उड़ी सड़क की डीपीआर तैयार। (फाइल फोटो)
HighLights
गुलमर्ग को उड़ी से जोड़ेगी नई सड़क, पर्यटन को बढ़ावा।
बोनियार के बनाली, त्रिकांजन से होकर गुजरेगा यह मार्ग।
सीमावर्ती क्षेत्रों में पर्यटन, रोजगार के नए अवसर खुलेंगे।
राज्य ब्यूरो, श्रीनगर। उत्तरी कश्मीर में पर्यटन की नई राह खोलने की तैयारी है। विश्व प्रसिद्ध पर्यटन स्थल गुलमर्ग को सीमावर्ती उड़ी से जोड़ने के लिए एक नई सड़क बनाने की योजना सामने आई है। यह सड़क बोनियार के बनाली और त्रिकांजन जैसे इलाकों से होकर गुजरेगी। इससे न केवल नियंत्रण रेखा से सटे दूरदराज के गांवों तक पहुंच आसान होने की उम्मीद है बल्कि क्षेत्र के खूबसूरत प्राकृतिक नजारों, धार्मिक स्थलों और ऐतिहासिक जगहों को भी पर्यटन के बड़े नक्शे पर पहचान मिल सकती है।
यह जानकारी स्वयं उड़ी के विधायक डॉ. सज्जाद शफी ने दी। उन्होंने बताया कि प्रस्तावित सड़क का निर्माण सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) करेगा। इस परियोजना की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार कर ली गई है और अगले साल निर्माण कार्य शुरू होने की उम्मीद है।
विधायक ने बताया कि सड़क की लंबाई, अनुमानित लागत और निर्माण की निश्चित समयसीमा को लेकर अभी विस्तृत जानकारी अभी उनके सामने नहीं आई है।
गुलमर्ग से उड़ी-बोनियार तक पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा
गुलमर्ग पहले से ही अपनी बर्फीली वादियों और प्राकृतिक खूबसूरती के लिए देश-दुनिया में मशहूर है। वहीं, उड़ी और बोनियार का इलाका भी प्राकृतिक सौंदर्य, धार्मिक आस्था और ऐतिहासिक विरासत से समृद्ध है। प्रस्तावित सड़क इन दोनों क्षेत्रों के बीच संपर्क को बेहतर बनाने के साथ रास्ते में पड़ने वाले कम चर्चित स्थानों तक पर्यटकों की पहुंच आसान कर सकती है।
हपथ खाई नाले के किनारे बनेंगे टूरिस्ट हट्स
बनाली और त्रिकांजन जैसे इलाकों से गुजरने वाला यह मार्ग स्थानीय लोगों के लिए आवागमन को सुविधाजनक बनाने के साथ पर्यटन से जुड़े रोजगार के नए अवसर भी पैदा कर सकता है। विधायक ने यह भी कहा कि सरकार पर्यटकों के लिए ठहरने की सुविधा बेहतर बनाने के उद्देश्य से बोनियार में 'हपथ खाई नाले' के किनारे टूरिस्ट हट्स बनाने की योजना बना रही है।
यदि यह परियोजना लागू हो जाती है, तो इन प्रस्तावित हट्स से पर्यटकों को इस इलाके में ठहरने के अतिरिक्त विकल्प मिल सकेंगे और वे आसपास के प्राकृतिक आकर्षणों को भी देख सकेंगे।
मंदिरों से झरनों तक, इन जगहों को मिलेगी पहचान
डॉ. सज्जाद शफी ने उड़ी-बोनियार क्षेत्र में पर्यटन की संभावनाओं को रेखांकित करते हुए कई ऐसे स्थलों का उल्लेख किया, जिन्हें विकसित कर एक पर्यटन सर्किट का हिस्सा बनाया जा सकता है। इनमें पांडो मंदिर, छटी पादशाही गुरुद्वारा, कमान पोस्ट, बाबा फरीद की दरगाह, लिम्बर झरना और रुस्तम पीर बाबा प्रमुख हैं।
इन स्थानों की खासियत यह है कि यहां पर्यटकों को प्राकृतिक खूबसूरती के साथ धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व से जुड़े स्थल भी देखने को मिल सकते हैं। यदि इन जगहों तक बेहतर सड़क संपर्क, जरूरी सुविधाएं और व्यवस्थित प्रचार उपलब्ध कराया जाता है, तो पर्यटकों को स्थापित पर्यटन केंद्रों से आगे नए गंतव्यों की ओर आकर्षित किया जा सकता है।
