विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

3 दशक बाद भी क्यों अधर में कश्मीर की न्यू गांदरबल परियोजना? पर्यावरण मंजूरी पर फिर ब्रेक; लागत भी ₹645 करोड़ बढ़ी

Published: Sat, 26 Sep 2026 01:13 PM (IST)

कश्मीर की 93 मेगावाट न्यू गांदरबल जलविद्युत परियोजना तीन दशक बाद भी अधर में है, क्योंकि केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय ने ...और पढ़ें

कश्मीर के 93 MW न्यू गांदरबल प्रोजेक्ट पर पर्यावरण मंजूरी का पेंच। (फाइल फोटो)

कश्मीर के 93 MW न्यू गांदरबल प्रोजेक्ट पर पर्यावरण मंजूरी का पेंच। (फाइल फोटो)

HighLights

  1. न्यू गांदरबल परियोजना तीन दशक से अधर में, 93 मेगावाट क्षमता।

  2. केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय ने मंजूरी के विस्तार पर लगाई रोक।

  3. परियोजना की लागत में 645 करोड़ रुपये से अधिक की वृद्धि हुई।

नवीन नवाज, श्रीनगर। कश्मीर की बिजली जरूरतों को पूरा करने के उद्देश्य से प्रस्तावित 93 मेगावाट न्यू गंदरबल जलविद्युत परियोजना करीब तीन दशक बाद भी निर्माण की प्रतीक्षा में है। अब केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की विशेषज्ञ मूल्यांकन समिति ने परियोजना में हो रही देरी पर सवाल उठाते हुए जम्मू-कश्मीर पावर डेवलपमेंट कारपोरेशन से अद्यतन जानकारी के साथ नया प्रस्ताव जमा करने को कहा है। नए प्रस्ताव पर विचार होने तक पर्यावरण मंजूरी के विस्तार की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ाई गई है।

परियोजना की परिकल्पना वर्ष 1990 में पुराने गंदरबल बिजलीघर के विकल्प के रूप में की गई थी और बाद में इसे 93 मेगावाट की नई परियोजना के रूप में आगे बढ़ाया गया। सिंध नदी पर प्रस्तावित इस रन-अाफ-द-रिवर परियोजना में 31-31 मेगावाट की तीन इकाइयां स्थापित की जानी हैं। इसका उद्देश्य कश्मीर की स्थानीय जलविद्युत क्षमता का इस्तेमाल बढ़ाना और पुरानी उत्पादन व्यवस्था का विकल्प तैयार करना है।

परियोजना को 2013 में पर्यावरण मंजूरी मिली थी

परियोजना को सितंबर 2013 में पर्यावरण मंजूरी मिली थी, जिसकी वैधता सितंबर 2026 तक थी। जम्मू-कश्मीर पावर डेवलपमेंट कारपोरेशन ने इसे दो वर्ष और बढ़ाने का अनुरोध किया था। हालांकि विशेषज्ञ समिति ने पाया कि परियोजना स्थल पर अभी तक मुख्य निर्माण कार्य शुरू नहीं हुआ है।

समिति के आकलन के अनुसार, पर्यावरण प्रबंधन योजना को लागू करने में करीब चार वर्ष लग सकते हैं, जबकि मुख्य निर्माण कार्य पूरा करने के लिए लगभग 48 महीने की जरूरत होगी। ऐसे में सितंबर 2028 तक का प्रस्तावित विस्तार भी परियोजना को पूरा करने के लिए पर्याप्त नहीं माना गया।

इसी वजह से अधिकारियों से परियोजना की मौजूदा स्थिति, लागत, निर्माण कार्यक्रम और पर्यावरणीय पहलुओं को शामिल करते हुए नया प्रस्ताव मांगा गया है।

लागत में 645 करोड़ रुपये से अधिक की बढ़ोतरी

लंबी देरी का असर परियोजना की लागत पर भी पड़ा है। जनवरी 2014 में इसकी अनुमानित लागत 965.87 करोड़ रुपये थी, जो जनवरी 2021 तक बढ़कर 1,610.55 करोड़ रुपये हो गई। यानी सात वर्षों में अनुमानित लागत में करीब 645 करोड़ रुपये की वृद्धि हुई।

2019 में तत्कालीन राज्य प्रशासनिक परिषद ने हिंदुस्तान कंस्ट्रक्शन कंपनी को दिया गया 819 करोड़ रुपये से अधिक का ठेका रद्द किया था। कंपनी परियोजना को आगे बढ़ाने में सफल नहीं रही। इसके बाद निविदा प्रक्रिया दोबारा शुरू की गई। 2022 में तीसरे दौर की निविदा में हिंदुस्तान कंस्ट्रक्शन कंपनी और चौधरी पावर प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड के संयुक्त उपक्रम को सबसे कम बोलीदाता के रूप में चुना गया, लेकिन परियोजना अब तक निर्माण चरण में नहीं पहुंच सकी।

सालाना 38.28 करोड़ यूनिट बिजली की क्षमता

परियोजना पूरी होने के बाद हर वर्ष करीब 382.82 गीगावाट-घंटे, यानी लगभग 38.28 करोड़ यूनिट बिजली पैदा होने का अनुमान है। यह कश्मीर की बिजली व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण अतिरिक्त स्थानीय उत्पादन साबित हो सकता है और बिजली की कमी तथा बाहरी स्रोतों पर निर्भरता कम करने में योगदान दे सकता है।

हालांकि, न्यू गांदरबल परियोजना अभी चालू नहीं हुई है। इसलिए इससे अब तक कोई बिजली पैदा नहीं हुई और इसका वास्तविक संचालन एवं रखरखाव खर्च भी नहीं हुआ है। भविष्य के संचालन खर्च का अंतिम आंकड़ा परियोजना के पूरा होने, तकनीकी डिजाइन और संचालन व्यवस्था तय होने के बाद ही सामने आएगा।

पर्यावरण, जमीन और राजनीति की चुनौती

परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहण से चार गांवों के करीब 245 परिवार प्रभावित होते हैं। प्रभावित परिवारों को अधिग्रहीत भूमि का आंशिक मुआवजा दिया जा चुका है।

पर्यावरण मंजूरी के विस्तार पर रोक ने राजनीतिक बहस को भी जन्म दिया है। कांग्रेस विधायक निजामुद्दीन भट ने केंद्र के फैसले पर सवाल उठाते हुए कहा कि जम्मू-कश्मीर सरकार से इस मुद्दे पर सलाह ली जानी चाहिए थी। उन्होंने विधानसभा में सरकार से अपना पक्ष स्पष्ट करने की मांग की।

विधानसभा में गांदरबल परियोजना का जिक्र 

मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने भी गत शुक्रवार को जम्मू कश्मीर विधानसभा में स्टेटहुड का मुद्दा उठाते हुए गांदरबल परियोजना का जिक्र किया। उन्होंने कहा जब मैं पहले मुख्यमंत्री था तो मैने ही इस परियोजना को आगे बढ़ाया था, बाद में क्या हुआ, मुझे नहीं मालूम।

सीएम ने कहा कि अब भी मैं ही जम्मू कश्मीर में बिजली विभाग की जिम्मेदारी संभाल रहा हूं, लेकिन पावर डेवलपमेंट कॉरपोरेशन में क्या हो रहा है, यह परियोजना क्यों रुकी पड़ी है, यह मुझे नहीं मालूम, क्योंकि वह मेर अधिकार से बाहर रखी गई है।