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बदल जाएंगी उमर-फारूक अब्दुल्ला की पार्टी की नीतियां, अनुच्छेद 370 हटने के 7 साल बाद NC अपने संविधान में करेगी संशोधन

Published: Mon, 05 Oct 2026 08:38 PM (IST)

जम्मू-कश्मीर में संवैधानिक और प्रशासनिक बदलावों के बाद नेशनल कॉन्फ्रेंस अपने संविधान में संशोधन की तैयारी कर रही है।

नेशनल कॉन्फ्रेंस के संविधान में संशोधन की तैयारी।

नेशनल कॉन्फ्रेंस के संविधान में संशोधन की तैयारी।

HighLights

  1. नेशनल कॉन्फ्रेंस अपने संविधान में संशोधन की योजना बना रही है

  2. डॉ. फारूक अब्दुल्ला ने मसौदा तैयार होने की जानकारी दी

  3. यह संशोधन जम्मू-कश्मीर में आए संवैधानिक बदलावों के कारण

राज्य ब्यूरो, श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर में संवैधानिक और प्रशासनिक व्यवस्था में आए बदलाव का प्रभाव अब सत्ताधारी नेशनल कॉन्फ्रेंस पर भी दिखाई देने लगा है। पार्टी निकट भविष्य में अपने संविधान में संशोधन करने की योजना बना रही है। इस संशोधन का मसौदा तैयार किया जा चुका है और इसे कार्यकारी समिति में अनुमोदन के लिए प्रस्तुत किया जाएगा।

यह जानकारी नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. फारूक अब्दुल्ला ने सोमवार को पार्टी नेताओं की बैठक के बाद पत्रकारों से साझा की। उन्होंने जिला श्रीनगर से निर्वाचित पार्टी विधायकों और जिला पदाधिकारियों के साथ भी चर्चा की।

ज्ञातव्य है कि जम्मू कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम 2019 के तहत जम्मू कश्मीर राज्य को 31 अक्टूबर 2019 को दो केंद्र शासित प्रदेशों, जम्मू कश्मीर और लद्दाख में पुनर्गठित किया गया। केंद्र शासित जम्मू कश्मीर में विधानसभा भी है, जो अक्टूबर 2024 में बनी। जम्मू कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम के लागू होने से पहले, जम्मू कश्मीर राज्य को अनुच्छेद 370 के तहत विशेष अधिकार प्राप्त थे।

जम्मू कश्मीर का अपना संविधान और ध्वज था, और कोई भी केंद्रीय कानून तत्कालीन जम्मू कश्मीर विधानसभा के अनुमोदन के बिना लागू नहीं हो सकता था। पिछले सात वर्षों में जम्मू कश्मीर के राजनीतिक, सामाजिक, आर्थिक और प्रशासनिक विषयों में व्यापक बदलाव आया है।

डा. फारूक अब्दुल्ला ने कहा कि संगठनात्मक स्तर पर विभिन्न मुद्दों पर विचार-विमर्श किया गया है। कई मामलों में सुधार की आवश्यकता है ताकि संगठन के भीतर लोकतांत्रिक व्यवस्था को और मजबूत किया जा सके। उन्होंने बताया कि इसके लिए पार्टी संविधान में कुछ संशोधन की आवश्यकता है, और एक प्रभावी मसौदा तैयार किया गया है।

इस मसौदे को जल्द ही कार्यकारी समिति के समक्ष रखा जाएगा। समिति के अनुमोदन के बाद ही इसे लागू किया जाएगा। हालांकि, उन्होंने संगठनात्मक ढांचे और संविधान में लाए जा रहे संशोधनों के बारे में अन्य जानकारी साझा करने से इनकार किया।

यह उल्लेखनीय है कि जम्मू कश्मीर में वर्ष 1953 के पूर्व की संवैधानिक स्थिति, यानी ग्रेटर आटोनामी, नेशनल कॉन्फ्रेंस का प्रमुख राजनीतिक एजेंडा है, लेकिन पिछले सात वर्षों से वह राज्य के दर्जे की बहाली पर जोर दे रही है। हाल ही में संपन्न विधानसभा सत्र में भी इस मुद्दे को उठाया गया है।