राज्य ब्यूरो, श्रीनगर : घाटी में धारा 35ए के मुद्दे पर सियासत जारी है। सोमवार को महबूबा मुफ्ती ने पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी के नेताओं के साथ बैठक में अपनी रणनीति तय करते हुए सांसद मुजफ्फर हुसैन बेग को सर्वाेच्च न्यायालय में इसके संरक्षण के लिए पैरवी करने भेजा। पूर्व केंद्रीय मंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता प्रो. सैफुद्दीन सोज ने एक सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री राजनाथ सिंह से भेंटकर धारा 35ए के खिलाफ दायर याचिकाओं को वापस लेने का आग्रह किया।

पीडीपी के प्रवक्ता रफी अहमद मीर ने बताया कि सेंट्रल कश्मीर के पीडीपी नेताओं की पार्टी प्रमुख महबूबा मुफ्ती के निवास पर बैठक हुई। इसमें पार्टी उपाध्यक्ष अब्दुल रहमान वीरी और महासचिव गुलाम नबी लोन हंजूरा और श्रीनगर, गांदरबल और बड़गाम से संबंधित पार्टी के सभी विधायक और प्रमुख नेता व कार्यकर्ता शामिल हुए।

बैठक में धारा 35ए के मुद्दे से लेकर घाटी में निकाय और पंचायत चुनावों को लेकर विचार विमर्श किया गया। पीडीपी नेताओं ने सर्वसम्मति से तय किया कि धारा 35ए के संरक्षण के लिए सर्वाेच्च न्यायालय में इस मामले की मजबूती से पैरवी करने के अलावा आम लोगों को भी इस मुद्दे पर जोड़ने के लिए अभियान जारी रखा जाए। राज्य के सामाजिक और राजनीतिक परिदृश्य के मद्देनजर इसे संरक्षित बनाए रखने के लिए केंद्र सरकार से भी इस मुद्दे पर संवाद किया जाए। जिन लोगों ने याचिकाएं दायर की हैं, उन्हें वापस लेने के लिए प्रेरित किया जाए।

बैठक में लिए गए फैसलों के आधार पर पार्टी के वरिष्ठ नेता और सांसद मुजफ्फर हुसैन बेग सर्वोच्च न्यायालय में धारा 35ए के संरक्षण के लिए पैरवी करेंगे। वह देश के प्रतिष्ठित कानूनविद् और संविधान विशेषज्ञ हैं। उनके साथ वरिष्ठ एडवोकेट मुर्तजा खान, पूर्व कानून मंत्री अब्दुल हक खान, गुलाम नबी लोन हंजूरा और चौधरी जुल्फिकार भी दिल्ली में उनकी मदद के लिए मौजूद रहेंगे।

प्रो. सैफुद्दीन सोज ने धारा 35ए के संरक्षण पर जोर देते हुए कहा कि कश्मीर में नेशनल कांफ्रेंस, कांग्रेस, पीडीपी या अन्य कोई राजनीतिक दल इस मुद्दे पर कोई ठोस कदम उठाता नजर नहीं आ रहा है। सभी राजनीतिक दल इस संवैधानिक प्रावधान के संरक्षण के लिए नारा बुलंद कर रहे हैं, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं कर रहे। प्रो. सोज ने कहा कि कश्मीर में मुख्यधारा के सभी राजनीतिक दल प्रधानमंत्री और केंद्रीय गृहमंत्री से नई दिल्ली में मिले। यह प्रतिनिधिमंडल जोर दे रहे कि वह सर्वाेच्च न्यायालय में धारा 35ए के संरक्षण में केंद्र सरकार का पक्ष रखें। इसके खिलाफ भविष्य में किसी तरह की याचिकाओं पर हमेशा के लिए रोक लगाने की व्यवस्था करें। इस मुद्दे पर राज्य में हालात विस्फोटक होते जा रहे हैं, लेकिन केंद्र सरकार मूकदर्शक बनी हुई है, जो अनुचित है। केंद्र को हस्तक्षेप करते हुए धारा 35ए के संरक्षण को यकीनी बनाना चाहिए।

Posted By: Jagran