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न सरकार गिराने का इरादा, न नेशनल कॉन्फ्रेंस तोड़ने की कोशिश; सांसद रुहुल्लाह ने बताया अपना सियासी एजेंडा

Published: Wed, 21 Oct 2026 07:54 PM (IST)

श्रीनगर सांसद आगा सैयद रुहुल्लाह मेहदी ने 3 नवंबर को अपने फैसले के बाद जनता के बीच जाने और समान सोच वाले लोगों से जुड़ने की बात कही है।

सांसद रुहुल्लाह मेहदी ने बताया सियासी एजेंडा।

सांसद रुहुल्लाह मेहदी ने बताया सियासी एजेंडा।

HighLights

  1. 3 नवंबर को रुहुल्लाह मेहदी करेंगे राजनीतिक भविष्य का एलान

  2. नेकां के विशेष दर्जे पर रुख से जताई गहरी असहमति

  3. जम्मू-कश्मीर के अधिकारों हेतु समान सोच वाले लोग तलाशेंगे

राज्य ब्यूरो, श्रीनगर। नेशनल कॉन्फ्रेंस (नेकां) से अलग होने की तैयारी कर रहे श्रीनगर के सांसद आगा सैयद रुहुल्लाह मेहदी ने कहा कि 3 नवंबर को अपने फैसले के बाद वह जनता के बीच जाएंगे और समान राजनीतिक सोच रखने वाले लोगों से बातचीत करेंगे। उन्हें ऐसे लोगों की जरूरत है जिनके पास सिद्धांत और चरित्र हो तथा जो जम्मू-कश्मीर के अधिकारों के लिए जिम्मेदारी उठाने को तैयार हों।

उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी तलाश केवल विधायकों, मंत्रियों या स्थापित नेताओं तक सीमित नहीं है। खेतों में काम करने वाले लोगों से लेकर विद्यार्थियों, डॉक्टरों, कारोबारियों और जेल में बंद लोगों तक, समान विचार रखने वाला कोई भी व्यक्ति इस संघर्ष का हिस्सा बन सकता है।

रुहुल्लाह के असंतोष की मुख्य वजह अगस्त 2019 में जम्मू-कश्मीर के विशेष संवैधानिक दर्जे से जुड़े फैसलों को चुनौती देने के मुद्दे पर नेशनल कॉन्फ्रेंस का रुख है। उनका कहना है कि पार्टी ने चुनावों में जनता से इन फैसलों के खिलाफ संघर्ष करने का वादा किया था, लेकिन सत्ता में आने के बाद उसका जोर राज्य का दर्जा बहाल कराने पर केंद्रित हो गया।

विधानसभा में विशेष दर्जे से संबंधित प्रस्ताव और बाद में राज्य के दर्जे पर दिए गए जोर का जिक्र करते हुए उन्होंने सवाल उठाया कि यदि पहले प्रस्ताव का उद्देश्य संवैधानिक अधिकारों की बहाली था, तो दूसरा प्रस्ताव लाने की जरूरत क्यों पड़ी? उनके अनुसार, मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला की सफाई से यह स्पष्ट हुआ कि प्रस्ताव का उद्देश्य राज्य का दर्जा मांगना था। रुहुल्लाह ने कहा कि इससे 5 अगस्त 2019 से पहले की संवैधानिक स्थिति बहाल करने की मांग कमजोर हुई है।

उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि प्रस्ताव पारित होने के बाद जनता के बीच इस मुद्दे पर भरोसा और चर्चा क्यों नहीं बनी। उनके मुताबिक, पार्टी के जमीनी कार्यकर्ताओं तक को सरकार के वास्तविक राजनीतिक रुख पर स्पष्टता नहीं है।

उमर सरकार गिराना मकसद नहीं

28 विधायकों के संपर्क में होने और मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर नाराज नेताओं को साथ लाने की अटकलों पर रुहुल्लाह ने कहा कि वह न सरकार गिराना चाहते हैं, न नेशनल कॉन्फ्रेंस को तोड़ना चाहते हैं।

उन्होंने मंत्री पद नहीं मिलने से नाराज विधायकों को जोड़ने की कोशिश से भी इनकार किया। उन्होंने कहा कि यदि कोई विधायक नैतिकता और विचारधारा के आधार पर नेतृत्व से सवाल करता है, तो वह अलग बात है; लेकिन मंत्री पद की नाराजगी पर राजनीति करना उन्हें मंजूर नहीं।

उन्होंने उमर अब्दुल्ला से मंत्रिमंडल विस्तार में देरी पर भी सवाल किया और कहा कि मुख्यमंत्री को उनके फैसले से डरने की जरूरत नहीं है। रुहुल्लाह के अनुसार, सरकार के दो साल पूरे होने के बावजूद मंत्रिमंडल का विस्तार न होना विधायकों की नाराजगी और राजनीतिक अस्थिरता की आशंकाओं को बढ़ाता है।

3 नवंबर की तारीख क्यों चुनी

रुहुल्लाह ने बताया कि 3 नवंबर उनके पिता की बरसी है। पिता की मृत्यु ने उनके जीवन की दिशा बदली और उन्हें नई जिम्मेदारियों का एहसास कराया। दो दशक से अधिक के राजनीतिक सफर के बाद वह इसे एक अहम मोड़ मानते हैं। उन्होंने सांसद स्थानीय क्षेत्र विकास योजना सहित संसदीय जिम्मेदारियों को पूरा करने और जरूरी विचार-विमर्श के लिए भी समय लेने की बात कही।

पूर्व मुख्यमंत्री गुलाम नबी आजाद की पार्टी के अनुभव से जुड़े सवाल पर रुहुल्लाह ने कहा कि उनके राजनीतिक उद्देश्य अलग हैं। उन्होंने आजाद पर 2019 के फैसलों को स्वीकार करने वाली राजनीति करने का आरोप लगाया, जबकि उनका अपना लक्ष्य उन फैसलों को चुनौती देना है।