क्या बदल रहा है मीरवाइज का रुख? जिस मिंबर से कभी गूंजते थे आजादी के नारे, वहीं से माना कश्मीर में बदले हालात
मीरवाइज मौलवी उमर फारूक ने श्रीनगर की जामा मस्जिद से कश्मीर में हिंसा में कमी का स्वागत किया है। उन्होंने ...और पढ़ें

मीरवाइज ने जामा मस्जिद के मिंबर से दिया शांति का संदेश।
HighLights
मीरवाइज ने कश्मीर में हिंसा घटने को सकारात्मक बदलाव बताया।
राज्य का दर्जा बहाली, भारत-पाक वार्ता पर दिया जोर।
राजनीतिक बंदियों की रिहाई, UAPA समीक्षा की मांग की।
नवीन नवाज, श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर के प्रमुख इस्लामिक धर्मगुरु और हुर्रियत कान्फ्रेंस के चेयरमैन रहे मीरवाइज मौलवी उमर फारूक ने ऐतिहासिक जामा मस्जिद श्रीनगर के मिंबर से कश्मीर में हिंसा और विरोध-प्रदर्शनों में आई कमी का स्वागत किया है। कभी इसी मिंबर से आजादी के नारे बुलंद करने वाले मीरवाइज ने अब शांति को स्वीकार करते हुए कहा कि हिंसा में कमी निश्चित रूप से सकारात्मक बदलाव है।
शुक्रवार की नमाज के अवसर पर लोगों को संबोधित करते हुए उन्होंने जम्मू-कश्मीर का राज्य का दर्जा बहाल करने, निर्वाचित सरकार को वास्तविक अधिकार देने, कठोर कानूनों की समीक्षा करने तथा भारत-पाकिस्तान के बीच बातचीत शुरू करने पर जोर दिया।
कश्मीर में हिंसा घटी, पर लोगों की शिकायतें अब भी बाकी
मीरवाइज ने नमाजियों को संबोधित करते हुए इंटरनेशनल क्राइसिस ग्रुप की जम्मू-कश्मीर पर जारी रिपोर्ट का हवाला दिया। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में आतंकवाद, पत्थरबाजी और सड़कों पर होने वाले विरोध-प्रदर्शनों में कमी आई है।
दशकों तक हिंसा और पीड़ा झेल चुके कश्मीरी लोगों से बेहतर शांति का महत्व कोई नहीं समझ सकता। हालांकि, हिंसा में कमी का अर्थ यह नहीं है कि राजनीतिक समस्याओं और लोगों की शिकायतों का समाधान हो गया है।
लंबी हिरासत और कानूनी प्रक्रिया पर उठाए सवाल
मीरवाइज ने कहा कि सुरक्षा आवश्यक है और लोगों की जान की रक्षा करना सरकार की जिम्मेदारी है। लेकिन केवल सुरक्षा उपाय उस समस्या का स्थायी समाधान नहीं दे सकते, जिसके राजनीतिक और मानवीय पहलू भी गहरे हैं। इसके लिए न्याय, मेल-मिलाप, नागरिक स्वतंत्रताओं की बहाली और जनता का विश्वास कायम करना आवश्यक है।
उन्होंने वर्ष 2019 से 2023 के बीच जम्मू-कश्मीर में यूएपीए के तहत 3,662 लोगों की गिरफ्तारी और केवल 23 मामलों में दोषसिद्धि का हवाला देते हुए लंबी हिरासत तथा कानूनी प्रक्रिया पर सवाल उठाए। उन्होंने यासीन मलिक, शब्बीर अहमद शाह, आसिया अंद्राबी, मसर्रत आलम और अन्य अलगााववादी राजनीतिक कैदियों की रिहाई तथा उनके मामलों की समीक्षा की मांग भी दोहराई।
टकराव नहीं, संवाद से निकलेगा कश्मीर समस्या का रास्ता
उन्होंने रिपोर्ट के हवाले से राजनीतिक और नागरिक गतिविधियों पर प्रतिबंध, स्वतंत्र पत्रकारिता पर पाबंदियों तथा शांतिपूर्ण अभिव्यक्ति के सीमित होते अवसरों पर भी चिंता जताई और कहा कहा कि यदि हालात में सुधार हुआ है तो प्रतिबंधों में ढील देने की दिशा में कदम उठाए जाने चाहिए।
मीरवाइज के अनुसार, कश्मीर मुद्दे का समाधान केवल सुरक्षा उपायों से नहीं, बल्कि सार्थक राजनीतिक बातचीत और मेल-मिलाप से ही संभव है। उन्होंने कहा कि टकराव के बजाय संवाद ही आगे बढ़ने का जिम्मेदार रास्ता है।
क्या बोले रमीज मखदूमी?
कश्मीर मामलों के जानकार, रमीज मखदूमी ने कहा कि मीरवाइज मौलवी उमर फारुक ने आज नमाज ए जुम्मासे पूर्व जामा मस्जिद में जो खुतबा दिया है, वह एक बड़े बदलाव की पुष्टि है। उन्होंने सीधे तौर पर जम्मू कश्मीर के हालात में सुधार को स्वीकारा है और वह भी उसी जामा मस्जिद के मिंबर से जहां बैठ वह आजादी का नारा देेते थे।
उन्होंने यह बात 31 अक्टूबर 2026 को कही, जो केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर की आठवीं वर्षगांठ है। इस दिन जम्मू-कश्मीर में एकता दिवस मनाया जा रहा है, से एक दिन पहले कही है।
इससे पता चलता है कि वह अब आम लोगों को अपने अनुयायियों को इस यथार्थ को स्वीकार करने को कह रहे हैं। रही बात पकािसतान से बातचीत, या राजनीतिक बंदियों की रिहाई वह तो एक विशुद्ध राजनीतिक मुद्दा है,जिसे अन्य दल भी उठाते हैं ।
