दिल्ली की ऐतिहासिक रेस कोर्स मस्जिद को नोटिस पर भड़के मीरवाइज, पूछा- क्या वक्फ की सुरक्षा में नाकाम हैं अधिकारी?
दिल्ली की ऐतिहासिक रेस कोर्स मस्जिद को खाली करने के कथित नोटिस पर मीरवाइज उमर फारूक और आगा सैयद हसन ने गंभीर चिंता जताई है।

मीरवाइज उमर फारूक (फाइल फोटो)
HighLights
दिल्ली की रेस कोर्स मस्जिद को बेदखली नोटिस।
मीरवाइज और आगा ने वक्फ अधिकारियों पर उठाए सवाल।
धार्मिक संपत्तियों की सुरक्षा और वक्फ स्वायत्तता की मांग।
राज्य ब्यूरो, श्रीनगर। कश्मीर के मीरवाइज डॉ. मौलवी मोहम्मद उमर फारूक और अंजुमन-ए-शरी-ए-शियान के अध्यक्ष, आगा सैयद हसन मौसवी अल-सफावी ने नई दिल्ली की ऐतिहासिक रेस कोर्स मस्जिद को छह दिन में खाली करने के कथित नोटिस पर गंभीर चिंता जताई है। दोनों ने सवाल उठाया कि कानूनी रूप से मान्यता प्राप्त मस्जिद को बचाने में वक्फ अधिकारी नाकाम क्यों नजर आ रहे हैं।
इंटरनेट मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर एक पोस्ट में मीरवाइज ने कहा कि यह मस्जिद 1977 से अधिसूचित वक्फ संपत्ति है और एक सूचीबद्ध विरासत स्थल भी है। इसके बावजूद बेदखली की कार्रवाई की खबरें धार्मिक संपत्तियों की सुरक्षा पर सवाल खड़े करती हैं।
मीरवाइज ने पूछा कि क्या मुस्लिम इबादतगाहों के लिए यही नया सामान्य नियम बनता जा रहा है? उन्होंने वक्फ संशोधनों और मुस्लिम धार्मिक संपत्तियों पर सरकार का नियंत्रण बढ़ाने के लिए नियुक्त नामित सदस्यों की भूमिका का विरोध दोहराया।
संपत्तियों की सुरक्षा पर खड़े किए सवाल
उन्होंने चेताया कि यदि ऐसी मस्जिद भी सुरक्षित नहीं है, तो दूसरी धार्मिक संपत्तियों की सुरक्षा की क्या गारंटी है? यह मामला वक्फ संस्थाओं की स्वायत्तता, जवाबदेही और धार्मिक संपत्तियों में मनमाने हस्तक्षेप से बचाव पर बहस को फिर तेज करता है।
वहीं अंजुमन-ए-शरी-ए-शियान के अध्यक्ष, आगा सैयद हसन मौसवी अल-सफावी ने भी जोर देकर कहा कि वक्फ संपत्तियां धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व वाली पवित्र धरोहर हैं, और इनमें किसी भी तरह के मनमाने हस्तक्षेप से इनकी रक्षा की जानी चाहिए।
उन्होंने संबंधित अधिकारियों से आग्रह किया कि वे इस मामले की समीक्षा करें, उचित कानूनी प्रक्रिया का पालन सुनिश्चित करें और मस्जिद की सुरक्षा के लिए प्रभावी कदम उठाएं।
आगा हसन ने वक्फ संस्थानों की स्वायत्तता बनाए रखने की आवश्यकता पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि धार्मिक संपत्तियों की सुरक्षा कानून के शासन, निष्पक्षता और संस्थागत जवाबदेही के माध्यम से की जानी चाहिए।
