जम्मू, राज्य ब्यूरो। जम्मू कश्मीर में अनुच्छेद 370 हटने के बाद कश्मीर में लगातार सुधर रहे हालात से आतंकवादी हताश हैं। अपनी जमीन खोती देख आतंकी अब दुकानदारों को धमकाने पर उतर आए हैं, लेकिन यहां भी उन्हें मुंह की खानी पड़ रही है। बड़ी बात यह है कि आतंकी ग्रामीण इलाकों में भी धमकी भरे पोस्टर और टेप लगाकर दुकानों को सील कर लोगों को डरा रहे हैं।

दरअसल, सीमा पार से आतंकियों पर दबाव है कि वह कश्मीर में हालात सामान्य होने से रोकें। उनसे कहा गया है कि इसके लिए वह जो भी कर सकते हैं करें। इस हाल में अपनी वजूद तलाश रहे आतंकी धमकी भरे पोस्टर लगा रहे हैं। यहां तक कि हथियारों से लैस होकर कश्मीर के कुछ इलाकों में दुकानदारों को दुकानें बंद रखने के लिए डरा धमका रहे हैं। यहां तक कि वह कुछ जगहों पर दुकानों और व्यापारिक प्रतिष्ठानों के शटरों को सील करने के लिए टेप का इस्तेमाल कर रहे हैं। अधिकारिक तौर पर पुलिस या प्रशासन इस मुद्दे पर चुप है, लेकिन कश्मीर में सामान्य हो रहे हालात को खराब करने के लिए आतंकवादी सक्रिय हैं। कश्मीर घाटी के विभिन्न इलाकों में आतंकियों द्वारा दुकानों, व्यापारिक प्रतिष्ठानों, मस्जिदों के बाहर दीवारों या शटरों पर हाथों से लिखे हुए और टाइप किए गए पोस्टर लगाकर लोगों को डराने का काम कुछ दिन से जारी है।

दक्षिण कश्मीर के कुलगाम जिले के मोडरीगाम गांव में हाल ही में दो दुकानों के शटरों पर आतंकी संगठन हिजबुल मुजाहिदीन की सील टेप लगाई गई। इससे लोगों में दहशत का माहौल व्याप्त हो गया। श्रीनगर के सिविल लाइन इलाके में कर्ण मार्केट में दो दुकानों के बाहर एलडब्ल्यू लिखा गया। इसका अर्थ लास्ट वार्निंग निकाला गया। ऐसी चेतावनी भरे पोस्टरों के जरिए धमकाया जा रहा है।

एक दुकानदार ने कहा कि हम दुकानें खोलना चाहते हैं, लेकिन हमारी घर पहुंचने की सुरक्षा की जिम्मेदारी कौन देगा। अपनी पहचान न बताते हुए एक दुकानदार ने कहा कि हमने पुलिस से बात की थी, लेकिन कोई हल नहीं निकला है। मध्य कश्मीर के गांदरबल और श्रीनगर के डाउन टाउन फतेहकदल क्षेत्र में आतंकी संगठन अल बदर की पोस्टरों में लोगों को पुलिस परिवारों का सामाजिक रूप से बहिष्कार करें।

सड़कों पर बढ़ रही वाहनों की संख्या

कश्मीर में हालात सामान्य हो रहे हैं। बुधवार को श्रीनगर में बड़ी संख्या में सड़कों पर गाडिय़ां दौड़ीं। हालांकि अधिकतर दुकानें और व्यापारिक प्रतिष्ठान बंद रहे, लेकिन सड़कों के किनारे रेहड़ी फड़ी वालों ने अपनी दिहाड़ी लगाई। वहीं, बहुत कम विद्यार्थी ही स्कूलों में पहुंच रहे हैं। पांच अगस्त को जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद से कश्मीर में जनजीवन प्रभावित है। कश्मीर के संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा के कड़े प्रबंध किए गए है। कश्मीर में सरकारी कार्यालय तो खुल रहे हैं, लेकिन कर्मियों की उपस्थिति कम है। मुख्य शहरों व जिलों में हालात सामान्य हो रहे हैं। बुधवार को बड़ी संख्या में लोग निजी वाहनों से घरों से निकलते नजर आए। राज्य सरकार के हाई स्कूल तक के शिक्षण संस्थानों को खोलने के प्रयास सफल नहीं हो पा रहे हैं। लैंडलाइन फोन सेवा को कश्मीर में बहाल किया जा चुका है और अधिकतर इलाकों में मोबाइल फोन भी चल रहे हैं।

कश्मीर में धमकाने वालों के खिलाफ होगी कार्रवाई

राज्य पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) दिलबाग सिंह ने कहा कि कश्मीर में आम नागरिकों को धमकाने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। कश्मीर में सुरक्षा व्यवस्था को कड़ा करने के साथ लोगों में विश्वास बहाली के लिए प्रभावी कदम उठाए गए हैं। जम्मू में नशा मुक्ति केंद्र में आयोजित एक कार्यक्रम के बाद डीजीपी ने कहा कि कुछ महीनों से लोगों को मिल रही धमकियों से पुलिस परिचित है। कई आतंकियों को मार गिराया गया है। दो दर्जन से अधिक आतंकियों व उनके समर्थकों को गिरफ्तार किया गया है। कश्मीर के लोग पाकिस्तान के दुष्प्रचार के बहकावे में नहीं आ रहे हैं। डीजीपी ने कहा कि हम लोगों के साथ हैं और लोग हमारे साथ। लोगों को नुकसान पहुंचाने की कोशिश को नाकाम बनाया जाएगा। दुकानदारों, बागवानों को धमकाने और उत्तरी कश्मीर के बारामुला में कार जलाए जाने की घटना के बारे में पूछे जाने पर डीजीपी ने कहा कि जो नागरिकों को धमका रहे हैं, उनकी पहचान की जा रही है। हमने सोपोर से आठ लोगों को गिरफ्तार किया है, जो लोगों को धमकाने वाले पोस्टरों को प्रिंट और चिपका रहे थे। आधा दर्जन लोग श्रीनगर और आधा दर्जन लोगों को दक्षिण कश्मीर से पकड़ा गया है।

घुसपैठ की फिराक में आतंकी

डीजीपी ने कहा कि पाकिस्तान आतंकियों को लांचिंग पैड पर लाया है और घुसपैठ कराने की कोशिश में है, लेकिन हमारा आतंकवाद विरोधी तंत्र दुश्मन के इरादों को विफल बना देगा। 

Posted By: Rahul Sharma

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