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राज्य ब्यूरो, श्रीनगर : आतंकियों ने शनिवार को उत्तरी कश्मीर के सोपोर में छुट्टी पर घर आए एक निहत्थे सैन्यकर्मी की सरेआम गोली मारकर हत्या कर दी। सुरक्षाबलों ने वारदात में शामिल आतंकियों को पकड़ने के लिए पूरे इलाके की घेराबंदी करते हुए तलाशी अभियान चला रखा है। देर रात तक किसी आतंकी संगठन ने इस वारदात की जिम्मेदारी नहीं ली है, लेकिन इसे लश्कर व हिज्ब के संयुक्त हिट स्क्वायड दस्ते की करतूत माना जा रहा है।

मारे गए सैन्यकर्मी की पहचान मोहम्मद रफीक यत्तू के रूप में हुई है। सोपोर के वारपोरा का रहने वाला मोहम्मद रफीक मूलरूप से 17 जम्मू कश्मीर लाइट इंफैंट्री में तैनात था और बीते कुछ वर्षो से वह आतंकरोधी अभियानों में सक्रिय भूमिका निभा रही सेना की 52 आरआर में अपनी सेवाएं दे रहा था। वह करीब तीन दिन पहले ही अपने घर अवकाश पर आया था।

सूत्रों के अनुसार, शनिवार शाम करीब सवा पांच बजे रफीक यत्तू अपने घर से कुछ ही दूरी पर दोस्तों के साथ बातचीत कर रहा था कि अचानक वहां आतंकी आ गए। आतंकियों ने उसे बचाव का कोई मौका दिए बिना प्वाइंट ब्लैक रेंज से उसपर गोली चलाई। इसके बाद आतंकी वहां से भाग निकले। आतंकियों के जाने के बाद मोहम्मद रफीक को उसके परिजनों ने जिला अस्पताल सोपोर पहुंचाया, लेकिन उसने रास्ते में ही दम तोड़ दिया। एसएसपी सोपोर जावेद इकबाल ने वारदात की पुष्टि करते हुए बताया कि सुरक्षाबलों ने पूरे इलाके को घेरते हुए आतंकियों को पकड़ने के लिए तलाशी अभियान चला रखा है। बता दें कि करीब 15 दिन पहले वारपोरा में सुरक्षाबलों ने एक मुठभेड़ में दो आतंकियों को मार गिराया था। गत 22 फरवरी को भी इसी इलाके में सुरक्षाबलों के हाथों दो आतंक मारे गए थे। स्थानीय युवाओं के सेना में जाने से हताश हैं आतंकी :

घाटी में अक्सर आतंकी संगठन स्थानीय युवकों को सेना में भर्ती होने से रोकने के लिए उन्हें व उनके परिजनों को जान से मारने की धमकिया देते हैं। बावजूद इसके बड़ी संख्या में युवक उनकी धमकियों को ठेंगा दिखाकर सेना में भर्ती होते हैं। इससे हताश होकर आतंकी जब भी मौका मिलता है, छुट्टी पर घर आने वाले सैन्यकर्मियों को निशाना बनाते हैं। औरंगजेब, मुख्तार व फैयाज की भी इसी तरह की गई थी हत्या :

करीब आठ माह पहले 17 सितंबर 2018 को आतंकियों ने दक्षिण कश्मीर के शुरठ (कुलगाम) में सैन्यकर्मी मुख्तार अहमद की गोली मारकर हत्या कर दी थी। पिछले माह भी आतंकियों ने बड़गाम में एक सैन्यकर्मी को उसके घर से अगवा कर लिया था, लेकिन वह किसी तरह बच निकलने में कामयाब रहा था। पिछले वर्ष जून में भी ईद के दिन छुट्टी पर घर अपने घर पुंछ जा रहे सैन्यकर्मी औरंगजेब को आतंकियों ने अगवा कर मौत के घाट उतार दिया था। 13 मई 2017 को भी आतंकियों ने शोपिया में अपने ननिहाल में शादी में शरीक होने आए लेफ्टिनेंट उमर फैयाज को अगवा कर मार डाला था।

Posted By: Jagran

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