जम्मू, राज्य ब्यूरो। लद्दाख में आधुनिक हथियारों से लैस भारतीय सेना हाई अल्टीट्यूड वारफेयर में दक्ष होकर भविष्य की चुनौतियों का सामना करने के लिए तैयार है। पूर्वी लद्दाख में एकीकृत युद्धाभ्यास एक्स चांगथांग प्रहार से सेना ने चीन को यह संदेश दिया है।

चीन ने वास्तविक नियंत्रण रेखा के निकट अपना बुनियादी ढांचा काफी पहले विकसित कर लिया था। केंद्र में मोदी सरकार के गठन के बाद लद्दाख में सेना की जरूरतों को पूरा करने की मुहिम के तहत सेना सशक्त हो रही है। भारतीय वायुसेना ने भी चीन से लगती वास्तविक नियंत्रण रेखा तक मिनटों में सेना के टैंक व साजो सामान पहुंचाने के लिए एडवांस लैंडिंग ग्राउंड तैयार की है।

पूर्वी लद्दाख में बुधवार को सैन्य अभ्यास के दौरान सेना की सभी ब्रिगेडों ने अपनी मारक क्षमता दिखाई। इस दौरान हाल ही में सेना में शामिल किए टी-90 भीष्म टैंकों, आधुनिक हथियारों व उपकरणों का परीक्षण किया गया। यह कार्रवाई उस समय की गई, जब 15वें वित्त आयोग की टीम के साथ थलसेना अध्यक्ष जनरल बिपिन रावत भी लद्दाख में थे। ऐसे में लद्दाख में सेना की भावी जरूरतों के साथ बुनियादी ढांचे को मजबूत बनाने की जरूरतों का भी आंकलन किया गया।

वित्त आयोग की टीम के दौरे के आधार पर लद्दाख में सेना को और सशक्त बनाने की दिशा में काम होगा। सैन्य दृष्टि से अहम लद्दाख में कारगिल युद्ध के बाद सेना मजबूत हो रही है। सेना के बेड़े में बोफोर्स तोप के नाम से मशहूर 155 एमएम की एफएच-77 होवित्जर तोपों की जगह अब जल्द आधुनिक एम777 होवित्जर तोपें लेंगी।अगले साल ये तोपें लद्दाख पहुंच जाएंगी।

ये तोपें पुरानी तोपों से 41 फीसद हल्की हैं और इसे हेलीकॉप्टर से चोटियों पर पहुंचाया जा सकता है। लिहाजा माउंटेन वारफेयर में यह और भी कारगर साबित होगी। अमेरिकी निर्मित एम777 होवित्जर तोपों के साथ साउथ कोरिया की के-9 वज्र तोप को इस साल के अंत तक कारगिल में तैनात करने की तैयारी है। 

Posted By: Preeti jha

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