राज्य ब्यूरो, जम्मू : इस बार की अमरनाथ यात्रा कई मायनों में खास रहने वाली है। श्रद्धालुओं का जोश और सरकार की अभूतपूर्व तैयारियों को देखकर अंदाजा लगाया जा सकता है कि इस बार यात्रा के तमाम रिकार्ड ध्वस्त होने वाले हैं। 43 दिन की यात्रा में सरकार ने आठ लाख से अधिक श्रद्धालुओं के पहुंचने का अनुमान है और उसी लक्ष्य के अनुसार सुविधाएं जुटाई गई हैं। मौसम और अन्य चुनौतियों को ध्यान में रखकर व्यवस्था की गई है। पहला जत्था और साधुओं का काफिला 29 जून को जम्मू से रवाना होगा।

वर्ष 2011 और 2012 में अंतिम बार श्रद्धालुओं की संख्या छह लाख से अधिक रही थी। उसके बाद यह आंकड़ा तीन से चार लाख के बीच ही रहा। इस बार एक सप्ताह पूर्व तक तीन लाख से अधिक श्रद्धालु पंजीकरण करा चुके थे। देशभर में बैंकों की 446 शाखाओं में यह पंजीकरण किया जा रहा है। इसके अलावा बड़ी संख्या में श्रद्धालु तत्काल पंजीकरण कराते हैं और यह काउंटर भी मंगलवार को जम्मू में खुल जाएंगे। हेलीकाप्टर से यात्रा करने वाले श्रद्धालुओं के अलावा प्रतिदिन दोनों यात्रा मार्गों से दस-दस यात्रियों को जाने की अनुमति रहेगी। पहली बार देशभर के प्रमुख मठों को भी यात्रा का न्योता भेजा गया है और बड़ी संख्या में साधु जम्मू पहुंच चुके हैं। इंटरनेट मीडिया पर जोर शोर से प्रचार हो रहा है।

जम्मू कश्मीर के पुनर्गठन के बाद पहली बार हो रही अमरनाथ यात्रा को केंद्र एवं प्रदेश सरकार कुछ खास बनाना चाहती हैं। यही वजह है कि जम्मू कश्मीर के प्रवेशद्वार लखनपुर से कश्मीर तक श्रद्धालुओं के लिए अभूतपूर्व तैयारी की गई है। इतनी भारी संख्या में आ रहे श्रद्धालुओं के ठहरने से लेकर खानपान व चिकित्सा इंतजाम बड़े पैमाने पर पूरे कर लिए गए हैं।

2019 में बीच में रोकनी पड़ी थी यात्रा

वर्ष 2019 में जम्मू कश्मीर के पुनर्गठन से पूर्व सुरक्षा चिंताओं को देखते हुए यात्रा को बीच में ही रोकना पड़ा था। तब तक 3.42 लाख श्रद्धालु दर्शन कर चुके थे। उसके बाद दो वर्ष कोरोना के कारण यात्रा स्थगित रही।

यात्रा के जत्थे जम्मू से रवाना होंगे

अमरनाथ यात्रा के लिए श्रद्धालुओं के जत्थे जम्मू के भगवती नगर यात्री निवास से कड़ी सुरक्षा में रवाना होंगे। यात्री निवास में पांच हजार श्रद्धालुओं को ठहराने का प्रबंध है। जम्मू में 32 जगहों में 32 हजार श्रद्धालुओं को ठहराने और भोजन की व्यवस्था की है। रामबन जिले में चंद्रकोट यात्री निवास में आठ हजार श्रद्धालुओं को ठहराने की व्यवस्था है। श्रीनगर के पंथाचौक में तीन हजार श्रद्धालुओं के रुकने की व्यवस्था है। बालटाल और पहलगाम आधार शिविरों पर जोरदार तैयारी है।

कुछ खास बदलाव जो आएंगे रास

  • पहली बार श्रीनगर से श्रद्धालुओं के लिए हेलीकाप्टर सेवा शुरू की गई है। इससे यात्रा सुगम हो गई है और श्रद्धालु एक ही दिन में दर्शन कर लौट सकते हैं और आधार शिविरों पर दबाव भी कम होगा। पहले पहलगाम और बालटाल से यह सेवा उपलब्ध थी।
  • करीब बालटाल यात्रा मार्ग पर बालटाल से दोमेल तक करीब 2.75 किलोमीटर तक निशुल्क बैटरी कार व्यवस्था की गई है। इससे श्रद्धालुओं की राह आसान होगी।
  • हेलीकाप्टर से आने वाले श्रद्धालुओं को छोड़कर दोनों यात्रा मार्गों से प्रतिदिन दस-दस हजार श्रद्धालु ही शिवलिंग के दर्शन कर सकेंगे।

लंगर संगठनों ने भी की है खास तैयारी

देशभर से जुटने वाले श्रद्धालुओं के लिए लंगर संगठनों ने भी पर्याप्त प्रबंध कर रखे हैं। बाबा बर्फानी लंगर आर्गेनाइजेशन के सदस्य राजन गुप्ता का कहना है कि दो साल के बाद हो रही यात्रा के लिए इस बार अधिक यात्रियों के आने की उम्मीद हैं। बाबा बर्फानी के आशीर्वाद से लंगर के प्रबंध पर्याप्त है।

Edited By: Lokesh Chandra Mishra