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'लोकल ही ग्लोबल', पंकज त्रिपाठी का कश्मीरी कहानियों पर जोर; घाटी में शूटिंग की इच्छा और मेहमाननवाजी के हुए मुरीद

Published: Wed, 09 Sep 2026 04:54 PM (IST)Updated: Wed, 09 Sep 2026 05:08 PM (IST)

पंकज त्रिपाठी ने कहा कि कश्मीर में सिनेमा का विकास स्थानीय फिल्मनिर्माताओं को अपनी कहानियाँ कहने के लिए प्रोत्साहित करने पर निर्भर करता है।

HighLights

  1. स्थानीय फिल्मनिर्माताओं को कहानियाँ कहने के लिए प्रोत्साहित करें।

  2. क्षेत्रीय सिनेमा महत्वपूर्ण, 'लोकल ही ग्लोबल' का मंत्र।

  3. पंकज त्रिपाठी ने कश्मीर में शूटिंग की इच्छा जताई।

जागरण संवाददाता, श्रीनगर। बॉलीवुड अभिनेता पंकज त्रिपाठी ने कहा कि घाटी में सिनेमा का विकास न केवल फिल्मों की शूटिंग पर निर्भर करेगा, बल्कि लोकल फिल्मनिर्माताओं को अपनी कहानियां कहने के लिए प्रोत्साहित करने पर भी निर्भर करेगा।

उन्होंने कहा कि रिजनल सिनेमा जरूरी है। लोकल ही ग्लोबल है। मुझे विश्वास है कि यहां रिजनल सिनेमा बनेगा और इंफ्रास्ट्रक्चर भी बढ़ेगा। त्रिपाठी ने कहा कि हालांकि कश्मीर में कई फिल्में शूट हो रही हैं, लेकिन कश्मीरी फिल्ममेकर्स की कहानियां स्क्रीन पर एक अलग नजरिया लाएंगी।

उन्होंने कहा कि यहां बहुत सारी फिल्में शूट हो रही हैं, लेकिन अगर कोई कश्मीरी फिल्ममेकर अपनी कहानी पर फिल्म बनाता है, तो वह बहुत शानदार होगी। रिजनल सिनेमा में बहुत गुंजाइश है और मुझे यकीन है कि यहां के युवा इसे आगे ले जाएंगे।

यहां आकर कश्मीरियत और संस्कृति का अनुभव करेंगे

उन्होंने चल रहे फिल्म फेस्टिवल को एक अहम शुरुआत बताया, जो घाटी के फिल्मनिर्माताओं और देश-दुनिया के बाकी हिस्सों के फिल्म से जुड़े लोगों के बीच मजबूत संबंध बनाने में मदद कर सकता है। त्रिपाठी ने कहा कि यह फेस्टिवल आगे बढ़ने और संबंध बनाने की एक शुरुआत है। लोग आएंगे-जाएंगे और रिश्ते बनेंगे। वे यहां आएंगे और कश्मीरियत और संस्कृति का अनुभव करेंगे।

यह फेस्टिवल एक शुरुआत है और बाद में और भी फिल्मनिर्माता यहां आएंगे। अपने दोस्त और 'गुल्लक' के राइटर दुर्गेश सिंह का जिक्र करते हुए कहा कि जो अभी कश्मीर में हैं, अभिनेता ने कहा कि फिल्मनिर्माता पहले से ही इस क्षेत्र से जुड़ी कहानियों पर काम कर रहे हैं।

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कश्मीर की लोकल कहानियों पर जोर

उन्होंने कहा कि उन्होंने कश्मीर की लोकल कहानियों पर आधारित फिल्में और वेब सीरीज बनाई हैं। हालांकि, वे मुंबई से हैं, लेकिन उन्होंने कश्मीर में कहानी सेट की है। इसलिए यह साफ है कि लोग यहां कि कहानियों पर फिल्में बना रहे हैं।

त्रिपाठी ने कश्मीर में अपने अनुभव, विशेषकर वहां के खाने और मेहमाननवाजी के बारे में भी गर्मजोशी से बात की। उन्होंने कहा कि हमने कश्मीरी वजवान का आनंद लिया। हमें यह बहुत पसंद आया। हम कुछ लोकल लोगों से भी मिले और मुझे बहुत अच्छी मेहमाननवाजी का अनुभव हुआ। हम फिर आएंगे और चाहेंगे कि हमारी फिल्में कश्मीर में दिखाई जाएं।

घाटी में शूटिंग की जताई इच्छा

उन्होंने कहा कि फिल्म फेस्टिवल छात्रों और फिल्मनिर्माता बनने की चाह रखने वालों के लिए सीखने का एक अहम मौका भी देते हैं, जिससे उन्हें अनुभवी पेशेवरों से बातचीत करने और उनके अनुभवों से सीखने का अवसर मिलता है।

अभिनेता ने मौका मिलने पर घाटी में शूटिंग करने की इच्छा जताई। त्रिपाठी ने कहा कि जब भी मुझे मौका मिलेगा, मैं कश्मीर में शूटिंग करना पसंद करूंगा। यह भारत का एक खूबसूरत हिस्सा है। अगर सरकार हमारा साथ दे, तो हम कश्मीर की कहानियां दिखाना पसंद करेंगे।

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