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14,500 फीट की ऊंचाई पर गूंजा हर-हर महादेव, हरमुख की गोद में बसी गंगबल झील के लिए ऐतिहासिक यात्रा शुरू

Published: Fri, 18 Sep 2026 01:04 PM (IST)

LG मनोज सिन्हा ने कंगन के नारानाग से वार्षिक हरमुख-गंगबल यात्रा को हरी झंडी दिखा रवाना किया। यह यात्रा 14,500 ...और पढ़ें

HighLights

  1. उपराज्यपाल सिन्हा ने वार्षिक हरमुख-गंगबल यात्रा को हरी झंडी दिखाई

  2. 14,500 फीट ऊंचाई पर गंगबल झील तक 15 किमी ट्रेक

  3. कश्मीर की समृद्ध आध्यात्मिक-सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक यह यात्रा

राज्य ब्यूरो, श्रीनगर। कश्मीर की ऊंची पहाड़ियों में एक बार फिर आस्था और परंपरा का अनोखा संगम देखने को मिलेगा। शुक्रवार को उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने कंगन के नारानाग से वार्षिक हरमुख-गंगबल यात्रा को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।

सांसद मियां अल्ताफ अहमद, कंगन विधायक मेहर अली और पुलिस-प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी भी इस मौके पर मौजूद रहे।

नारानाग से निकलने के बाद श्रद्धालुओं का कारवां हरमुख पर्वत श्रृंखला की ऊंचाइयों की ओर बढ़ेगा। करीब 15 किलोमीटर का पहाड़ी ट्रेक तय कर भक्त गंगबल झील तक पहुंचेंगे। यह झील समुद्र तल से लगभग 14,500 फीट की ऊंचाई पर हरमुख पर्वत की तलहटी में स्थित है।

कश्मीर की पुरानी सांस्कृतिक परंपरा का हिस्सा है यह यात्रा

यात्रा सिर्फ धार्मिक आस्था नहीं, बल्कि कश्मीर की पुरानी सांस्कृतिक परंपरा का भी हिस्सा है। श्रद्धालु नारानाग मंदिर में छड़ी पूजा के बाद यात्रा शुरू करते हैं। गंगबल को कश्मीरी हिंदू परंपरा में बेहद पवित्र माना जाता है और इसे हरमुख गंगा के नाम से भी जाना जाता है।

ऐतिहासिक रूप से यहां धार्मिक अनुष्ठानों और पूर्वजों के कर्मकांड की परंपरा रही है।

उपराज्यपाल ने दी श्रद्धालुओं को शुभकामनाएं

उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने यात्रा में शामिल श्रद्धालुओं को शुभकामनाएं दीं और जम्मू-कश्मीर की समृद्ध आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित रखने के महत्व पर जोर दिया।

उन्होंने इस दौरान यात्रा के सुरक्षित और सुचारु संचालन के लिए प्रशासन तथा सुरक्षा एजेंसियों की व्यवस्थाओं का भी जायजा लिया। गंगबल का महत्व केवल धार्मिक नहीं, बल्कि कश्मीर की सांस्कृतिक स्मृति से भी जुड़ा है।

ऐतिहासिक रूप से यहां कश्मीरी हिंदू समुदाय द्वारा पूर्वजों के लिए श्राद्ध और अन्य धार्मिक अनुष्ठान किए जाते रहे हैं। लंबे अंतराल के बाद इस पारंपरिक यात्रा को 2009 में फिर से शुरू किया गया, जिसके बाद यह लगातार आयोजित होती रही है।

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