कौन हैं कुपवाड़ा की 'फ्लैग वुमन'? सेना के सहयोग से तिरंगे से लिख रहीं आत्मनिर्भरता की नई कहानी
कुपवाड़ा में भारतीय सेना के सहयोग से स्थापित फ्लैग सेंटर में 140 महिलाएं हाथ से राष्ट्रीय ध्वज बनाकर आत्मनिर्भर बन ...और पढ़ें

भारतीय सेना के सहयोग से 140 महिलाएं हाथ से राष्ट्रीय ध्वज तैयार कर रही हैं।
HighLights
कुपवाड़ा में 140 महिलाएं हाथ से तिरंगा बना रहीं।
भारतीय सेना के सहयोग से FLWOK समूह आत्मनिर्भर बना।
महिलाएं सरकारी ई-मार्केटप्लेस पर अपने उत्पाद बेच रहीं।
राज्य ब्यूरो, जम्मू। एलओसी के करीब कुपवाड़ा की सरजमीं पर कभी सुरक्षा चुनौतियों के बीच जिंदगी गुजारने वाली महिलाओं के हाथ अब तिरंगे में उम्मीद और आत्मनिर्भरता के रंग भर रहे हैं। भारतीय सेना के सहयोग से त्रेहगाम में स्थापित फ्लैग सेंटर में 140 महिलाएं हाथ से राष्ट्रीय ध्वज तैयार कर अपने परिवारों की आजीविका मजबूत कर रही हैं। इन महिलाओं का समूह अब कुपवाड़ा की फ्लैग वुमन (एफएलडब्लयूओके) के नाम से पहचान बना चुका है।
अप्रैल 2022 में कोापरेटिव सोसाइटी के रूप में शुरू हुई एफएलडब्लयूओके को सेना लगातार सहयोग और प्रोत्साहन दे रही है। सोसाइटी के कुपवाड़ा के विभिन्न हिस्सों में 12 स्किल डेवलपमेंट सेंटर संचालित हैं, जहां 140 महिलाओं को रोजगार मिला है। इन केंद्रों में तैयार होने वाले तिरंगे की खासियत इसकी बारीक हाथ की कारीगरी है।
महिलाओं द्वारा हाथ से सिला गया और क्रूएल-एम्ब्रॉयडरी से तैयार अशोक चक्र इन झंडों को बाजार में उपलब्ध सामान्य राष्ट्रीय ध्वजों से अलग पहचान देता है।
4,500 से अधिक तिरंगे तैयार कर वितरित किए
सेना के अनुसार, स्थापना के बाद से एफएलडब्लयूओके ने ‘हर घर तिरंगा’, स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस जैसे अभियानों के लिए अलग-अलग आकार के 4,500 से अधिक तिरंगे तैयार कर वितरित किए हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी भी ‘मन की बात’ में इन महिलाओं के प्रयास का उल्लेख कर चुके हैं।
अब इन महिलाओं के हुनर को बाजार भी मिल रहा है। उनके उत्पाद सरकारी ई-मार्केटप्लेस पर सूचीबद्ध हो चुके हैं। इससे देशभर से नए ऑर्डर मिलने की संभावनाएं बढ़ी हैं।
From the heart of Kupwara, Kashmiri women are stitching Tiranga with pride and baking their way to self-reliance!
— IndianArmy in Jammu & Kashmir (Fan Page) (@IndianArmyinJK) August 27, 2026
Flag Women of Kupwara (FLWOK)
This is a women-led cooperative society in Kupwara (including centres in Kunan Poshpora and nearby villages). Local women run… pic.twitter.com/xBg0Sr2oiI
त्रेहगाम केंद्र से करीब 30 परिवारों की रोजी-रोटी जुड़ी
सामाजिक कार्यकर्ता शेख जमशीद के मुताबिक, त्रेहगाम केंद्र से करीब 30 परिवारों की रोजी-रोटी जुड़ी है। उनका कहना है कि सेना सीमाओं की रक्षा के साथ महिलाओं को प्रशिक्षण, रोजगार और सुरक्षित मंच उपलब्ध कराने में भी आगे रही है।
मानवाधिकार कार्यकर्ता तौसीफ अहमद वार ने पहल की सराहना करते हुए इसे उत्तरी कश्मीर के अन्य क्षेत्रों तक पहुंचाने की जरूरत बताई। उनके मुताबिक, तिरंगा बनाने वाले इन हाथों को अगर व्यापक बाजार और प्रशिक्षण मिले तो सीमावर्ती इलाकों की सैकड़ों महिलाएं आत्मनिर्भर बन सकती हैं।
