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आजादी के 79 साल बाद भी जहां नहीं पहुंची थी रोशनी, अब जलेगा बल्ब; कुपवाड़ा के 29 गांवों में पहुंचेगी बिजली

Published: Fri, 09 Oct 2026 07:00 AM (IST)

कुपवाड़ा के 29 पहाड़ी गांवों के 1936 घरों को अक्टूबर 2027 तक बिजली मिलेगी, जिसके लिए सरकार ने 14.74 करोड़ ...और पढ़ें

कुपवाड़ा के 29 पहाड़ी गांवों के 1936 घरों के लिए सरकार ने खोला खजाना। (फाइल फोटो)

कुपवाड़ा के 29 पहाड़ी गांवों के 1936 घरों के लिए सरकार ने खोला खजाना। (फाइल फोटो)

HighLights

  1. कुपवाड़ा के 29 पहाड़ी गांवों में बिजली पहुंचाने की योजना।

  2. अक्टूबर 2027 तक 1936 घरों को मिलेगी बिजली।

  3. सरकार ने 14.74 करोड़ रुपये की राशि मंजूर की।

राज्य ब्यूरो, श्रीनगर। वर्ष 1947 को जब पूरा देश आजादी का जश्न मना रहा था, तब किसी ने सोचा भी नहीं था कि 79 साल बाद भी अपने ही जम्मू-कश्मीर के कुछ गांव ऐसे होंगे जहां शाम ढलते ही घना अंधेरा छा जाता है। जहां बच्चों को आज भी दिया और लालटेन की रोशनी में पढ़ना पड़ता है।

यह कहानी कुपवाड़ा के उन पहाड़ी बस्तियों-गांवों की जो नक्शे पर तो हैं, पर आज तक बिजली के नक्शे से बाहर थीं। पर अब इस लंबी रात के खत्म होने का समय आ गया है। सरकार ने यह बात खुद मानते हुए एक बड़ी राहत की खबर दी है।

कुपवाड़ा की उपेक्षित बस्तियों में बिजली पहुंचाने की तैयारी

सरकार ने बताया है कि बिजली की बड़ी योजना के तहत कुपवाड़ा की भुला दी गई बस्तियों को चुना गया है। योजना का नाम है आरडीएसएस। इसके लिए सरकार ने 14 करोड़ 74 लाख रुपये मंजूर किए हैं और काम करने की जिम्मेदारी स्नैजी इलेक्ट्रिकल एंड कॉन्ट्रैक्टर्स, मैसर्स खान ब्रदर्स, इम्तियाज कंस्ट्रक्शन्स एंड इलेक्ट्रिकल्स, मैसर्स अमन इलेक्ट्रिकल्स कुपवाड़ा को दी गई है। इसके अलावा कई परियोजनाएं ऐसी भी हैं, जो टेंडरिंग प्रक्रिया में हैं।

इस पूरे प्रोजेक्ट में सिर्फ दो-चार गांव नहीं बल्कि 13 इलाकों के 29 छोटे-छोटे पहाड़ी गांव शामिल हैं। जिनमें मोरी, मनिगाह, कुमकाडी, टंगधार, रिडे चौकीबल, वाववोरा, मचिल, केरन, हेहामा, कारूस, टीटवाल, सोगम, कादिराबाद, राशनपोरा, मील्याल, वारनौ, मैदानपोरा, गुंडिसना आदि शामिल हैं।

इन 29 बस्तियों के कुल 1936 घरों में अब बिजली का तार पहुंचेगा। सरकार ने कहा है कि इन सभी गांवों की नपाई और कागजी काम पूरा हो चुका है और अब बिजली के खंभे-तार और सामान खरीदने का काम चल रहा है।

कागज पर नहीं, जमीन पर भी काम शुरू

सबसे अच्छी बात यह है कि यह योजना सिर्फ कागजों में नहीं है। सरकार के अनुसार, सोगाम और कादिराबाद की 10 बस्तियों में काम शुरू भी हो गया है और अब तक करीब 86 लाख रुपये जमीन पर खर्च हो चुके हैं। बिजली विभाग ने भरोसा दिया है कि हर घर को अच्छी और लगातार बिजली दी जाएगी।

नई बस्तियों में लाइन पहुंचाने के साथ-साथ सरकार उन गांवों की पुरानी बिजली व्यवस्था को भी सुधार रही है जहां वोल्टेज कम रहती है या तार झूलते हैं। इसके लिए इस साल अलग से 14 बड़े काम हाथ में लिए गए हैं। ये काम यूटी कैपेक्स, जिला कैपेक्स, एसएसवाई और एसएएससीआइ योजना के पैसे से होंगे। इन सभी 14 कामों पर कुल मिलाकर 169 करोड़ 55 लाख रुपये खर्च होंगे।

इनमें नई बड़ी लाइनें बिछाना, कुपवाड़ा कस्बे में भीड़ वाली लाइनों का बोझ कम करना, चेक द्रुगमुला और कलारूस में नए बिजली घर बनाना और पुराने तारों को बदलना जैसे काम शामिल हैं।

बिजली विभाग के वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि इस साल कुपवाड़ा के लिए 3 करोड़ 68 लाख रुपये जारी किए गए हैं। बिल बनाने का काम चल रहा है, इसलिए कागज पर खर्च शून्य दिख रहा है, पर काम रुका नहीं है।

2027 तक बिजली से रोशन होंगी सभी 29 बस्तियां

सरकार ने दावा किया है कि हर पहाड़ी गांव के हिसाब से पूरी कार्य योजना बना ली गई है। हर काम पर नजर रखी जा रही है। अक्टूबर 2027 तक इन सभी 29 बस्तियों के सभी 1936 घरों में बिजली पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है।

दादा ने लालटेन में काटी जिंदगी

अब्दुल अजीज ने बताया कि आप खुद सोचिए जिस गांव ने आजादी के बाद से आज तक बल्ब की रोशनी नहीं देखी, वहां दो साल के अंदर हमारे बच्चे अपनी किताबें बल्ब की रोशनी में पढ़ेगे। यह सिर्फ एक सरकारी योजना नहीं, 1936 घरों में रहने वाले हजारों लोगों के लिए एक नया सवेरा होगा।

मोहम्मद फहीम ने बताया, 'मैंने अपनी पूरी उम्र लालटेन में काट दी। मेरे दादा ने भी इसी अंधेरे में उम्र गुजारी। हमने तो सोचा था कि हमारी बस्ती तक कभी बिजली आएगी ही नहीं। जब सुनते हैं कि सरकार ने 14 करोड़ मंजूर किया है और हमारे 29 गांवोंं तक तार आएगा, तो लगता है अब हमारे पोते-पोतियों को अंधेरे में नहीं पढ़ना पड़ेगा। 2027 तक का बोला है, बस अब काम रुके नहीं।'