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जम्मू से कश्मीर का सबसे छोटा रास्ता! 180-190 KM रह सकती है दूरी, कटड़ा-कुलगाम बनेगा नया 'शॉर्टकट'; जानें रूट

Published: Fri, 25 Sep 2026 03:10 PM (IST)

जम्मू-कश्मीर में 20 हजार करोड़ की कटड़ा-कुलगाम सड़क परियोजना की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार करने का काम शुरू हो ...और पढ़ें

कटड़ा-कुलगाम कॉरिडोर की DPR पर काम शुरू।  (फाइल फोटो)

कटड़ा-कुलगाम कॉरिडोर की DPR पर काम शुरू। (फाइल फोटो)

HighLights

  1. 20 हजार करोड़ की कटड़ा-कुलगाम परियोजना ने पकड़ी रफ्तार।

  2. जम्मू-श्रीनगर की सड़क दूरी घटकर 180-190 किमी होगी।

  3. महोर-कुलगाम को जोड़ेगी 7-8 किलोमीटर लंबी सुरंग।

राज्य ब्यूरो, श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर में सड़क कनेक्टिविटी को नई दिशा देने वाली कटड़ा-कुलगाम सड़क परियोजना ने अब अहम चरण में प्रवेश कर लिया है। करीब 20 हजार करोड़ रुपये की अनुमानित लागत वाली इस महत्वाकांक्षी परियोजना की डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार करने की प्रक्रिया चल रही है। परियोजना पूरी होने के बाद जम्मू से श्रीनगर के बीच सड़क दूरी घटकर करीब 180 से 190 किलोमीटर रह जाने की उम्मीद है। ऐसे में यह कॉरिडोर जम्मू से कश्मीर घाटी पहुंचने का सबसे छोटा सड़क मार्ग बन सकता है।

केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय से मंजूरी मिलने के बाद एनएचएआइ ने मई 2026 में डीपीआर तैयार करने के लिए कंसल्टेंसी फर्मों से निविदाएं आमंत्रित की थीं। जून 2026 में इसके तकनीकी बिड खोले गए। प्रस्तावित परियोजना में कटड़ा-रियासी-महोर-गुलाबगढ़-नंदीमार्ग-कुलगाम मार्ग को चार लेन में विकसित करने की योजना है।

एनएचएआइ के जम्मू प्रोजेक्ट डायरेक्टर राजीव कुमार के अनुसार, यह परियोजना मौजूदा कटड़ा-जम्मू-अमृतसर-दिल्ली एक्सप्रेसवे को श्रीनगर से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण विस्तार होगी। परियोजना के तहत रियासी-महोरे मार्ग को बेहतर बनाया जाएगा। करीब 7-8 किलोमीटर लंबी सुरंग महोरे और नंदीमार्ग के बीच प्रस्तावित है, जिसके जरिए कुलगाम तक पहुंच बनाई जाएगी। कुलगाम से यह कॉरिडोर मौजूदा एनएच-44 से जुड़ेगा।

67 किमी का रास्ता सिमटेगा, पहाड़ी सफर होगा आसान

परियोजना के तहत करीब 67 किलोमीटर लंबे रियासी-महोर हिस्से को घटाकर 30-35 किलोमीटर करने की योजना है। इस क्षेत्र में ऊंचाई और ढलानों को देखते हुए 2-3 सुरंगों और 2-3 ऊंचे और लंबे पुलों की जरूरत पड़ सकती है। हालांकि अंतिम संख्या और उनकी लंबाई डीपीआर तैयार होने के बाद ही स्पष्ट होगी। महोरे से कुलगाम की दूरी लगभग 45 किलोमीटर बताई गई है।

इस कॉरिडोर का एक बड़ा फायदा यह भी होगा कि यह भूस्खलन प्रभावित रामबन क्षेत्र को बायपास करेगा। इससे जम्मू-कश्मीर में हर मौसम में बेहतर संपर्क कायम करने में मदद मिल सकती है। साथ ही रियासी जिले में माता वैष्णो देवी के तीर्थयात्रियों के लिए भी कनेक्टिविटी बेहतर होने की संभावना है।

एनएच-44 के बाद अब नया वैकल्पिक रास्ता

जम्मू-श्रीनगर एनएच-44 में पिछले वर्षों में सुरंगों और फोर-लेनिंग के जरिए बड़े बदलाव हुए हैं। हालिया जानकारी के मुताबिक एनएच-44 की फोर-लेनिंग का काम अंतिम चरण में है और करीब 15 किलोमीटर हिस्सा बाकी बताया गया है। साथ ही विभिन्न हाईवे परियोजनाओं में छह और सुरंगों के अगले वर्ष तक पूरा होने की उम्मीद जताई गई है।

सरकारी स्तर पर जम्मू-कश्मीर में हाईवे नेटवर्क के विस्तार पर भी बड़ा जोर दिया जा रहा है। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के अनुसार, जम्मू-कश्मीर में करीब 1.35 लाख करोड़ रुपये के हाईवे प्रोजेक्ट पूरे, निर्माणाधीन और प्रस्तावित हैं। इनमें कई हाई-स्पीड कॉरिडोर और सुरंग परियोजनाएं शामिल हैं।

अब तक 22 परियोजनाएं, कुल 382 किलोमीटर लंबाई के साथ, 14819 करोड़ रुपये की लागत से पूरी हो चुकी हैं, जबकि 320 किलोमीटर की 16 परियोजनाएं करीब 22277 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से निर्माणाधीन हैं। कटरा-कुलगाम कॉरिडोर के पूरा होने से जम्मू और कश्मीर के बीच सड़क संपर्क का पूरा परिदृश्य बदलने की संभावना है।